अब बीमार पशुओं के उपचार में भी नकली दवाइयां
पशुपालन विभाग की जांच में अमानक मिली दवाएं
कोटा से 2 हजार वायल होंगे रिटर्न, कम्पनी का भुगतान रोका
कोटा। प्रदेश में एलोपैथिक दवाओं के बाद अब पशुओं के उपचार में उपयोग की जा रही कई दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इसकी बानगी है कि हाल में औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से की गई जांच में कई सैंपल अमानक पाए गए हैं। चिंताजनक बात है कि पशुओं को स्क्रब टाइफस जैसी बीमारी से बचाने के लिए काम में ली जाने वाली साइपर मेथ्रिन, डेल्टा मेथ्रेन जैसे दवाओं के 11 सैंपल जांच में अमानक मिले हैं। चिकित्सकों के अनुसार इससे पशुओं के साथ मानव जीवन पर असर पड़ रहा है। यही कारण है कि इस बार जिले सहित प्रदेश में स्क्रब टाइफस के मरीज पिछले साल की तुलना में बढ़े हैं। इस खुलासे के बाद पशुपालन विभाग और दवा निमार्ताओं में हड़कंप मच गया है। विभाग ने इन दवाओं की सप्लाई और बिक्री पर रोक लगा दी है। वहीं संबंधित बैच की दवाओं की आपूर्ति वापस मंगवाने के लिए कंपनी को निर्देश दिए हैं।
स्क्रब टाइफस बीमारी में आती है काम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पशुओं को स्क्रब टाइफस जैसी बीमारी से बचाने के लिए इन दवाइयों की आपूर्ति कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में की गई थी। कई जिलों में तो इनका उपयोग भी कर लिया गया था। कोटा जिले में साइपर मेथ्रिन और डेल्टा मेथ्रिन की करीब दो हजार वॉयल मौजूद थे, जिनका उपयोग नहीं किया गया था। ऐसे में पशुपालन निदेशालय के निर्देश पर इन दवाओं का उपयोग नहीं किया गया। वहीं इन दवाइयों को वापस कम्पनी को भेजा जाएगा। वहीं विभाग ने इन दवाइयों का भुगतान भी रोक दिया है। इसके अलावा अमानक दवा बनाने वाली कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में कंपनियां दोषी पाई जाती हैं तो उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
दवाओं में सक्रिय तत्वों की कम मिली मात्रा
जानकारी के अनुसार गत दिनों औषधि नियंत्रण विभाग ने विभिन्न जिलों से पशुपालन विभाग में उपयोग हो रही दवाओं के नमूने लिए थे। इनकी प्रयोगशाला जांच में डेल्टामेथ्रिन और साइपर मैथ्रिन सहित पेंटप्राजोल और मल्टी विटामिन की दवाओं में सक्रिय तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से कम थी। एक्सपर्ट के अनुसार गुणवत्ता विहीन दवाओं के उपयोग से पशुओं में संक्रमण देरी से ठीक होगा। वहीं इससे बीमार पडऩे की संभावना बढ़ सकती है। इसके अलावा, इन दवाओं के सेवन से पशुओं से मिलने वाले दूध और मांस पर भी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में जांच में दवाएं अमानक मिलने के बाद पशुपालन विभाग में हड़कम्प मच गया और विभाग के आला अधिकारियों ने इसे गम्भीरता से लेते हुए दवाओं का उपयोग रोकने के निर्देश जारी किए।
फैक्ट फाइल
जिले में कुल पशु -6.40 लाख
जिले में पशु चिकित्सा इकाइयां -180
प्रथम श्रेणी के पशु चिकित्सालय -16
पशु चिकित्सालय - 36
पशु चिकित्सा उप केंद्र - 124
इनका कहना है
बीमार पशुओं के उपचार में काम आने वाली दवाइयों के अमानक मिलने से पशुपालकों में चिंता व्याप्त हो गई है। इन दवाइयों के उपयोग से पशुओं के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। विभाग को अन्य दवाइयों की भी जांच करानी चाहिए ताकि पशुओं को खतरे बचाया जा सके।
- मनीष धाबाई, पशुपालक
कोटा पशुपालन विभाग में साइपर मेथ्रिन और डेल्टा मेथ्रिन की 2 हजार वॉयल उपलब्ध हैं, जो अमानक हैं। इन दवाइयों को वापस कंपनी को भिजवाया जाएगा। जांच में दवाइयां अमानक मिलने के बाद विभाग ने कंपनी का भुगतान रोक दिया है।
- डॉ. मदन परिहार, एसवीओ, पशुपालन विभाग
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