'इंडिया गेट'

जानें इंडिया गेट में आज है खास...

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पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....

निशाना कहां?  
कांग्रेस में इन दिनों ‘जी-23’ की हलचल। भूपेन्द्र सिंह हुड्डा मानो मध्यस्थ की भूमिका में। वह ‘जी-23’ के अगुवा गुलाम नबी आजाद से मिले। इसके पहले हुड्डा सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी से मिले। संकेत और संदेश क्या? खैर, शशि थरुर भी अब इस ग्रुप से जुड़ गए। आखिर माजरा क्या? पांच राज्यों के चुनाव के बाद जो कांग्रेस में चल रहा। क्या वह आधा सच? असल में, अगले दो तीन माह में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव होने जा रहे। करीब 70 से ज्यादा सीटों पर चुनाव होंगे। इसमें कई कांग्रेस दिग्गजों की सीट खाली हो रही। इसमें कपिल सिब्बल और आनद शर्मा जैसे नेता शामिल। जबकि गुलाम नबी आजाद पहले ही खाली। कांग्रेस उन्हें कहीं से भी भेज सकने में असमर्थ। सो, सारी कवायद यहीं तक तो सिमित नहीं? कैसे भी उच्च सदन में पहुंचने का जतन। आखिर राजनीति में सारी उठापटक तो कुर्सी के लिए ही। संगठन या पार्टी के लिए समय दिया होता। तो आज क्या कांग्रेस का यह हाल होता?


जोर का झटका!
पीएम मोदी ने पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी जोर का झटका दिया। असल में, ऐसा जानकार कह रहे। चीन न तो बोल पा रहा और न ही चुप रह पा रहा। बात सैन्य क्षमता की ही नहीं, बल्कि धंधे की भी। बीती नौ मार्च को भारत की ओर से एक मिसाइल गलती से पाकिस्तान के 125 किमी भीतर जा गिरी। मिसाइल करीब तीन मिनट तक पाक की वायु सीमा में भी रही। अब परेशानी यह हुई कि पाकिस्तान को अगले दिन सार्वजनिक रूप से यह बताना पड़ा। क्योंकि पाक का एयर डिफेंस सिस्टम न इसे पकड़ सका और न ही हवा में मार गिरा पाया। अब यह सारा सिस्टम पाक ने चीन से खरीदा। मतलब बात हथियारों की गुणवत्ता तक की। यानी चीन की सैन्य साख रसातल में। जबकि भारत के पास ऐसी मिसाइल प्रणाली। जो दुश्मन के घर में पहुंच भी गई और वह पकड़ी भी नहीं गई। जबकि चीन की पोल खुल गई। फिर पाक तो कहीं का नहीं रहा।


बढ़ रहा कारवां!
पांच राज्यों में सत्ता पर काबिज हुए दलों के मुख्यमंत्रियों ने कुर्सी संभाल ली। यूपी में योगीजी तो पंजाब में भगवंत मान साहब की चर्चा अलग से हो रही। उत्तराखंड में पुष्करसिंह धामी की लॉटरी फिर से खुली। तो प्रमोद सावंत भी गोवा में कुर्सी बचा ले गए। तो क्या 2024 के लिए भाजपा की रणनीति का कारवां आगे बढ़ रहा। जबकि अभी कांग्रेस समेत विपक्षी दल हार के सदमे में। इससे जहां राज्यसभा में भाजपा की ताकते बढ़ेगी। तो कांग्रेस और कमजोर होगी। राष्ट्रपति चुनाव में भी भाजपा और सहज रहेगी। क्या भाजपा ने 2024 के लिए सेमी फाइनल पार कर लिया? और अब बारी मुख्य मुकाबले की? आम चुनाव तक करीब एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनाव। अभी विपक्ष अपनी ताकत बढ़ाने की कवायद ही कर रहा। साथ में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस मोर्चे की भी चर्चा। फिर पीएम फेस को लेकर भी कई क्षत्रपों में आपसी प्रतिद्वंदिता भी। लेकिन भाजपा में योगीजी के रुप में भविष्य जरुर दिख रहा!


चीनी पहल?
यह चीन को अचानक क्या हो गया? चीनी विदेश मंत्री बिन बुलाए नई दिल्ली पहुंच गए। वह पीएम मोदी से मिलने को बेकरार हो गए। लेकिन उन्हें बेरंग लौटना पड़ा। मिले भी तो एनएसए डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से। लेकिन इन दोनों ही मोदीजी के खास सिपहसालारों ने एकदम साफ -साफ बता दिया। सीमा पर कारस्तानी अब बीते जमाने की बात। चीनी सेना को पीछे हटाना ही पड़ेगा। हालत यह हो गई कि चीन ने अपने विदेश मंत्री के इस दौरे की आधिकारिक घोषणा करने की हिम्मत तक नहीं दिखाई। असल में, चीन की हालत समझने लायक। आखिर ऐसा क्या कारण कि चीन इतना उतावला और अधीर हो गया? चीनी विदेश मंत्री से पीएम मोदीजी का नहीं मिलना। मतलब महाशक्ति बनने का सपना पाले चीन की इससे ज्यादा क्या बनेगी? रूस-यूक्रेन विवाद में भले ही भारत तटस्थ रहा। लेकिन इसी से चीन को पीओके में भारत के सैन्य ऑपरेशन का डर सता रहा! जहां उसकी कई अरबो डॉलर की परियोजनाएं चल रहीं।


खुद को समेटा!
तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूपी के आजमगढ़ से सांसदी छोड़ करहल से विधायकी को चुना। उन्होंने यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनना ज्यादा श्रेयकर समझा। लेकिन इसके भी गहरे मायने। सपा संरक्षक मुलायम सिंह एक जमाने में केन्द्र की राजनीति में भी प्रभावी दखल रखते थे। वह अखिलेश के बस की नहीं। वह लगातार चार चुनाव 2014, 2017, 2019 और अब 2022 में हार चुके। इसके बाद सपा अध्यक्ष ने स्मार्ट फैसला लिया। वह दिल्ली के बजाय लखनऊ में रहकर अपने को यूपी में मजबूत करेंगे। आखिर यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा भी तो। सीएम योगीजी का भी अब भाजपा के राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरना तय। सो, अखिलेश द्वारा उनकी नीतियों एवं सरकार की मजम्मत करना अपने आप में संकेत होगा। सो, एक और क्षत्रप ने अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को समेट लिया। जो भाजपा के लिए भी मुफिद। लेकिन ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, केसीआर, तेजस्वी यादव, अरविंद केजरीवाल समेत कई क्षत्रप मोदी के खिलाफ अभी भी लाइन में।
-दिल्ली डेस्क

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