खेल संघों पर लगने वाले आरोप और खेल गरिमा

पहलवानों और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के बीच चल रहा विवाद

खेल संघों पर लगने वाले आरोप और खेल गरिमा

सत्यता कुछ भी हो ऐसे में खिलाड़ियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से लगाए जा रहे आरोपों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

अभी हरियाणा सरकार में खेल मंत्री संदीप सिंह (पूर्व भारतीय हॉकी टीम के कप्तान) का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष एवम् सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों ने मोर्चा खोल दिया। कुछ उसी प्रकार के आरोप कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर भी कुछ महिला पहलवानों द्वारा लगाए जा रहें हैं। दोनों ही घटनाएं देश के खेल जगत से जुड़ी हुई हैं और ये घटनाएं ऐसे समय में सामने आ रही हैं, जब देश आगामी 2036 ओलंपिक की मेजबानी हासिल करने का प्रयत्न कर रहा है।

इन आरोपों में कितनी सत्यता है यह तो जांच होने पर ही सामने आएगा। कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष इन आरोपों को उनके खिलाफ एक साजिश बता रहे हैं,  उनके समाचारों में आने वाले बयानों से तो लगता है कि पहलवानों और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष के बीच चल रहे विवाद का जल्दी कोई हल निकलने वाला  दूसरी ओर आरोप लगाने वाले पहलवान आरोपों के समर्थन में सबूत होने की बात कह रहे हैं। पर जो भी हो, इस घटनाक्रम को खेल जगत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण ही माना जाएगा। बृजभूषण शरण सिंह का विरोध कर रहे पहलवानों की मांग है कि सभी राज्यवार कुश्ती संघों और कुश्ती महासंघ को भंग किया जाए तथा खेल मंत्रालय ऐसे संघों को अपने नियंत्रण रखकर इनका स्वयं पुन: गठन करे और वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ  कार्यवाही की जाए। सत्यता कुछ भी हो ऐसे में खिलाड़ियों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से लगाए जा रहे आरोपों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। देश की वर्तमान केंद्र सरकार तथा  सभी राज्यों की सरकारों द्वारा खेलों और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए बहुत से सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को सुविधाएं देने की बात हो या फिर प्रोत्साहन राशि देने की बात हो सभी में सरकारें दिल खोल कर खर्च कर रही है। ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं सरकार की खेलों के प्रोत्साहन के लिए किए जा रहे कार्यों में अवरोधक का कार्य करते हैं। देश के प्रधानमंत्री खेलों के प्रोत्साहन के लिए अविस्मरणीय, अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं। परिणाम भी हमारे सामने आ रहे हैं। देश के खिलाड़ी, खेल के हर मैदान में अपना परचम लहरा रहे हैं। धरने पर बैठे सभी पहलवानों ने एक स्वर में देश की सरकार पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा है कि देश के प्रधानमंत्री, ग्रह मंत्री और खेल मंत्री उन्हें न्याय जरूर दिलवाएंगे।

सरकार को खिलाड़ियों के विश्वास को कायम रखते हुए पहलवानों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाने तथा आरोप सत्य सिद्ध होने पर उचित कार्यवाही करके, खिलाड़ियों के मनोबल को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। देश की उभरती हुई खेल प्रतिभाओं को उचित मान सम्मान मिले, उन्हें किसी भी प्रकार के शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक शोषण का सामना न करना पड़े, तभी देश की खेल प्रतिभाएं, खेल के मैदान में अपना परचम लहरा सकेंगी। भविष्य में देश की खेल प्रतिभाओं के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं या अन्य किसी भी प्रकार के विवादों को रोकने के लिए खेल संघों और महासंघों का गठन उसी क्षेत्र विशेष की राष्टÑीय और अंतरराष्टÑीय खेल प्रतिभाओं की सर्वसहमति से किया जाना चाहिए। इन संघों के अध्यक्ष पदों पर भी खेल विशेष के सबसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए। क्योंकि वरिष्ठ और अनुभवी खिलाड़ी ही अपने खेल विशेष की जरूरतों और समस्याओं को अच्छी तरह समझ सकते हैं और उनका निदान भी कर सकते हैं।

हाल ही देश की प्रसिद्ध धाविका पी टी ऊषा को भारतीय ओलंपिक संघ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समाचारों की मानें तो ऐसा पिछले 95 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब इस पद पर किसी पूर्व ओलंपिक विजेता को नियुक्त किया गया है। महाराजा यादविंदर सिंह के बाद पी.टी. ऊषा दूसरी खिलाड़ी हैं तथा पहली महिला खिलाड़ी हैं, जो इस पद पर नियुक्त हुई है। तभी सही मायनों में खेल संघ और महासंघ अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकेंगे। खेलों को राजनीति और राजनीतिक चेहरों से दूर रखना बहुत आवश्यक है। इसके लिए सरकार को विभिन्न खेल संघों और महासंघों के गठन और कार्य प्रणाली सीधे खेल मंत्रालय के नियंत्रण और निगरानी में रखने की आवश्यकता है।ताकि भविष्य में इस प्रकार आरोप प्रतिरोपों का खेल संघों को सामना न करना पड़े तथा खेलों की गरिमा कायम रह सकें।
             -राजेंद्र कुमार शर्मा
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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