ये लक्षण दिखते ही समझ जाएं डैमेज हो गए हैं आपके फेफड़े

समय रहते संकेतों को पहचाने

ये लक्षण दिखते ही समझ जाएं डैमेज हो गए हैं आपके फेफड़े

सीओपीडी के लक्षण आमतौर पर तब ही दिखते हैं जब फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है,अगर कोई लगातार स्मोकिंग करता रहता है तो समय के साथ यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ने लगती है।

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज को सीओपीडी के नाम से भी जाना जाता है, इस समस्या के दौरान फेफड़ों के वायुमार्ग सिकुड़ जाते हैं, जिस वजह से सांस लेने में परेशानी आती है। ऐसा होने पर शरीर के अंदर से कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती। लंबे समय से जारी खांसी, बलगम का बहुत अधिक मात्रा में बननाए सांस लेने में दिक्कत, थकान, बिना किसी कारण के वजन कम होना, ये सभी आम लक्षण हैं, समय पर पता लगा लिया जाए तो इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस बीमारी के विकसित होने की संभावना अधिक होती है। 

लक्षणों को ना करें इग्नोर  
सीओपीडी के लक्षण आमतौर पर तब ही दिखते हैं जब फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है,अगर कोई लगातार स्मोकिंग करता रहता है तो समय के साथ यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ने लगती है,समस्या से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि आप समय रहते इसके संकेतों को पहचाने ताकि इस बीमारी का इलाज किया जा सके। लंबे समय से खांसी या कफ का होना ,सीओपीडी की समस्या ऐसे में व्यक्ति को लगातार पूरे दिन खांसी की समस्या का सामना करना पड़ता है, अगर आपको 4 से 8 हफ्तों से ज्यादा कफ की समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो यह सीओपीडी का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

सीओपीडी का दूसरा मुख्य लक्षण बहुत अधिक बलगम का बनना है,अगर आपके बलगम का रंग पीला या हरा नजर आता है तो यह किसी इंफेक्शन की ओर इशारा करता है। सीओपीडी का तीसरा मुख्य लक्षण सांस लेने में दिक्कत का होना है,काफी देर तक चलने के बाद या चढ़ाई चढ़ने के बाद अगर आपको पूरे दिन थकावट महसूस होती है तो यह इस ओर इशारा करता है कि आपके फेफड़े कमजोर हो रहे हैं।

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सीओपीडी का चौथा मुख्य कारण बिना किसी वजह के वजन का लगातार कम होना है,अगर आपका भी वजन बिना किसी कारण के लगातार कम होता जा रहा है तो जरूरी है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें। सीओपीडी का खतरा उन लोगों में सबसे ज्यादा पाया जाता है जो सिगरेट या तंबाकू क सेवन ज्यादा मात्रा में करते हैं, इसका एक और मुख्य कारण प्रदूषण, धुएं के संपर्क में ज्यादा रहना या  केमिकल के संपर्क में रहना भी हो सकता है। 

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