नि:शुल्क दवा योजना का सच: टिटनेस के इंजेक्शन बाजार से, सीरप में मिले मरे मच्छर

एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई रोगियों को सप्ताह भर से टिटनेस का इंजेक्शन तक बाजार से लाना पड़ रहा है

नि:शुल्क दवा योजना का सच: टिटनेस के इंजेक्शन बाजार से, सीरप में मिले मरे मच्छर

गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी

उदयपुर। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा एवं जांच योजना में सभी रोगियों को नि:शुल्क दवा एवं जांच सुविधा देने  संबंधी राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई रोगियों को सप्ताह भर से टिटनेस का इंजेक्शन तक बाजार से लाना पड़ रहा है, वहीं एक रोगी को हॉस्पिटल से दिए गए सीरप में मरे हुए दो मच्छर दिखे। इन गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी है। गत सप्ताह भर से एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई जीवनरक्षक दवाइयों का टोटा है। सर्वाधिक उपयोग में आने वाले टिटनेस के इंजेक्शन का भी अभाव बना हुआ था। हॉस्पिटल प्रशासन ने सोमवार को इस इंजेक्शन की आपूर्ति की है। इसके अलावा इमरजेंसी में एंटीबायोटिक सिफेक्सीन, बीपी की दवा लोसारटन, दर्द निवारक आईबीप्रूफेन आदि दवाइयां नहीं है। ये दवाइयां अधिकतर रोगियों को लिखी जाती है। मंगलवार को एक रोगी को हॉस्पिटल से गले में संक्रमण पर सीरप ग्लोवर हैक्सीडीन दिया गया जिसमें मरे हुए दो मच्छर दिखाई देने पर रोगी के परिजनों ने अधीक्षक को शिकायत की।


सीरप सीलबंद है, जो डिट्रिक्ट डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) के पास दवा भण्डार से आई है। ऐसे में हॉस्पिटल के दवा भण्डार में पूरा स्टॉक चैक कराएंगे। इस स्टॉक को विड्रॉल करने के निर्देश दे दिए हैं। टिटनेस के इंजेक्शन व कुछ दवाइयां आरएमसीएल से ही शॉर्ट सप्लाई है। इनकी वैकल्पिक दवाइयां है। टिटनेस के इंजेक्शन लोकल बाजार से भी खरीदे गए लेकिन बाजार में भी उन दिनों में इसकी किल्लत है। जिस डीडीसी पर दवाइयों की उपलब्धता नहीं है, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
डॉ. आर.एल. सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल

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