कुछ बुजुर्ग नेताओं ने छोड़ा चुनावी मोह, कुछ मैं और परिवार में उलझे

कुछ बुजुर्ग नेताओं ने छोड़ा चुनावी मोह, कुछ मैं और परिवार में उलझे

कांग्रेस पार्टी को उदयपुर चिंतन शिविर के युवा फॉर्मूले और परिवारवाद मुद्दों को कई सीटों पर त्यागना पड़ेगा। पार्टी को यह पता है कि इन उम्रदराज और बडे नेताओं के टिकट काटें तो हार का डर बढ़ जाता है।

ब्यूरो/नवज्योति,जयपुर। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के कुछ बुजुर्ग नेता चुनावी मोह छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं। कई नेताओं ने पार्टी के पास ठोस विकल्प नहीं होने के चलते मैं और मेरा परिवार वाला दावा ठोक दिया है। सर्वे में पिछड़ रहे नेताओं पर पार्टी नए चेहरों की तलाश में जुटी है,लेकिन कई सीटों पर कई बुजुर्ग नेताआें का ठोस विकल्प अभी तक मौजूद नहीं है, इसलिए जिताऊ उम्रदराज नेताओं को टिकट देना ही पड़ेगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बृजेन्द्र ओला, सुखराम विश्नोई जैसे कई ऐसे उदाहरण हैं। सर्वे में पिछड़ रहे कई बुजुर्ग नेता दिल्ली में बड़े नेताओं की परिक्रमा लगाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्टी को उदयपुर चिंतन शिविर के युवा फॉर्मूले और परिवारवाद मुद्दों को कई सीटों पर त्यागना पड़ेगा। पार्टी को यह पता है कि इन उम्रदराज और बडे नेताओं के टिकट काटें तो हार का डर बढ़ जाता है। इन नेताओं के परिवारजनों को भी टिकट नहीं दिया तो बगावत या भीतरघात की आशंकाएं भी बनती हैं। बुजुर्ग नेताओं में 70 से अधिक उम्र वाले उदाहरण में कुछ उदाहरण ऐसे भी हैं, जो अधिक उम्र के बाद भी विधानसभा चुनाव में हार बार अपनी लीड बढ़ा रहे हैं।

सर्वे रिपोर्ट में भी नए की जगह ये बुजुर्ग अधिक मजबूत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2008 में 16 हजार वोटों की लीड ली, 2013 में 19 हजार और 2018 में 45 हजार वोटों की लीड ली। सुखराम विश्नोई 2013 में 23 हजार लीड और 2018 में 25 हजार लीड बनाई। बृजेन्द्र ओला 2013 में 18 हजार वोट और 2018 में 39 हजार वोट से जीते। 

ये नेता छोड़ चुके चुनावी मोह
कांग्रेस नेता गुरमीत कुन्नर, भरतसिंह कुंदनपुर, हेमाराम चौधरी, दीपेन्द्र सिंह शेखावत, महादेव सिंह खंडेला और भरोसीलाल जाटव चुनाव लडने से इन्कार कर चुके हैं,लेकिन अधिकांश परिवारजनों को टिकट चाहते हैं। वहीं बुजुर्ग नेताओं में मंत्री डॉ.बीडी कल्ला और परसादीलाल मीणा ने चुनाव लडने का ऐलान किया है। उम्रदराज नेताओं में विधानसभा स्पीकर डॉ.सीपी जोशी, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, रामनारायण मीणा, विधायक परसराम मोरदिया, राजेन्द्र पारीक, उदयलाल आंजना, दयाराम परमार, अमीन खान, जौहरीलाल मीणा, बाबूलाल बैरवा, सुरेश मोदी, जितेन्द्र सिंह, जेपी चंदेलिया जैसे नाम भी शामिल हैं, जिनकी सीटों पर सबकी नजर रहेगी। 

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