ऑस्ट्रेलिया: भारत से होंगे रिश्ते मजबूत

ऑस्ट्रेलिया और भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर कोई बदलाव नहीं होगा

 ऑस्ट्रेलिया: भारत से होंगे रिश्ते मजबूत

अल्बनीज ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के साथ अपने चार सदस्यीय मंत्रिमंडल की घोषणा भी कर दी है। विदेश मंत्री के बतौर पेनी वांग को चुना गया जो उनके साथ क्वाड की बैठक में भाग लेने जापान जा रहे हैं। रोजगार एवं उप प्रधानमंत्री के रूप में रिचर्ड मार्लेस, वित्त मंत्री एवं महिला मामलात केटी गेलागर को चुना गया है।

ऑस्ट्रेलिया में संपन्न हुए चुनावों में सत्ता पलट गई है। लेबर पार्टी के नेता एंथनी अल्बनीज ने, सत्ता पर पिछले एक दशक से काबिज कंजरवेटिव गठबंधन के नेता मौजूदा प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन को शिकस्त दे दी है। बदले नए समीकरणों के बावजूद ऑस्ट्रेलिया और भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों पर कोई बदलाव नहीं होगा। कारण-अल्बनीज सदैव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की पैरवी करते आए हैं। उम्मीद ही नहीं, यह विश्वास है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध नए आयाम स्थापित करेंगे। इस क्रम में आगामी मंगलवार को जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित होने वाले क्वाड सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होने जा रही है। जो संबंधों को और गतिशील बनाने में सहायक होगी। खुद अल्बनीज ने मोदी से मिलने की उत्सुकता जाहिर की है।

विदेश मंत्री के बतौर पेनी वांग को चुना गया जो उनके साथ क्वाड की बैठक में भाग लेने जापान जा रहे हैं
अल्बनीज ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के साथ अपने चार सदस्यीय मंत्रिमंडल की घोषणा भी कर दी है। विदेश मंत्री के बतौर पेनी वांग को चुना गया जो उनके साथ क्वाड की बैठक में भाग लेने जापान जा रहे हैं। रोजगार एवं उप प्रधानमंत्री के रूप में रिचर्ड मार्लेस, वित्त मंत्री एवं महिला मामलात केटी गेलागर को चुना गया है।यहां बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के समय ही भारत-ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को मजबूती देने की बुनियाद खड़ी की जा चुकी है। उनके योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता है। खैर, अल्बनीज, प्रधानमंत्री बनने से पूर्व वर्ष 1991 और 2018 में बाहैसियत संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए भारत की दो बार यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान वे दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता जता चुके थे। ऑस्ट्रेलिया में हर तीसरे साल संसद के निचले सदन के चुनाव होते हैं जिसमें नई सरकार का गठन होता है। इसमें 151 सीटों का चुनाव होता है। ऊपरी सदन के चुनाव हर छह साल में होते हैं। वर्ष 2019 के पिछले चुनावों में भी मॉरिसन पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाए थे। उन्होंने कुछ छोटी पार्टियों के साथ मिलकर अपनी सरकार गठित की थी। इस बार के चुनावी मुकाबले में लेबर पार्टी के अल्बनीज सहित कुल छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। लेकिन मुख्य मुकाबला मॉरिसन और अल्बनीज के बीच ही था।अपनी हार के बाद मॉरिसन ने अपनी लिबरल पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली, प्रधानमंत्री पद भी त्याग दिया। इसके साथ ही अब वहां विपक्षी दल के नेता का चुनाव भी होना है। जल्दी से दिए गए इस्तीफे की मुख्य वजह उन्होंने चौबीस मई को जापान में होने जा रही क्वाड की महत्वपूर्ण बैठक में नए नेतृत्व को शामिल होने, उसकी भूमिका को समझने का अवसर देने की बात कही। वहीं जनता का आभार जताया कि उसने उन पर विश्वास रखते हुए देश सेवा के लिए दस वर्षों का मौका दिया। नए प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का जन्म 2 मार्च 1963 में सिडनी के डॉर्लिंग हर्स्ट में हुआ था। माता ऑस्ट्रेलियाई मूल आयरिश मार्याना थेरेस थी और पिता इटली मूल के कार्लो अल्बनीज थे। उनके जन्म के साथ ही माता-पिता ने तलाक ले लिया। माता ने ही उनका लालन-पालन किया। सिडनी विश्वविद्यालय के सेंट मेरीज कैथेड्रल कॉलेज में अर्थशास्त्र की शिक्षा ग्रहण की। मां के प्रति गर्व जाहिर करते हुए वे काफी भावुक भी हो जाते हैं।

छात्र राजनीति में सक्रिय रहे अल्बनीज
अध्ययन के दौरान ही वे छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। विश्वविद्यालय में वह स्टूडेंट रिप्रजेंटेटिव काउंसिल के लिए चुने गए थे। वे कट्टर वामपंथी विचारधारा रखते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ वर्षों तक कॉमनवेल्थ बैंक में काम किया। बाद में मिनिस्ट्री फॉर लोकल गवर्नमेंट एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज में रिसर्च आॅफिसर के तौर पर काम किया। अल्बनीज 1996 से ही ऑस्ट्रेलिया की संसद के सदस्य हैं। वे वर्ष 2013 में देश के उपप्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वर्ष 2007 और 2013 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्रियों केविन रूड और जूलिया गिलार्ड के कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। संचार, शहरी संरचना, शहर और कला मंत्रालयों का कार्यभार भी संभाल चुके हैं। चुनाव में मुख्य रूप से चीन के खतरे, मुद्रा स्फीति के बीच अधिक वित्तीय सहायता और एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा देने का वादा जैसे प्रमुख मुद्दे हावी रहे। लेबर पार्टी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में तियालीस फीसदी की कमी लाने की पक्षधर है। अपनी जीत पर अल्बनीज ने ऑस्टेलियाई जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी जीत देश में बदलाव के लिए है। हम लोगों को एक साथ लाने का काम करेंगे। हमारी सरकार साहसी, मेहनती और लोगों की देखभाल करने वाली होगी। इसमें कोई दोराय नहीं कि मॉरिसन सरकार की हार के प्रमुख कारक कोराना वायरस के खराब प्रबंधन, धीमी टीका-खरीद प्रक्रिया, जीवन यापन की लागत बढ़ने के प्रति जन आक्रोश प्रमुख रहा। चुनाव अभियान दौरान मॉरिसन ने अपने कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने और काफी हद तक बेरोजगारी दूरने का दावा किया था। वहीं, उन्होंने चीन के खिलाफ अपनी सख्त छवि बनाने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी थी।  

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वहीं जवाब में अल्बनीज ने भी जनता के बीच रहकर चीन के प्रति अपनी सख्त नीति,  एलजीबीटी समर्थक, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुधार जैसे वादे किए थे। अब यह सब वादे पूरे करने के लिए उन्हें कई चुनौतियों से रूबरू होना पड़ेगा। अब आने वाला समय ही बताएगा कि वे इन कड़ी से चुनौतियों से उबारते हुए देश को विश्व-पटल पर चमकाते हैं।

         महेश चंद्र शर्मा
(ये लेखक के अपने विचार हैं)




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