पाकिस्तान में भारतीय नम्बर से चालू करवाए व्हाट्सएप और सिग्नल एप, दिल्ली से जासूस को किया गिरफ्तार

22 साल की उम्र में पाकिस्तान से भारत आया

पाकिस्तान में भारतीय नम्बर से चालू करवाए व्हाट्सएप और सिग्नल एप, दिल्ली से जासूस को किया गिरफ्तार

पाक अफसर के भेजे रुपयों से खरीदा मोबाइल और भेजा ओटीपी

जयपुर। राजस्थान इंटेलीजेंस टीम ने रविवार को भीलवाड़ा से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए अभियुक्त नारायण लाल गाडरी से पूछताछ के बाद दिल्ली से एक और आरोपी भागचंद (46) पुत्र बल्लूराम निवासी संजय कॉलोनी भाटी माइंस को गिरफ्तार किया है। आरोपी तीन-चार साल से पाकिस्तानी हैंडलर आॅफिसर के संपर्क में था और उन्हें भारतीय मोबाइल नंबर एवं सिम कार्ड उपलब्ध करा रहा था। वह जासूसी की एवज में पेटीएम के जरिए रुपए ले रहा था। डीजीपी इंटेलीजेंस उमेश मिश्रा ने बताया कि राजस्थान इंटेलीजेंस की टीम पाकिस्तान खुफिया एजेंसी की ओर से राजस्थान में की जाने वाली जासूसी गतिविधियों पर निगरानी रखती है। निगरानी के दौरान 14 अगस्त को जासूसी गतिविधियों में लिप्त मिलने पर भीलवाड़ा में बेमाली निवासी नारायण लाल गाडरी (27) को गिरफ्तार किया था। नारायण विभिन्न मोबाइल कम्पनियों के सिम कार्ड जारी करवाकर पाक हैंडलिंग अफसरों को नंबर सोशल मीडिया अकाउंट संचालन के लिए उपलब्ध करवाता था। मिश्रा ने बताया कि नारायण फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है। उससे पूछताछ में दिल्ली निवासी भागचंद के बारे में जानकारी मिली। भागचंद भी पाक हैंडलिंग अफसर के संपर्क में रहते हुए जासूसी कार्यों में लिप्त हो गया। नारायण की ओर से जारी करवाए सिम कार्ड को भागचंद ने दिल्ली के कश्मीरी गेट बस स्टैंड स्थित खान मार्केट टैÑवल्स आॅफिस में मंगवाकर प्राप्त किए।

कपड़ों और मसाले के पैकेट में छिपाकर मुम्बई भेजी सिम 
पाक हैंडलिंग अफसर से प्राप्त रुपयों में से भागचंद ने एक सैकंड हैंड कीपैड फोन भाटी माइंस बाजार से खरीदा। उसके बाद नारायण की ओर से भेजे गए सिम कार्ड को फोन में लगाकर ओटीपी शेयर कर पाकिस्तान में भारतीय मोबाइल नंबर से सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करवाने के लिए व्हाट्सएप एवं सिग्नल एप डाउनलोड करवाए। बाद में उन सिम कार्ड को बच्चों के कपड़ों एवं एमडीएच मसाले के पैकेट में छिपाकर पार्सल से मुम्बई भेज दिए। 

छह साल में मिली नागरिकता
भागचंद का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। सन 1998 में 22 वर्ष की उम्र में वीजा लेकर परिवार सहित दिल्ली आकर रहने लगा। सन 2016 में उसे भारत की नागरिकता मिल गई और वह दिल्ली में ही टैक्सी चलाने एवं मजदूरी का कार्य करने लगा। भागचंद के रिश्तेदार और अन्य परिजन पाकिस्तान में रहते हैं। इनके माध्यम से वह तीन-चार वर्ष से पाक हैंडलिंग अफसर के संपर्क में था। 2-3 साल पहले भागचंद ने पाक हैंडलिंग अफसर के कहने पर अपने नाम से सिम कार्ड खरीद कर भारतीय नंबर उपलब्ध कराए थे और लगातार उनके संपर्क में था। जासूसी की एवज में पेटीएम के माध्यम से बैंक खाते में रुपए ले रहा था।

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