नींद में ही मौत का कारण बन सकता ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एपनिया

नींद से संबंधित डिस्ऑर्डर है ओएसए, बार-बार रुकती हैं सांस

नींद में ही मौत का कारण बन सकता ऑब्सट्रेक्टिव स्लीप एपनिया

संगीतकार बप्पी लहरी की इसी बीमारी से हुई है मौत

 जयपुर। मोटापा वैसे तो कई बीमारियों की जड़ है और कई बार जानलेवा भी हो सकता है। इन दिनों एक ऐसी बीमारी की चर्चा है जो कि मोटे लोगों में ज्यादा देखी जाती है, इसका नाम है आॅब्सट्रेक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए)। रिपोर्ट्स के मुताबिक संगीतकार और गायक बप्पी लहरी का इसी बीमारी के कारण निधन हुआ है। चिकित्सकों की मानें तो मोटे लोगों को इसकी सही जानकारी न होने के कारण अक्सर इलाज नहीं हो पाता। स्थिति गंभीर होने के बाद इसके कारण हाइपरटेंशन, हार्टअटैक, स्ट्रोक, अनियमित धड़कन, डायबिटीज एवं कार्डियोमायोपैथी जैसी बीमारियां हो सकती हैं जो मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।

नारायणा हॉस्पिटल की पल्मनोलॉजिस्ट और निंद्रा रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी स्वामी ने बताया कि यह नींद से संबंधित एक ब्रीदिंग डिस्आॅर्डर है, इससे सोते समय श्वास बार-बार रुकती है। इस बीमारी में व्यक्ति की श्वास नींद में ही रुक जाती है और उसे पता भी नहीं चलता है। यह दिक्कत 10 सेकंड्स या उससे अधिक समय तक हो सकती है। इससे खून में आॅक्सीजन की कमी होने लगती है। ऐसा होने पर दिमाग सक्रिय हो जाता है और आपको कुछ सेकेंड्स के लिए जगाता है ताकि आप अपने वायुमार्ग को खोल सकें। समस्या बढ़ने पर मरीज रात में कई बार उठता है और गला सूखना, बाथरूम जाना, खर्राटे बंद होने के बाद वापस चालू होने जैसे लक्षण भी आ सकते हैं।

जा सकती है जान

ओएसए में गले की मांसपेशियां नींद के दौरान ढीली पड़ जाती हैं और एयर फ्लो में रुकावट डालती हैं। इसकी वजह से मरीज तेज-तेज खर्राटे लेता है। सांस लेने में रुकावट देर तक रहने पर खून में आॅक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और मरीज की मौत हो सकती है।


संभव है इलाज
इस बीमारी का इलाज संभव है। इसमें एक ऐसे डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जो सोते समय आपके वायुमार्ग को खुला रखता है। एक और तरीका है जिसमें एक माउथपीस के जरिए निचले जबड़े पर दबाव डाला जाता है। कुछ मामलों में इसकी सर्जरी भी करनी पड़ती है।

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