सीवी गार्डन में मगरमच्छ की दहशत, बच्चों पर हमले का खतरा

मॉर्निंग वॉक पर आने वाले राहगीरों व पर्यटकों पर कर सकता है हमला

सीवी गार्डन में मगरमच्छ की दहशत, बच्चों पर हमले का खतरा

तालाब किनारे गणेश मंदिर के पास हो रही साइटिंग।

कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन में एक महीने से शहरवासी मगरमच्छ की दहशत में हैं। मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर आने वाले राहगीर व पर्यटकों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना हुआ है। वन विभाग को शिकायत करने के बावजूद मगरमच्छ का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। जबकि, गार्डन में सुबह-शाम बड़ी संख्या में शहरवासी घूमने आते हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक रहती है। हैरानी की बात यह है, तालाब में बोटिंग भी करवाई जाती है। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। 

गणेश मंदिर के पास रहता है मूवमेंट
डा. सुधीर उपाध्याय ने  बताया कि सीवी गार्डन में स्थित तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेज रेस्क्यू करने का आग्रह किया। इसके बावजूद मगरमच्छ  का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। 

तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन
राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। 

एक माह से पानी में नहीं उतरी बतख
डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि गार्डन में सुबह व शाम सैर करने बड़ी संख्या में शहरवासी आते हैं। वहीं, पार्क में बच्चे खेलते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग के डीएफओ से भी कर चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। हालात यह हैं, पिछले एक महीने से 40 बतख पानी में नहीं उतरी। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।

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इनका कहना है
मामला संज्ञान में आया है। मगरमच्छ सुबह व शाम के समय पानी से बाहर निकलते हैं। टीम को मौके पर भेज मगरमच्छ का रेस्क्यू करवाएंगे। 
- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा 

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