एशिया-प्रशांत किसी देश के लिए युद्ध का क्षेत्र नहीं : जिनपिंग

ईमानदार रवैया रखने की कही बात

एशिया-प्रशांत किसी देश के लिए युद्ध का क्षेत्र नहीं : जिनपिंग

राष्ट्रपति ने कहा कि जो देश नए शीत युद्ध छेडऩे की तैयारी में हैं, उन्हें हमारे देश से अनुमति नहीं दी जाएगी।

बैंकाक। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है, कि एशिया-प्रशांत किसी देश के लिए युद्ध का क्षेत्र नहीं है इसलिए, किसी भी देश को इसे युद्ध का मैदान बनाने का विचार त्याग देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार  जिनपिंग की यह लिखित टिप्पणी थाइलैंड की राजधानी बैंकाक में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन के मौके पर एक व्यापारिक कार्यक्रम के लिए तैयार की गई है। राष्ट्रपति ने कहा कि जो देश नए शीत युद्ध छेडऩे की तैयारी में हैं, उन्हें हमारे देश से अनुमति नहीं दी जाएगी। हमें एक दायरे में रहकर, एक दूसरे के साथ स्पष्टवादी और ईमानदारी का रवैया रखना चाहिए। आयोजकों द्वारा प्रदान किए गए इस क्षेत्र को युद्ध का मैदान नहीं बनना चाहिए। 

उत्तर कोरिया ने जिंनपिंग और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से मिलने के बाद कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। अमेरिका और उसके सहयोगियों को कठोर सैन्य प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। रूस जी-20 और एशिया, प्रशांत महासागरीय आर्थिक सहयोग (एपेक) दोनों का सदस्य है लेकिन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शिखर सम्मेलन से दूर रहे। पहले उप प्रधान मंत्री एंड्री बेलौसोव एपेक में उनका प्रतिनिधित्व करेंगे। उत्तर कोरिया द्वारा रिकॉर्ड मिसाइल हमले के बाद चीन और जापान के नेताओं ने गुरुवार को तीन साल में अपनी पहली आमने-सामने की (एजेंसी) की। चीन और जापान नेताओं की (एजेंसी) एशिया, पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (एपेक) फोरम के एक शिखर सम्मेलन के दौरान महामारी से उबरने और यूक्रेन में रूस द्वारा लगातार जारी युद्ध से वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल पर केंद्रित थी।

किशिदा ने इस बैठक की शुरुआत में कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि चीन के निर्माण में और तेजी लाना महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है, जो उसका सातवां परीक्षण होगा। अगस्त में जब चीन के सैनिकों को अभ्यास कराया जा रहा था उस दौरान, बड़े पैमाने पर चीनी मिसाइलें ताइवान के आसपास दागी गईं और उनमें से कुछ जापान के क्षेत्र में गिरी थीं। इसके अलावा, टोक्यो ने अपने क्षेत्र में चीनी हवाई और समुद्री उल्लंघनों का विरोध किया। एपेक सभा में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी शामिल होंगे।

 

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