मंदिर में हादसा

मंदिर में हादसा

जम्मू-कश्मीर में कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में नए साल पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ में भगदड़ मचने से 12 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए।

जम्मू-कश्मीर में कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में नए साल पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ में भगदड़ मचने से 12 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 15 लोग घायल हो गए। नव वर्ष के पहले ही दिन दुखद घटना ने पहले से हताशा के माहौल को और गहरा कर दिया। देश के लोग पहले से कोरोना की तीसरी लहर से हताश हो रहे हैं और उन्हें एक बार फिर भविष्य की चिंता सताने लगी है। नव वर्ष के पहले दिन लाखों लोग अपने-अपने आस्था स्थलों पर जाकर अपने जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और मनौतियां मांगते हैं। वैष्णो देवी मंदिर तो वैसे भी पूरे देश का बड़ा आस्था स्थल है और हर साल लाखों लोग दर्शनों को माता के दरबार में आते हैं। इस बार नव वर्ष पर मंदिर परिसर में भारी भीड़ का जमावड़ा हो गया। शुक्रवार की रात 2.15 बजे दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग गई थीं और कहा जाता है कि इन्हीं कतारों में दो गुटों में कहासुनी और धक्का-मुक्की हो गई और घबराए लोगों में भगदड़ मच गई। लेकिन भगदड़ के लिए अन्य बातें भी सामने आ रही हैं। लेकिन घटना के वास्तविक कारणों का पता तो जांच के बाद ही चल सकेगा। राज्य प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश कर दिए हैं और मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख व घायलों को दो-दो लाख का मुआवजा देने की घोषणा कर दी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी हादसे पर खेद व्यक्त करते हुए अलग से मुआवजे की घोषणा की है। सारी घटना प्रथम दृष्टि में प्रशासनिक लापरवाही का ही लगता है। निर्धारित संख्या से अधिक लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए संतोषजनक प्रबंध नहीं किए गए लगते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे देश में भगदड़ से संबंधित यह कोई पहला मामला हो। इससे पहले भी अनेक दर्दनाक हादसे घटित हो चुके हैं। जिनमें सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं। 3 अगस्त 2006 को हिमालय के नैना देवी मंदिर में भगदड़ से 60 श्रद्धालु मारे गए थे। 2006 में राजस्थान के जोधपुर में नवरात्रि पर चामुण्डा देवी मंदिर में भगदड़ मचने से 120 लोगों की मौत हो गई थी। केरल के सबरीमाला मंदिर की भगदड़ में 106 और इलाहाबाद कुंभ और हरिद्वार में घटित भगदड़ की घटनाओं को भी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसी अनेक घटनाओं के बाद भी प्रशासन व सरकारों ने कोई सबक नहीं सिखा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम नहीं किए। ऐसा नहीं होने तक ऐसे हादसे भविष्य में भी होते रहेंगे। और यह चिंताजनक है।

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