अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार

अंग्रेजी हुक्मरानों के यूनिवर्सिटी में लागू कानून बदलेंगे, कॉमन एक्ट ड्राफ्ट सालभर से तैयार, बिल का इंतजार

सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे होंगे नियम-कायदे, समितियां और शक्तियां,प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में कुलपति उसी फील्ड के एक्सपर्ट होंगे

जयपुर। राजस्थान में अब सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसे नियम-कायदों से संचालन के लिए कॉमन एक्ट की कवायद को जल्द अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद है। अभी सभी यूनिवर्सिटीज एक्ट में कई अलग-अलग नियम-कायदे हैं।
इनमें से ज्यादातर एक्ट राजस्थान यूनिवर्सिटीज के स्थापना के वक्त अंग्रेजी हुक्मरानों के जनवरी 1947 में बनाएं कानून ही शामिल हैं। यूनिवर्सिटीज में चल रहे कानूनों को बदलने की कवायद गहलोत सरकार ने दो साल पहले शुरू की थी। सभी यूनिवर्सिटीज में एक जैसा कानून, शक्तियां, सरकारी हस्तक्षेप इत्यादि स्पष्टत: तय करने के लिए कॉमन एक्ट तैयार करने के लिए जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के कुलपति पीसी त्रिवेद्वी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेठी ने एक साल पहले ही एक्ट का ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। लेकिन इसे कानूनी अमलीजामा पहनाकर बिल का रुप दिया जाना बाकी है। विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे अभी बिल में तब्दील नहीं किया है। ऐसे में इस सत्र में इसके आने की गुजाइंश कम ही है। इसे वैधानिक मंजूरी मिले तो सभी यूनिवर्सिटीज के वर्तमान में लागू आदिम कानून विलोपित हो जाएंगे और समान कानून संहिता का तय फाूर्मला लागू हो जाएगा। प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज में यूजीसी की गाइडलान के साथ ही उसी फील्ड से जुड़े शिक्षक या व्यक्ति को कुलपति बनाए जाने का बड़ा फैसला भी ड्राफ्ट में शामिल है। ऐसा हुआ तो प्रदेश की मेडिकल, पत्रकारिता, कृषि, विधि इत्यादि विषयों की यूनिवर्सिटीज में उसी फील्ड के एक्सपर्ट ही कुलपति बन सकेंगे।

महाराष्ट्र-केरल में पहले से लागू है कॉमन एक्ट
महाराष्ट्र और केरल राज्य में यूनिवर्सिटीज के लिए पहले से कॉमन एक्ट बनाकर लागू कर चुके हैं। इसी की तर्ज पर राजस्थान में ड्राफ्ट तैयार किया गया है। जिसमें वर्तमान परिदृश्य के मुताबिक यूनिवर्सिटीज के एक्ट में रिफॉर्म करने, उसमें फेरबदल करने, शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने, प्रबन्धन ढांचे में बदलाव को फोकस कर तैयार किया गया है।

ड्राफ्ट पर अधिकारियों से चर्चा हुई है। जल्द इसे बिल में तब्दील करने के लिए फिर से बैठक करूंगा। प्रयास रहेगा कि इसी सत्र में इस पारित कराके लागू किया जाए। - राजेन्द्र यादव, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री

ड्राफ्ट में ये सिफारिशें
 प्रो वाइस चांसलर का पद सृजित हो, कुलपति की यूजीसी की तय गाइडलाइन के  अनुरूप यूनिवर्सिटी के ही सीनियर प्रोफेसर की नियुक्ति इस पद पर की जाए।
 सभी यूनिवर्सिटी में एक जैसी प्रबन्धन बॉडी और उनकी शक्तियां-कार्यप्रणाली हो। अभी यूनिवर्सिटीज में बोर्ड आॅफ मैनजमेंट, सिंडीकेट, सीनेट, एक्ज्यूक्टिव कमेटी, एकडेमिक काउंसिल इत्यादि अपने-अपने एक्ट के मुताबिक है।
 यूनिवर्सिटीज में न्यूनतम तय शैक्षणिक विभाग होना अनिवार्य होगा , टीचर्स की संख्या भी तय होगी।
 टीचर्स के पद तय करने और भर्ती के लिए सरकार की अनुमति लेने की जरुरत ना पड़े।  
 प्रबन्धन बॉडी में सरकारी अफसरों का हस्तक्षेप घटे, कहीं दो तो कहीं पांच सचिव स्तर के अफसर सदस्य। एक ही सचिव को शामिल करने का प्रस्ताव।
 हर विभाग में स्थाई फैकल्टी जरुरी होगी। अभी कई यूनिवर्सिटीज में ऐसे विभाग, जिन्हें खुले दो दशक से ज्यादा लेकिन स्थाई टीचर्स भी नहीं।

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