बैडमिंटन में अब कोटा की बेटियां भी बढ़ा रही कदम

राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने की तमन्ना

बैडमिंटन में अब कोटा की बेटियां भी बढ़ा रही कदम

कोटा में तीन दर्जन बालिकाएं इस खेल में नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटी हुई है। इनकी सफलता के लिए कोच भी पूरी मेहनत कर रहे हैं।

कोटा। खेल जगत में साइना नहवाल, पीवी सिंधु व ज्वाला गुट्टा जैसी खिलाड़ियों को किसी परिचय की जरुरत नहीं है। बैडमिंटन में यह खिलाड़ी अपनी मेहनत व प्रतिभा से अन्तरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर चुकी है। ऐसे में अब बैडमिंटन में भी बालिकाओं का रुझान बढ़ने लगा है। कोटा में तीन दर्जन बालिकाएं इस खेल में नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटी हुई है। इनकी सफलता के लिए कोच भी पूरी मेहनत कर रहे हैं। एक समय था जब भारत में केवल क्रिकेट का ही क्रेज था। इस खेल का जूनून लोगों के सिर चढ़कर बोलता था। समय बदलने के साथ कई खेलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा, उन्हीं खेलों में बैडमिंटन भी शामिल है। जिसमें युवकों के साथ युवतियों ने राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं को जीत कर अपने कौशल को साबित किया। विश्व में भारत का परचम लहराने पर युवाओं का इस खेल के प्रति रुझान बढ़ने लगा। कड़ा अभ्यास ही सफलता का राज कोटा शहर में भी बालिकाओं का इस खेल के प्रति क्रेज बढ़ने लगा है। इसी के चलते शहर में कई स्थानों पर अगल-अलग बैडमिंटन अकेडमी के माध्यम से बालिकाओं को अभ्यास करवाया जा रहा है। इसके लिए अकेडमी अपने स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध करवा रही हैं। पूर्व में बैडमिंटन में बालिकाओं की संख्या कम थी।

समय के साथ बालिकाओं का कारवां भी बढ़ता चला गया। वर्तमान में शहर में तीन दर्जन से अधिक बालिकाएं बैडमिंटन में जलवा दिखाने के लिए कड़ा अभ्यास कर रही है। अभिभावक भी लेने लगे दिलचस्पी बैडमिंटन कोच साक्षी ने बताया कि लड़की होने की वजह कई खिलाड़ियों का खेलने का सपना टूट जाता है, लेकिन अब समय के साथ अभिभावकों की सोच में बदलाव आया है। इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा कि बैडमिंटन में अब महिला कोच की भी उपलब्धता हो गई। पूर्व में महिला कोच की कमी थी, जिससे अभिभावक अपनी बेटियों को भेजने में संकोच करते थे, लेकिन अब अभिभावकों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। इस कारण बालिकाओं संख्या बढ़ने लगी है। वर्तमान में कुन्हाड़ी स्थित विजयवीर क्लब की बैडमिंटन अकेडमी में सात साल की बालिकाओं से लेकर 10वीं-11वीं की छात्राएं बैडमिंटन खेलने आ रही हैं।

वर्ष 2018 सीबीएसई नेशनल में ब्रांज मेडल प्राप्त किया था। उसके बाद कोरोना के चलते प्रतियोगितएं नहीं हो पाई। अब फिर से स्कूल गेम्स शुरू होने वाले हैं। उन्हीं की तैयारी चल रही है। कोशिश यही है कि इस बार नेशनल में गोल्ड मेडल प्राप्त कर कोटा का नाम रोशन करूं। इसके लिए अब कड़ा अभ्यास किया जा रहा है। -अनन्या बैडमिंटन

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खिलाड़ी बेटियां किसी से कम नहीं होती है। यदि उन्हें सही मंच मिले तो वह खेल में सफलता का परचम लहरा सकती हैं। कोटा में बेटियों को बैडमिंटन खेल के लिए अच्छा मंच मिल रहा है। इस खेल में बेटियों की भागीदारी निरन्तर बढ़ रही है। कोविड के कारण दो साल से खेल गतिविधियां बंद थी। अब फिर से प्रतियोगिताएं शुरू होने पर कोटा की बेटियां अपनी प्रतिभा दिखा पाएंगी। -साक्षी श्रीवास्तव, बैडमिंटन कोच

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