संस्कृति विवि और आईआईएमआर के बीच एमओयू 

बाजरा, ज्वार, रागी, समा के चावल आदि की खेती को नई दिशा मिलेगी

संस्कृति विवि और आईआईएमआर के बीच एमओयू 

हैदराबाद में संपन्न हुए इस द्विपक्षीय समझौते (एमओयू) पर संस्कृति विवि के चांसलर और आईसीएआर-आईआईएमआर हैदराबाद की निदेशक डॉ. सीवी रत्नावथी ने हस्ताक्षर कर मोहर लगाई।

जयपुर। संस्कृति विश्वविद्यालय और आईसीएआर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च हैदराबाद के मध्य एक महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है। हैदराबाद में  संपन्न हुए इस द्विपक्षीय समझौते (एमओयू) पर संस्कृति विवि के चांसलर और आईसीएआर-आईआईएमआर हैदराबाद की निदेशक डॉ. सीवी रत्नावथी ने हस्ताक्षर कर मोहर लगाई। इस समझौते के बाद मिलेट्स(बाजरा, ज्वार, रागी, समा के चावल आदि) की खेती को नई दिशा मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संस्कृति स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर और आईसीएआर-आईआईएमआर मिलकर शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेंगे। विद्यार्थियों के हित में उठाया गया यह कदम विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित होगा ऐसा माना जा रहा है। बताते चलें कि संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर द्वारा आर्गेनिक खेती बढ़ावा देने के लिए शोध पर विशेष ध्यान दे रहा है। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मिलेट्स रिसर्च हैदराबाद इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च की एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में मिलेट्स की खेती के लिए नई शोध कर किसानों के लिए नए रास्ते खोल रही है। समझौते के बाद संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर और आईसीएआर के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मिलेट्स रिसर्च हैदराबाद के मध्य शिक्षार्थियों, शिक्षकों और ज्ञान का आदान प्रदान होगा जिसका लाभ कृषि के विद्यार्थियों के अलावा देश के किसानों को मिल सकेगा।

समझौते के दौरान संस्कृति विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने कहा कि संस्कृति स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का उद्देश्य भारतीय कृषि को लाभदायक और अत्याधुनिक बनाना है ताकि हमारे देश के किसान समृद्ध हो सकें। समझौते के दौरान संस्कृति स्कूल आफ एग्रीकल्चर के डीन डा. रजनीश त्यागी, विशेष कार्याधिकारी मीनाक्षी शर्मा भी मौजूद रहीं।

 

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