जाने राजकाज में क्या है खास

जाने राजकाज में क्या है खास

सूबे में इन दिनों एक भाईसाहब की चुप्पी रहस्य बनी हुई है। भाईसाहब भी छोटे-मोटे नहीं, बल्कि भगवा से ताल्लुक रखते हैं और गुजरे जमाने में किताब की आड़ में पिंकसिटी से दिल्ली तक अपना लोहा मनवा चुके हैं।

रहस्य भाईसाहब की चुप्पी का
सूबे में इन दिनों एक भाईसाहब की चुप्पी रहस्य बनी हुई है। भाईसाहब भी छोटे-मोटे नहीं, बल्कि भगवा से ताल्लुक रखते हैं और गुजरे जमाने में किताब की आड़ में पिंकसिटी से दिल्ली तक अपना लोहा मनवा चुके हैं। पपलाज माता के पक्के भक्त और मीणा हाईकोर्ट के जनक ने दिल्ली दरबार की जंग के बीच ऐलान किया था कि अगर उनके जिम्मे वाली एक भी सीट खिंसक गई, तो वे राज की कुर्सी त्याग देंगे। पीली लूगड़ी वाली के हमसफर डॉक्टर साहब ने कुर्सी तो नहीं छोड़ी बल्कि अपना मुंह जरूर बंद कर लिया। उनका अचानक मुंह बंद करना भी उन्हीं की पार्टी के भाई लोगों को भी रास नहीं आ रहा। हाथ वाले भाई लोगों के तो यह समझ के बाहर की बात है। राज का काज करने वाले में चर्चा है कि खेती बाड़ी महकमा संभाल रहे भाईसाहब ने कुर्सी छोड़ने का जो पैंतरा फेंका है, उसके पीछे का मकसद कुछ और ही है। अब इस पैंतरे को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।

नजरें कुर्सी की ओर
सूबे में जब से बड़े ओहदों पर नौकरी देने वाले कमीशन में चेयरमैन की कुर्सी खाली होने की चर्चाएं शुरू हुई है, तब से इस पर कइयों की नजर टिकी है। कुछेक साहब लोग तो इसकी तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। उनकी रातों की नींद और दिन का चैन तक गायब है। वे बंगला नंबर 51 के साथ भारती भवन का भी देवरा ढोक रहे हैं। और तो और अपने ईष्ट देव के सवामणी तक बोल चुके हैं। देवी-देवताओं को पूजने के साथ ही ख्वाजा की नगरी में कदम रखते ही दरगाह में चादर चढ़ाने और पुष्कर सरोवर में डुबकी लगाने की भी सोच रखी है। राज का काज करने वालों में इस कुर्सी के लिए कइयों का नाम चर्चा में भी है। आईएएस लॉबी में सबसे ज्यादा भारी नाम जल्द ही रिटायर होने वाले साहब का है, जो सूबे में शहरों का विकास भी कर चुके हैं।

जश्न के बीच चिंता की लकीरें
भगवा वाले भाई लोग जश्न की तैयारियों में जुटे हैं, मगर कइयों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। उसका कारण भी खुली किताब की तरह है, जिसके पन्नों को हर कोई पढ़ रहा है। यह तो साफ है कि दिल्ली दरबार की चुनावी जंग के बाद सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने वालों का वजन कई किलो तक घटेगा। सो एबीवीपी ब्राण्ड वाले भाई लोगों की बांछे भी खिली हुई है। मई-जून की तपती दोपहर में होने वाले रिशफलिंग की खबरों के बाद उन रत्नों की नींद उड़ी हुई, जो जिनकी सीटें सांगानेर वाले भाईसाहब के एसीआर के फेर में फंसी हैं।  

अब सिर्फ काम
अटारी वाले भाई साहब के दिल्ली से लौटने के बाद राज में काम करने की बढ़ती गति को देख काज करने वाले भी चकित है। गुजरे बुध को पिंकसिटी में कदम रखते ही भाई साहब ने बड़े साहब को मैसेज दे दिया कि अब तक जो हुआ, उसे भूलों और पूरी टीम के साथ काम पर लग जाओ। पहले तो बड़े साहब के समझ में नहीं आया, मगर जब गुरु को पानी वाले प्रजेंटेशन के दौरान भाई साहब ने अपने ज्ञान का भंडार खोला, तो राज का काज करने वालों की सारी इंद्रियां खुल गई। सचिवालय में चर्चा है कि अब गुजरात नहीं बल्कि मरु प्रदेश को मॉडल के रूप में पेश करने का सपना पूरा करना ही सारी समस्याओं का आखरी पड़ाव है।

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