पुरानी संसद को अलविदा बोलकर नई संसद में पहुंचे सासंद

पुरानी संसद 18 जनवरी 1927 को बनकर तैयार हुई थी

पुरानी संसद को अलविदा बोलकर नई संसद में पहुंचे सासंद

नई संसद में जाने से पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि पुराने संसद भवन की गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए।

नई दिल्ली। पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी के संबोधन के बाद सभी सांसद नई संसद में पहुंच गए है। अब से पुरानी संसद को संविधान भवन के नाम से जाना जाएगा। बता दें कि पुरानी संसद 18 जनवरी 1927 को बनकर तैयार हुई थी।

नई संसद में जाने से पहले पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने कहा कि मेरी प्रार्थना है कि पुराने संसद भवन की गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। इसे केवल पुराना संसद भवन कहकर नहीं छोड़ना। अगर सब की सहमति हो तो इसे 'संविधान सदन' के नाम से जाना जाए। उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल 5वीं अर्थव्यवस्था है और ये तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर रहेगा।

कांग्रेस सांसद संविधान की प्रति लेकर पहुंचे
कांग्रेस सांसद नई संसद में संविधान की प्रति लेकर पहुंचे। संविधान की प्रति कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के हाथ में थी। उनके साथ राहुल गांधी, गौरव गोगोई और बाकी सांसद भी मौजूद थे।

ये है नई संसद की खासियत
नई संसद में लोकसभा में 888 सासंदों और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था है। पुरानी संसद में लोकसभा के 543 और राज्यसभा के 250 सांसदों के बैठने की व्यवस्था है। नई संसद में कई अत्याधुनिक सुविधाएं है। नई संसद में आने-जाने के लिए 6 गेट बनाए गए है। इन गेट के नाम गज द्वार, मकर द्वार, अश्व द्वार, शार्दूल द्वार, गरुड़ द्वार और हंस द्वार है। गज द्वार पीएम के लिए विशेष रास्ता है। मकर द्वार से सासंदों का आना और जाना होगा। हंस द्वार से पत्रकारों का आना-जाना होगा।

नई संसद में इमारती लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से, लाल और सफेद संगमरमर राजस्थान से लगाए गए हैं। इसमें उदयपुर से लाए गए हरे पत्थर लगे हैं। इसके अलावा लाल ग्रेनाइट अजमेर के लाखा की है। कुछ सफेद संगमरमर राजस्थान में ही अंबा जी से लाकर लगाया गया है। इसमें हवा की गुणवत्ता के लिए अल्ट्रावायलेट लैम्प जैसी सुविधाएं हैं। आर्द्रता नियंत्रण के लिए अल्ट्रासोनिक ह्यूमिडी फायर काम करेगा। बता दें कि पीएम मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नई संसद का शिलान्यास किया था।

नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति से नहीं कराने पर विपक्ष ने किया था विरोध
नई संसद का उद्घाटन 28 मई 2023 को हुआ था। इसके उद्घाटन से पहले कांग्रेस ने अपना विरोध जताते हुए कहा था कि इसका उद्घाटन राष्ट्रपति से कराना चाहिए। राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना - यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है। संसद अहंकार की ईंटों से नहीं, संवैधानिक मूल्यों से बनती है।

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