कोयला संकट के बाद भी राज्य को 65 फीसदी बिजली आपूर्ति कर रहा हाड़ौती

हाड़ौती के पावर प्लांट में हो रहा पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन , कोटा थर्मल की सात में से छह यूनिट कर रही है बिजली उत्पादन

कोयला संकट के बाद भी राज्य को 65 फीसदी बिजली आपूर्ति कर रहा हाड़ौती

राज्य के विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के थर्मल प्लांट्स से करीब 4100 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है।

कोटा। कोयले की कमी से देश के कई पावर प्लांट बंद होने की स्थिति में आ चुके हैं। बिजली उत्पादन पूरी तरह से गड़बड़ा गया है। गर्मी आने के साथ ही प्रदेश में बिजली की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद  हाड़ौती के पावर प्लांट पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रहे हैं। राज्य के विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के थर्मल प्लांट्स से करीब 4100 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा है। इसका 65 फीसदी उत्पादन हाड़ौती के तीन प्लांट कोटा, कालीसिंध और छबड़ा थर्मल पावर प्लांट से हो रहा है। इन तीनों की कुल उत्पादन क्षमता 4760 मेगावाट है। अभी तीनों प्लांट्स से 2735 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है । हाड़ौती  प्रदेश की 65 प्रतिशत बिजली की डिमांड पूरी कर रहा हैं।

कोटा थर्मल प्लांट की छह यूनिटों के साथ पूरी क्षमता से चल रहा हैं, जबकि झालावाड़ कालीसिंध प्लांट अपनी दोनों में से एक यूनिट को 75 फीसदी क्षमता से संचालित कर रहा है। छबड़ा प्लांट की चार में से एक यूनिट अभी बंद है।  प्लांटों की क्षमता महज 40 फीसदी ही है। हालांकि बीते सप्ताह से कोयले की आपूर्ति तीनों प्लांट्स में सुधरी है और लगातार 10-12 रैक यहां पर आ रही हैं। इस प्लांट को रोज 20 रैक की आवश्यकता है। हाड़ौती के प्लांट्स से करीब 7185 मेगावाट बिजली का हो रहा उत्पादन, कोटा थर्मल की  सभी सात में से छह यूनिट चल रही है। कालीसिंध प्लांट में रोज 4 रैक कोयला आ रहा है। झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां पर 500 मेगावाट के आसपास उत्पादन हो रहा है। इस प्लांट की 600-600 मेगावाट की दो यूनिट इसमें से एक यूनिट अभी रखरखाव के कारण बंद चल रही हंै। इनकी क्षमता 1200 मेगावाट है, इसमें से एक यूनिट को 70 से 75 फीसदी क्षमता से चलाया जा रहा है। चीफ इंजीनियर केएल मीणा ने बताया कि बीते दिनों एक यूनिट कोयले को वार्षिक रखरखाव के कारण शटडाउन ले रखा है। साथ ही रोज 4 रैक कोयले की आ रही है, जिनमें 16 हजार मैट्रिक टन कोयला आ रहा है।

‘ओल्ड इज गोल्ड’ साबित हो रहा कोटा थर्मल
कोयले की किल्लत में भी कोटा थर्मल ओल्ड इज गोल्ड साबित हो रहा है। कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन अब पूरी क्षमता से उत्पादन कर रहा है। यहां पर रोज करीब पांच रैक आ रही हैं। चीफ इंजीनियर वीके गोलानी ने बताया कि सभी छह यूनिट से उत्पादन लिया जा रहा है। यूनिट को 80 फीसदी क्षमता से चलाया जा रहा है, लेकिन अन्य यूनिट पूरी क्षमता से चल रही है।

छबड़ा की चार में से तीन यूनिट से हो रहा बिजली उत्पादन
छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन की चार यूनिट में से तीन यूनिटों से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। चीफ इंजीनियर सुदर्शन सचदेवा ने बताया कि छबड़ा थर्मल के दोनों प्लांट्स के पास 20 हजार मैट्रिक टन कोयला मौजूद है। यहां पहला प्लांट परिचालन एवं अनुरक्षा में 250 मेगावाट की चार यूनिट है। एक यूनिट को वार्षिक रखरखाव के कारण बंद कर रखा है। वहीं दूसरी सुपर क्रिटिकल यूनिट में 660-660 मेगावाट की दो यूनिट हैं। इनमें से केवल एक को ही 55 फीसदी क्षमता से संचालित किया जा रहा है। ऐसे में उससे केवल 370 मेगावाट के आसपास के उत्पादन लिया जा रहा है। यहां पर बिजली उत्पादन के लिए कोयले की तीन रैक औसतन पहुंच रही है।

लगातार हो रहा  बिजली उत्पादन
एनजीटी ने कोटा थर्मल की एक व दो नंबर की यूनिट को पुरानी होने का हवाला देते हुए बंद करने का आदेश जारी कर दिया था। इसके बाद में राज्य सरकार ने भी इसको बंद करने का निर्णय कर लिया था। इसके बाद में कर्मचारियों द्वारा इसका विरोध किया गया। आंदोलन को देखते हुए राज्य सरकार को इन दोनों यूनिटों को बंद करने का निर्णय वापस लेना पड़ गया था। इसके बाद से ही इन दोनों यूनिटों से लगातार बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। दो नंबर यूनिट तो लगातार 84 दिन तक बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड भी बना चुकी है।

कोटा थर्मल
- कुल उत्पादन क्षमता
1240 मेगावाट
- यूनिट की संख्या 7
- पहली व दूसरी यूनिट में पहली बार उत्पादन शुरू- 1983

यूनिट का नाम         क्षमता
- 1                   110
- 2                   110
 -3                   210
 -4                   210
 -5                   210
 -6                   195
 -7                   195
(यह सभी आंकड़े विद्युत वितरण निगम की वेबसाइट से लिए गए है।)

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