जाने राजकाज में क्या है खास

लगाने पड़े पसर्नल बॉडी गार्ड

जाने राजकाज में क्या है खास

नेतागिरी में कब किससे पंगा हो जाए, कुछ भी नहीं कहा जा सकता। अगर पंगा अपने ही सजातीय बंधु से हो, तो मामला और भी गंभीर हो जाता है। अब देखो ना, पूर्वी इलाके से ताल्लुकात रखने वाले दो नेताओं के बीच में कुछ गड़बड़ हो गई।

चर्चा में बौखलाहट
सूबे में इन दिनों बौखलाहट को लेकर चर्चा जोरों पर है। हो भी क्यों ना, बौखलाहट भी दोनों तरफ के लीडर्स में है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में भगवा वालों के दफ्तर में सिर्फ कानाफूसी है, लेकिन इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर इसकी चर्चा कुछ ज्यादा ही है। चर्चा है कि पिछले कुछ दिनों से राज के रत्नों की बौखलाहट ने तो हदें पार कर दी। ठिकाने पर सालों से आने वाले वर्कर्स की मानें, तो इसमें लीडर्स का कोई कसूर नहीं है। अब बेचारों को अपनी जमीन खिकती दिख रही है, तो बौखलाहट तो होना नेचुरल है। 

लगाने पड़े पसर्नल बॉडी गार्ड
नेतागिरी में कब किससे पंगा हो जाए, कुछ भी नहीं कहा जा सकता। अगर पंगा अपने ही सजातीय बंधु से हो, तो मामला और भी गंभीर हो जाता है। अब देखो ना, पूर्वी इलाके से ताल्लुकात रखने वाले दो नेताओं के बीच में कुछ गड़बड़ हो गई। इनमें एक नेता राज का रत्न है, तो दूसरा लीडर दिल्ली वाले छोटा भाई-मोटा भाई का लाल है और दोनों ही जाति बंधु हैं। इनमें से बड़े नेता ने दूसरे नेता को देख लेने की धमकी दे दी, तो नेताजी के चेहरे से हवाइयां उड़ गई। अपनी सलामती को लेकर चिन्ता में डूबे नेताजी ने पर्सनल बॉडी गार्ड रखने में ही अपनी भलाई समझी। शहर में नेताजी को खतरा कुछ कम है, सो पसर्नल बॉडी गार्डों को सिर्फ घाट की गूणी वाली सुरंग में घुसाने और वहीं से इलाके में साथ रहने का जिम्मा सौंपा है। 

सूरज से मचा बवाल
बवाल तो किसी भी बात को लेकर मच सकता है, लेकिन सूबे में भगवा वाले भाई लोगों में सूरज को लेकर जो सियासी बवाल मचा है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा। फिलहाल उसके थमने की गुंजाइश भी नहीं दिख रही। चूंकि गुजरे जमाने में ब्यूरोक्रेट रह चुके बीकानेर वाले भाई साहब ने जानबूझकर ऐसा किया है, जिससे बवाल मचना तय था। 36 कौमों को साथ लेकर चलने वाली मैडम से 36 का आंकड़ा के फेर में मेष राशि वाले भाईसाहब ने भी मिर्ची लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब देखो ना, बिना सब्जेक्ट के ही अर्जुन जी ने सूरज को लेकर अपना मुंह खोला, कई भाई लोगों की आंखें लाल होना लाजमी था। अब मैडम के धुरविरोधी भाईसाहबों को कौन समझाए कि यह दुनिया गोल है, इसमें सूरज डूबता है, तो उगता भी है।

सूची का इंतजार
खाकी वाले कई साहब लोग कुछ दिनों से ठाले बैठे हैं। उनका काम में जी नहीं लग रहा। उनकी टेबिलों पर मुकदमों की फाइलों का इतना ढेर लग गया कि कुछेक तो सामने वालों को देख तक नहीं पाते।  कई महत्वपूर्ण फाइलें भी उसी ढेर में धूल चाट रही हैं। अपने मातहत अफसरों तक की सैल्यूट का जवाब भी ढंग से नहीं देते। खाकी वाले साहब लोगों को केवल सूची का इंतजार है, सो इन दिनों उनके पास इधर-उधर सूंघने के साथ जुगाड़ बिठाने के सिवाय कोई काम नहीं है। एक साहब ने तो जयपुर कमिश्नर की कुर्सी के लिए देश की राजधानी में के दरबार तक पगफेरा करने में भी कोई देरी नहीं की।

एक जुमला यह भी
जब से पड़ोसी सूबे में हाथ वाले विधायकों ने अपनी ही टीम को बाय-बाय किया है, तब से मरु प्रदेश में भी अफवाहों का माहौल जोरों पर है। अफवाह फैलाने वाले भी और कोई नहीं, बल्कि भगवा वाले भाई लोग है। लेकिन इंदिरा गांधी भवन में हाथ वाले के ठिकाने पर आने वाले भी हां में हां मिलाए, तो अफवाहों में थोड़ा दम नजर आता है। चर्चा है कि मरु प्रदेश में भी हाथ वाले छह भाई लोग कमल के फूल की सुगंध सूंघने को आतुर हैं। मध्यप्रदेश वाले नेताजी की मध्यस्थता में भोपाल और दिल्ली में मीटिंग तक होने की बातें भी बाहर आने लगी हैं। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि हाड़ौती के दो, पिंकसिटी और शेखावाटी के एक-एक रत्न को तो दिसम्बर का बेसब्री से इंतजार है।

-एल. एल शर्मा  

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