अशोक गहलोत की सियासी गुगली से भाजपा बोल्ड

सुभाष चन्द्रा को हार का सामना करना पड़ा

अशोक गहलोत की सियासी गुगली से भाजपा बोल्ड

प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बिछाई सियासी पिच पर कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार जीत गए। गहलोत की सियासी गुगली से भाजपा बोल्ड हो गई।

जयपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बिछाई सियासी पिच पर कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार जीत गए। गहलोत की सियासी गुगली से भाजपा बोल्ड हो गई। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चन्द्रा को हार का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पहले उदयपुर और गुरुवार को दिल्ली रोड स्थित होटल लीला पैलेस में कांग्रेस-समर्थित विधायकों को ठहराया। अगले दिन को कांग्रेस और समर्थित विधायक होटल लीला से मतदान के लिए तीन बसों में विधानसभा के लिए रवाना हुए। कांग्रेस विधायकों की पहली बस के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी होटल लीला से रवाना हुए। इस दौरान गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार का दावा किया।

कांग्रेस के पक्ष में 127 विधायक
इस चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में 127 विधायकों के वोट पड़े एक वोट खारिज हो गया। इस तरह तीनों उम्मीदवारों को 126 वोट मिले। रणदीप सुरजेवाला को 43, मुकुल वासनिक को 43 और प्रमोद तिवारी को 41 वोट मिले। जीत के लिए 41 वोट चाहिए थे। कांग्रेस का एक वोट खारिज होने के बाद भी कांग्रेस के दो उम्मीदवारों को तीन वोट ज्यादा मिले। कांग्रेस के 108, आरएलडी के सुभाष गर्ग, सीपीएम और बीटीपी के 2-2 विधायक और 13 निर्दलियों को मिलाकर कुल 126 विधायकों का समर्थन था।

भाजपा के पक्ष में 73 एमएलए
इसके विपरीत भाजपा के पक्ष में 73 विधायक रहे। उसके पास आरएलपी को मिलाकर 74 वोट थे, लेकिन मत 73 ही मिले। भाजपा के तिवाड़ी को 43 वोट मिले, जबकि उसके समर्थक निर्दलीय सुभाष चंद्रा को 30 वोट मिले। चंद्रा को जीतने के लिए 11 विधायकों का वोट और चाहिए था।

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व्हिप का उल्लघंन कर डाले वोट
कांग्रेस विधायकों के साथ बसपा से कांग्रेस में शामिल छह विधायक राजेन्द्र गुढा, संदीप यादव, वाजिब अली, जोगिन्दर सिंह अवाना, लाखन मीणा और दीपचंद खैरिया और बीटीपी के दो विधायक राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर भी विधानसभा पहुंचे थे। बसपा से कांग्रेस शामिल विधायकों के लिए बसपा पार्टी ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान नहीं करने के लिए व्हिप जारी किया था, लेकिन इन विधायकों ने व्हिप का उल्लघंन कर वोट डाला। विधायकों ने दावा किया कि अब वे कांग्रेस के सदस्य है। इसलिए व्हिप उन पर लागू नहीं होता। वहीं, बीटीपी प्रदेशाध्यक्ष बेलाराम घोगरा के जारी व्हिप का उल्लघंन कर विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया।

तिवाड़ी समर्थक पहुंचे विधानसभा
भाजपा उम्मीदवार घनश्याम तिवाड़ी के सैकड़ों समर्थक विधानसभा के बाहर पहुंचे गए और तिवाड़ी के जीत दर्ज करते ही समर्थन में नारे लगाए।  कांग्रेस के तीनों प्रत्याशी बाहरी होने के कारण उनके समर्थक विधानसभा नहीं पहुंचे थे। इन प्रत्याशियों के समर्थन में कांग्रेस और समर्थित विधायक ही मौजूद रहे।

आरएलपी ने दिया निर्दलीय सुभाष चन्द्रा को वोट
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि उनकी पार्टी के तीनों विधायकों ने निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चन्द्रा को वोट दिया है। मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी दूसरों पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस सरकार ने सत्ता के बल पर जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को डराया। उन्होंने कहा आरएलपी ने अपना स्टैंड पहले ही साफ कर लिया था और निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा के समर्थन में तीनों विधायकों ने मतदान किया।

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सीपीएम का वोट कांग्रेस को
सीपीएम के दोनों विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को वोट दिया है। माकपा के सदन में बलवान पूनिया और गिरधारी लाल विधायक हैं।

बसपा से कांग्रेस में शामिल विधायकों से पहले डलवाए वोट
बसपा से कांग्रेस में शामिल छह विधायक राजेन्द्र गुढ़ा, संदीप यादव, वाजिब अली, लाखन मीणा, जोगिन्दर अवाना और दीपचंद खैरिया से वोटिंग की शुरूआत में सीएम गहलोत के बाद ही वोट डलवा लिए। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले कांग्रेस ने रणनीति के तहत ऐसा किया।

कांग्रेस के तिवारी संकट में आ जाते
अगर भाजपा की शोभारानी कुशवाह क्रॉस वोटिंग नहीं करती, तो कांग्रेस के तीसरे उम्मीदवार प्रमोद कुमार तिवारी भी संकट में पड़ जाते। तिवारी को जीतने के लिए 41 मतों की जरूरत थी और उन्हें इतने ही वोट मिले। शोभारानी उनके पक्ष में मतदान नहीं करती, तो उनको 40 मत ही मिलते, जो जीत के आंकड़े से कम है। शोभारानी के इस कदम के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और उसके प्रत्याशी घनश्याम तिवाड़ी के पक्ष में दो और मत दिलवाए, जो सुभाष चन्द्रा के पक्ष में जाने वाले थे। इस तरह तिवाड़ी को 43 मत मिले।

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रणदीप सुरजेवाला : हरियाणा में सबसे कम उम्र के मंत्री रहे
रणदीप सिंह सुरजेवाला के पिता का नाम शमशेर सिंह सुरजेवाला और माता का नाम विद्या है। उस समय इनके पिता हरियाणा के कृषि व सहकारिता मंत्री थे। इनकी तीन बड़ी बहनें हैं, मधु दलाल, पूनम चौधरी और नीरू। वह हरियाणा के कैथल से विधायक रह चुके हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा नीत कांग्रेस सरकार में 2009 से 2014 तक वे मंत्रीमंडल के सदस्य रह चुके हैं। वे हरियाणा के सबसे कम आयु के मंत्री रहे हैं। उन्हें 2005 में यातायात व संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया था। बाद में उनके पास जलापूर्ति व सेनिटेशन, संसदीय कार्य, इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी विज्ञान व प्रौद्योगिकी और जन निर्माण मंत्रालय भी रहे। 2014 के चुनावों में कांग्रेस प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही, लेकिन रणदीप अपनी सीट से पुन: निर्वाचित होने में सफल रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नरवाना के आदर्श बाल मंदिर व आर्य उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुई। 1981-85 में वाणिज्य में स्नातक डीएवी कॉलेज और 1985-88 में पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से विधि में स्नातक किया। यहीं से ही इन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नोतकोत्तर भी किया। इनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला हरियाणा के एक प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ हैं, जो 1967, 1977, 1982,1991 और 2005 में हरियाणा विधानसभा और 1993 में संसद सदस्य रहे।

घनश्याम तिवाड़ी : घर वापसी के बाद पार्टी का तोहफा
घनश्याम तिवाड़ी का एक ही निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार चुनाव जीते। वह राजस्थान के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने भाजपा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राजस्थान में भाजपा की सरकार 2003 से 2008 में वे शिक्षा मंत्री रहे। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से नाराजगी के चलते उन्होंने पांच साल पहले भाजपा छोड़ कर अपनी खुद की पार्टी भारत वाहिनी बनाई थी और उसकी के बैनर तले 2018 का चुनाव सांगानेर से लड़ा, लेकिन चुनाव हार गए थे। बाद में कांग्रेस की सदस्यता ले ली थी। कुछ दिनों में उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया था। उनकी धर्मपत्नी का नाम पुष्पा तिवाड़ी हैं। एलएलबी तक शिक्षा प्राप्त घनश्याम तिवाड़ी की कुल संपत्ति 42 लाख 16 हजार 933 रुपए है, जबकि पुष्पा तिवाड़ी के पास एक करोड़ 22 लाख 24 हजार 66 रुपए की चल संपत्ति हैं। अचल सम्पत्ति में जहां घनश्याम तिवाड़ी के नाम से एक करोड़ 31 लाख की प्रॉपर्टी है, जबकि पुष्पा करीब 2 करोड़ 61 लाख 10 हजार सम्पत्ति की मालकिन है।

मुकुल वासनिक : आलाकमान के करीबी पहुंचे संसद
मुकुल वासनिक के पिता बालकृष्ण रामचंद्र वासनिक कांग्रेस के नेता थे और तीन बार संसद सदस्य रहे थे। मुकुल वासनिक का जन्म 27 सितम्बर 1959 में हुआ था।  मुकुल वासनिक वर्ष 1984 से 1989 तक महाराष्ट्र के बुलढाणा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सदस्य रहे। तब सबसे कम उम्र के लोकसभा सदस्य बनने का गौरव उन्हें मिला था। वे वर्ष 1991 में भी दसवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए थे। सांसद निर्वाचित हुए, लेकिन 1999 में हार गए। वे 2009 में रामटेक लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए,  लेकिन वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में हार गए थे।

प्रमोद तिवारी : रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड बनाए
प्रमोद तिवारी कांग्रेस के नेता हैं। वह उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला स्थित रामपुर खास विधासभा क्षेत्र से नौ बार विधायक चुने गए। यहां से लगातार सातवीं विजय पर उनका नाम गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। वे वर्ष 2013 में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। वे पहली बार 1980 में उत्तरप्रदेश विधानसभा सदस्य चुने गए थे। वर्ष 1984 से 1989 तक वे उत्तरप्रदेश में राज्यमंत्री रहे। लंगे समय तक वे उत्तरप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रहे।

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