स्मोक फूड से पेट के कैंसर की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि

खान-पान की गलत आदतों से दो दशकों में भारत में तेजी से बढ रही कोलोरेक्टल कैंसर रोगियों की संख्या

स्मोक फूड से पेट के कैंसर की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि

एक सामान्य भारतीय परिवार सप्ताह में एक से दो बार होटल, रेस्त्रो या स्ट्रीट फूड खाना पसंद करता है। साथ ही स्मोक और ग्रिल किया हुआ भोजन (बाब्रिक्यू) खाना पसंद करता है, जो कि नुकसानदायक होता है।

जयपुर। भारत में जिस तेजी से वेस्टर्न वर्ल्ड के खाने-पीने की आदतों को अपनाना शुरू किया है उसी तेजी से भारत में कोलोरेक्टल कैंसर रोगियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। एक सामान्य भारतीय परिवार भी सप्ताह में एक से दो बार होटल, रेस्त्रो या स्ट्रीट फूड खाना पसंद करता है। साथ ही स्मोक और ग्रिल किया हुआ भोजन (बाब्रिक्यू) खाना पसंद करता है, जो कि नुकसानदायक होता है। यह कहना है कोयंबटूर के जीआई सर्जन डॉ एस राजपांडियन का। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की ओर से राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में चल रही इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस बीएमकॉन कोर (BMCON-8) दौरान देष-विदेष से आए कोलोरेक्टल कैंसर के विशेषज्ञों की ओर कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।

कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ शशिकांत सैनी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के पहले दिन पांच लाइव सर्जरी की गई जिनका आरआईसी में लाइव टेलीकास्ट किया गया। देश के ख्याति प्राप्त जीआई सर्जन की ओर से एडवांस सर्जिकल प्रोसिजर के बारे में बताया गया। इसके साथ ही करीब 18 सेशन आयोजित हुए जिसमें यूएसए के डॉ पारूल शुक्ला, मुंबई के डॉ अवनीश सकलानी, अहमदाबाद से डॉ जगदीश एम कोठारी, पुणे से डॉ अमोल बापे और श्रीनगर से डॉ शबनम बशीर ने शामिल हुए।

कॉन्फ्रेंस के उदघाटन समारोह के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल एस आर मेहता, एवीएसएम, वीएसएम, पीएचएस, डायरेक्टर, जनरल मेडिकल सर्विसेज आर्मी (रिटायर्ड) ने कैंसर रोग की पहचान समय पर होने पर जोर दिया। बीएमसीएचआरसी की ओर से चलाए जा रहे स्क्रीनिंग कार्यक्रम कैंसर जांच आपके द्वार की प्रषंसा करते हुए उन्होंने इस तरह के कार्यक्रम को आज के समय में बहुत उपयोगी बताया। उद्घाटन समारोह में आरयूएचएस के वाइस चांसलर डॉ सुधीर भंडारी और उदयपुर के डॉ सीपी जोषी ने कॉन्फ्रेंस के जरिए कॉलोनी और रेक्टल कैंसर विषय पर की जा रही चर्चाओं को महत्वपूर्ण बताया। 

लिक्विड बॉयोप्सी की हुई शुरूआत
डॉ एस राजपांडियन, जीआई सर्जन, कोयंबटूर ने बताया कि सॉलिड टयूमर की पहचान अब लिक्विड बॉयोप्सी के जरिए संभव है। सॉलिड टयूमर की पहचान के लिए बॉयोप्सी आवष्य जांच होती है, लेकिन कई लोगों में इस जांच को लेकर भ्रम है कि बॉयोप्सी से कैंसर छीड़ जाता है और शरीर में फैल जाता है। ऐसे लोगों की संख्या भी काफी है जो अपने डर से बॉयोप्सी ही नहीं करवाते और उपचार से वंचित रहते है। ऐसे में लिक्विड बॉयोप्सी उनके लिए एक बड़ी राहत है। इसमें रक्त जांच के जरिए भी कैंसर की पहचान हो सकती है। हालांकि यह टेस्ट महंगा और एडवांस होने के कारण भारत में अभी बहुत ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ है।

Post Comment

Comment List

Latest News

सारा अली खान की फिल्म 'ऐ वतन मेरे वतन' का टीजर रिलीज, आजादी के दौर की है कहानी सारा अली खान की फिल्म 'ऐ वतन मेरे वतन' का टीजर रिलीज, आजादी के दौर की है कहानी
कन्नन अय्यर के निर्देशन में बनी ए वतन मेरे वतन में सारा अली खान के अलावा सचिन खेडेकर, अभय वर्मा,...
विकास की गति में अवरोध बनी मोदी सरकार, सिर्फ मित्रों का हित साधा : राहुल
कुणाल खेमू की फिल्म मडगांव एक्सप्रेस का टीजर रिलीज
लेबनान पर इजरायल ने किए हमले, 4 लड़ाकों की मौत
अशोक गहलोत विधानसभा चुनाव की हार की हताशा में हैं : मेघवाल
घरेलू एलपीजी गैस के वाणिज्यिक उपयोग पर जब्त किए 45 सिलेंडर 
गंभीर का सियासी पिच से संन्यास का एलान, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा पत्र