ऊर्जा जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती

भारत ने वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को स्थापित करने का लक्ष्य रखा है

ऊर्जा जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती

हमारे आधुनिक विकास ने प्रकृति व पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचाई है। इसलिए अब सूर्य के प्रकाश के साथ जुड़कर ही हम इस बिगड़े हुए प्राकृतिक संतुलन को सुधार सकते हैं। सूर्य कभी अस्त नहीं होता, उसकी रोशनी दुनिया के किसी न किसी कोने में हर समय पहुंचती रहती है।

विश्वभर में ऊर्जा को लेकर संकट गहरा रहा है। भारत की बढ़ती जनसंख्या की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत  की लगभग 80-90 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें आयात से पूरी होती हैं, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में भारी व्यय होता है। भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 8 लाख 99 हजार 312 करोड़ रुपए और 2020-21 में 4 लाख 59 हजार 779 करोड़ रुपए का तेल आयात किया। विकासशील अर्थव्यवस्था वाले भारत के औद्योगिक विकास और कृषि कार्यों के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। इसलिए अब बिजली की नियमित आपूर्ति के लिए भारत को न्यूनतम लागत के साथ विद्युत उत्पादन में आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है, जिससे औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
 
पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में सौर ऊर्जा एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में मौजूद है। भारत ने वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। साल 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने का प्रयत्न है, जिसमें खासतौर पर सौर ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करते हुए वर्ष 2022 के अंत तक एक सौ गीगावॉट सौर ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य है। 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और साथ ही दुनिया के दूसरे देशों के साथ सहयोग भी कर रहा है।

हमारे आधुनिक विकास ने प्रकृति व पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचाई है। इसलिए अब सूर्य के प्रकाश के साथ जुड़कर ही हम इस बिगड़े हुए प्राकृतिक संतुलन को सुधार सकते हैं। सूर्य कभी अस्त नहीं होता, उसकी रोशनी दुनिया के किसी न किसी कोने में हर समय पहुंचती रहती है। विश्व के कई ऐसे देश हैं, जहां सूर्य का प्रकाश भरपूर मात्रा में पहुंचता है, लेकिन प्रौद्योगिकी और संसाधनों की कमी के कारण वहां सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं हो पा रहा। उन्नत तकनीक की उपलब्धता, आर्थिक संसाधन, कीमतों में कमी, स्टोरेज टेक्नोलॉजी का विकासए बड़े पैमाने पर निर्माण और इनोवेशन जैसे सभी जरूरी संसाधन सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बहुत आवश्यक हैं। पूरे विश्व में सौर ऊर्जा की आपूर्ति करने वाला एक ट्रांस नेशनल बिजली ग्रिड विकसित करने के उद्देश्य को लेकर दुनियाभर के सभी देशों को एक साथ लाने का प्रयास श्वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड प्रोजेक्ट के माध्यम से किया जा रहा है। जिसकी अवधारणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में दी थी। भारत की इस महत्वकांक्षी सौर ऊर्जा परियोजना का उद्देश्य सामान्य संसाधनों का उपयोग करके बुनियादी ढांचे और सौर ऊर्जा के लाभों को वैश्विक सहयोग के माध्यम से साझा करना है। ये अंतरराष्टÑीय ग्रिड विश्व भर में उत्पन्न सौर ऊर्जा को विभिन्न लोड केंद्रों तक पहुंचाएगी। नवीकरणीय ऊर्जा खासकर सौर ऊर्जा के लिए विश्व के अन्य देशों के साथ सहयोग बहुत जरूरी है और इसी के लिए अंतरराष्टÑीय सौर गठबंधन की स्थापना की गई है। अंतरराष्टÑीय सौर गठबंधन एक संधि.आधारित अंतरराष्टÑीय अंतर सरकारी संगठन है, जिसका प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों को सस्ती दरों पर सोलर टेक्नोलॉजी का प्रबंध कराना व इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना है। अब तक 110 देश आईएस के फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और 90 देशों ने फ्रे मवर्क समझौते पर हस्ताक्षर कर पुष्टि की है। भारत सरकार, ब्रिटेन और अंतरराष्टÑीय सौर गठबंधन ने विश्व बैंक के सहयोग से वर्ष 2021 में अंतरराष्टÑीय जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप-26 के दौरान वैश्विक ग्रीन ग्रिड इनीशिएटिव वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड का शुभारंभ किया था। इस परियोजना में सदस्य देश प्रौद्योगिकी, वित्त और कौशल के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों में निवेश आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सभी देशों के सहयोग से इस परियोजना की लागत में कमी आएगी, इसकी क्षमता में बढोत्तरी होगी और सभी को इसका लाभ प्राप्त होगा। वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड के तहत क्षेत्रीय और अंतरराष्टÑीय स्तर पर एक दूसरे से जुड़े हुए ग्रीन ग्रिड के माध्यम से विभिन्न देशों के बीच ऊर्जा साझा करने और ऊर्जा आपूर्ति में संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस परियोजना के तीन चरण हैं, जिनमें से पहले चरण में मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच हरित ऊर्जा स्रोतों जैसे कि सौर ऊर्जा को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में एशिया में जोड़े हुए ग्रिडों को अफ्रीका से जोड़ा जाएगा और तीसरे चरण में वैश्विक स्तर पर विद्युत ग्रिडों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सौर ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा होने के साथ-साथ सबसे सस्ती है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ये पूरे विश्व में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी मुहैया करा रही है।  

-रंजना मिश्रा
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Tags: energy

Post Comment

Comment List

Latest News

हाथीपुरा का सरपंच  कर रहा डोडा चूरा की तस्करी हाथीपुरा का सरपंच कर रहा डोडा चूरा की तस्करी
इस मामले में आरोपी के खिलाफ मध्य प्रदेश की पुलिस तलाश कर रही है जबकि ब्यूरो की टीम द्वारा आरोपी...
रीजनल कॉलेज फॉर एजूकेशन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी में मोटिवेशनल प्रोग्राम का आयोजन
पायलट और मैं पार्टी एसेट, हमारे और नेता भी एसेट: गहलोत
आईएफएफआई जूरी प्रमुख की टिप्पणी कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचारों की भयावहता का अपमान - रोड्रिग्स
30 लाख कीमत का 287 किलो गांजा बरामद, 6 अभियुक्त गिरफ्तार
राहुल, सोनिया की जुबान बोल रहे हैं खडग़े : भाजपा
बेकाबू मेटाडोर कार में घुसी, दो की मौत, तीन घायल