जाने राजकाज में क्या है खास

साजिश या कुछ और

जाने राजकाज में क्या है खास

हर ब्यूरोक्रेट्स की नजर सिर्फ जमीन पर है। अब तो उनका मन भी दूसरी फाइलें निकालने में नहीं लग रहा। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि कहीं यह राज को बदनाम करने की साजिश तो नहीं है।

साजिश या कुछ और 

सूबे में इन दिनों जमीन से लगाव को लेकर कई किस्से चर्चा में हैं। हो भी क्यों ना, मामला जमीनों से जुड़ा जो रह गया। पब्लिक रिप्रजेंटेटिव्स का जमीन से जुडेÞ रहना तो समझ में आता है, लेकिन ब्यूरोक्रेट्स का लगाव समझ से बाहर है। सूबे की राजधानी में तैनात कुछ ब्यूरोक्रेट्स इस मामले में दो कदम आगे हैं। हर ब्यूरोक्रेट्स की नजर सिर्फ जमीन पर है। अब तो उनका मन भी दूसरी फाइलें निकालने में नहीं लग रहा। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि कहीं यह राज को बदनाम करने की साजिश तो नहीं है। तभी तो हर विवादित मामले में टांग अड़ाने से पहले सीएमआर और सीएमओ का नाम लेकर एयर स्पीड से अपने निकट के लोगों को जमीनों से आॅब्लाइज करने में न आगा सोच रहे हैं और न ही पीछा।  

बार बार की झूठ

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कहावत है कि बार बार बोली गई झूठ भी सच हो जाती है। कुछ इसी तरह की सुगबुगाहट इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के दफ्तर में शुरू हो गई। चर्चा है कि पीसीसी में सालों से आने वाले बुजुर्गवार भाईसाहब के मुंह से बार बार निकल रहा है कि 137 साल पुरानी पार्टी कमजोर हो रही है। पहले तो भाईसाहब की जुबान पर विश्वास नहीं था, लेकिन बार बार निकल रही यह झूठ कहीं सच साबित नहीं हो जाए।

चर्चा क्रॉस वोटिंग की

सूबे में दो साल बाद फिर से क्रॉस वोटिंग की चर्चा होने लगी है। इस बार महामहिम के चुनाव को लेकर यह चर्चा चली है। चर्चा भी दोनों तरफ है। अपर हाउस के चुनावों में क्रॉस वोटिंग का आनंद ले चुके हाथ वालों में इसको लेकर चिंता कुछ ज्यादा ही है। पीसीसी लेकर दिल्ली दरबार तक चिंतन-मंथन हो रहा है। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि जब एजेंट को दिखाने की शर्त के बीच दो ने कमाल कर दिखाया था, तो अब तो मामला गोपनीय था। तभी तो हाथ वालों के 126 के दावे के बीच भगवा वालों की गिनती मेंं दो का आंकड़ा बढ़ गया है।

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अब अफसरों से फीडबैक

भारती भवन में किए जा रहे नए प्रयोग से राज के साथ काज करने वालों की भी नींद उड़ी हुई है। मंगल की शाम जो कुछ हुआ, उससे सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में भी सुगबुगाहट है। चर्चा है कि सूबे में राज लाने के लिए भारती भवन वालों ने एक और प्रयोग करने की सोची है। इसके तहत संघ की पृष्ठभूमि वाले अफसरों से फीडबैक लेकर रणनीति को अंजाम दिया जाएगा। भारती भवन से जुडेÞ भाईसाहब ने मंगल की शाम सात बजे से शुभ मुहूर्त में बैठक कर चिंतन भी शुरू कर दिया। वैसे भी सूबे वाले भाईसाहब की आड़ में भारती भवन वालों ने संकेत दे दिए हैं कि अब जो कुछ तय होगा, वह भाजपा और संगठन नहीं, बल्कि संघ से होगा।

एक जुमला यह भी

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हाथी की सवारी कर हाथ से हाथ मिलाने वालों की मन की कई मुरादें तो पूरी गई, परन्तु दलित का तमगा उनका पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं लेता। किसी न किसी बहाने मुंह फाड़े खड़ा रहता है। विधानसभा तक में अब भी उन्हें बसपा से आए सदस्यों के संबोधन का सामना करना पड़ता है। और तो और राज ने भी उनके इस तमगे को बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब देखो ना उनको पिछड़े जिलों का जिम्मा सौंप कर उनकी यादों को ताजा कर दिया। सबसे ज्यादा दलित तो उन्हें पुराने हाथ वाले मानते हैं, चूंकि अभी उन्हें हाथ को समझने में वक्त जो लगेगा।

एल एल शर्मा

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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