बेरोजगारी का संकट

बेरोजगारी का संकट गहरा होने के साथ ही सरकारी नौकरियों की दौड़ तेज होती जा रही है।

बेरोजगारी का संकट

पिछले आठ सालों में यह संकट गहरा हुआ है। 2014-15 से 2021-22 के बीच केन्द्र सरकार की नौकरियां केवल 7.22 लाख लोगों को मिलीं। इसका अर्थ लगभग तीन सौ प्रार्थियों में से केवल एक का सफल होना है। ये आंकड़े किसी और ने नहीं, बल्कि बुधवार स्वयं सरकार ने लोकसभा में पेश किए हैं।

बेरोजगारी का संकट गहरा होने के साथ ही सरकारी नौकरियों की दौड़ तेज होती जा रही है। पिछले आठ सालों में यह संकट गहरा हुआ है। 2014-15 से 2021-22 के बीच केन्द्र सरकार की नौकरियां केवल 7.22 लाख लोगों को मिलीं। इसका अर्थ लगभग तीन सौ प्रार्थियों में से केवल एक का सफल होना है। ये आंकड़े किसी और ने नहीं, बल्कि बुधवार स्वयं सरकार ने लोकसभा में पेश किए हैं। निश्चित रूप से इन आंकड़ों के बारे में कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। लेकिन ये आंकड़े यह संकेत देने में पर्याप्त हैं कि स्थिति काफी खराब है। अग्निवीर योजना के खिलाफ हुए आंदोलन का आंशिक कारण यह भी है कि बेरोजगारों के लिए रोजगार की सुविधाएं काफी कम हैं। बेरोजगारी समस्या एक यथार्थ है, तो इसका समाधान भी यथार्थ ही होना चाहिए। ऐसा तभी संभव हो सकता है, जब आर्थिक वृद्धि की गति बढ़ाई जानी चाहिए। अन्तरराष्ट्रीय मुद्राकोष आईएमएफ ने अनुमान लगाया है कि भारत में इस वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तथा 2023-24 में 6.1 प्रतिशत होगी। दोनों वर्षों में यह आईएमएफ के शुरूआती अनुमानों से 80 बिन्दु कम होगी। वर्तमान समय में अन्तरराष्ट्रीय हालात हमारी अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं। इसमें कच्चे तेल के अधिक दाम, आपूर्ति में आने वाली बाधाएं तथा विश्व अर्थव्यवस्था की सामान्य गिरावट शामिल हैं। अप्रैल के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी निराशा बढ़ी है। पिछली मंदी के ढाई साल बाद दुनिया जल्दी ही एक वैश्विक मंदी की ओर आगे बढ़ सकती है। इस पृष्ठभूमि में भारत को न केवल स्वयं को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के उपायों के साथ-साथ बेरोजगारी के कारण पैदा समस्या से भी निपटना होगा। सारे संकटों से निपटने के लिए एक मात्र राह यही है कि आर्थिक सुधारों को व्यापक व गहरा बनाना है। यह काम खासकर कृषि व श्रम कानूनों के क्षेत्र में होना चाहिए। हालांकि मोदी सरकार ने कुछ ऐसे प्रयास किए भी हैं। निजीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दिखाई है, जिसका एक प्रमाण एयर इण्डिया की बिक्री है। दो साल पहले कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए तीन अच्छे कानून बनाए गए थे, लेकिन राजनीतिक कारणों से मामले से पीछे हटना पड़ा। किसान संगठन कानूनों को समझ नहीं पाए। मोदी सरकार ढांचागत सुधारों में जुटी है और प्रधानमंत्री मोदी ने खैरात संस्कृति पर भी जोरदार बहस शुरू की है, जो आर्थिक सुधारों को प्रभावित करती है। जैसे भी आर्थिक वृद्धि में तेजी लाकर रोजगारों का सृजन अब जरूरी हो गया है।

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