निगम चुनाव टालने के चुनाव आयोग के फैसले पर दिल्ली में 'आप - बीजेपी' आमने-सामने

निगम चुनाव टालने के चुनाव आयोग के फैसले पर दिल्ली में 'आप - बीजेपी' आमने-सामने

निगम चुनाव टालने के चुनाव आयोग के फैसले पर केजरीवाल का बयान, 'निगम चुनाव टालना जनतंत्र के लिए ठीक नहीं', स्मृति ईरानी का पलटवार केजरीवाल ने जानबूझकर रोका एमसीडी के विकास कार्यों का फंड

नई दिल्ली। पांच राज्यों में चुनाव परिणाम के ठीक एक दिन बाद ही दिल्ली में आप और बीजेपी पार्टी आमने सामने हो गई है। वहज है कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निगम चुनाव टालने के दिल्ली चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का आयोग को चिट्ठी लिखकर चुनाव टालने को कहना और आयोग का केंद्र के सामने झुक कर चुनाव टालना, दोनों ही जनतंत्र के लिए ठीक नहीं है।

केजरीवाल ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अभी चुनाव होने वाले थे। नौ मार्च को दिल्ली चुनाव आयोग ने सुबह-सुबह प्रेस को निमंत्रण भेजा कि आज शाम पाँच बजे चुनाव आयोग एमसीडी के चुनावों की तारीखों का एलान करेगा। किस तारीख को नामांकन होगा, किस तारीख तक नाम वापस लिए जा सकता हैं और चुनाव किस तारीख को होंगे आदि। शाम पांच बजे चुनाव की तारीखों का ऐलान होने वाला था और उसके एक घंटा पहले शाम चार बजे केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग को चि_ी लिखी कि हम दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक नगर निगम बनाने जा रहे हैं इसलिए आप यह चुनाव टाल दीजिए। इसके बाद शाम पांच बजे दिल्ली चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार के कहे मुताबिक चुनाव को टाल दिया। शायद आजादी के बाद भारत के 75 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ होगा कि केंद्र सरकार ने सीधे किसी राज्य के चुनाव आयोग को चिट्ठी लिख कर चुनाव टालने के लिए कहा है।

उन्होंने कहा कि लोगों के मन में दो-तीन बातें चल रही हैं। सात-आठ साल से केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। अगर इनको तीनों एमसीडी को एक करना था, तो पिछले सात साल में इन्होंने क्यों नहीं किया? चुनाव की तारीखों के एलान के एक घंटा पहले इनको अचानक याद आई कि तीनों एमसीडी को एक करना है, इसलिए चुनाव को टाल दिया जाए। लोग कह रहे हैं कि एमसीडी को एक करना तो केवल एक बहाना है। असली मकसद तो चुनाव टालना था, क्योंकि भाजपा को लग रहा था कि अगर दिल्ली नगर निगम के चुनाव होंगे, तो आम आदमी पार्टी की जबरदस्त लहर है। उस लहर में भाजपा बह जाएगी और हार जाएगी, इसलिए चुनाव टालने की मंशा से यह किया गया है।

'आप' संयोजक ने आगे कहा कि यह भी लोग कह रहे हैं कि चुनाव का तीनों नगर निगमों को एक साथ करने से क्या लेना-देना है? आज तीन नगर निगम हैं और दिल्ली में कुल 272 वार्ड हैं। तीनों नगर निगमों के पार्षद अपने अलग-अलग नगर निगमों में बैठते हैं। चुनाव हो जाने दीजिए। अगर तीनों को एक भी कर देंगे, तो वो एक जगह बैठने लग जाएंगे। अभी चुनाव टालने की क्या जरूरत है? चुनाव कराओ। नए पार्षद आएंगे और जब तक तीनों नगर निगम हैं, तब तक वे तीनों में बैठ जाएंगे और जब एक नगर निगम हो जाएगा, तो वे एक साथ आकर बैठ जाएंगे। इसलिए चुनाव टालने की तो कोई जरूरत ही नहीं थी। लेकिन इनका मकसद तीनों नगर निगमों को एक करने का नहीं था। अगर करना होता, तो ये लोग सात साल में कर लेते। इनका मकसद केवल चुनाव टालने का था। यह देश के लिए अच्छा नहीं है। दोनों ही चीजें अच्छी नहीं है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा, '' सरकारें आती-जाती रहेंगी। कल आप भी नहीं होंगे और कल मैं भी नहीं होउंगा। हम महत्वपूर्ण नहीं हैं, लोग महत्वपूर्ण नहीं हैं, पार्टियां महत्वपूर्ण नहीं है। देश महत्वपूर्ण है। अगर हम चुनाव आयोग को दबाव डाल कर चुनाव रद्द कराते हैं, तो इससे चुनाव आयोग कमजोर होता है और चुनाव कैंसिल होते हैं, तो देश कमजोर होता है। हम सब को मिलकर देश की रक्षा करनी है। किसी भी हालत में हमें संस्थानों को कमजोर नहीं होने देना है। मेरी विनती है कि चुनाव कैंसिल न कराइए। अगर चुनाव कैंसिल होते हैं, यह जनतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। आज यह कहा जा रहा है कि हम तीनों एमसीडी एक करना चाहते हैं, इसलिए चुनाव टाल दीजिए। मान लो कि कल को लोकसभा का चुनाव है और उससे पहले कहा जाएगा कि पार्टियामेंट्री सिस्टम अच्छा नहीं हैं, हम प्रेसिडेंशियल सिस्टम लाना चाहते हैं और संविधान में बदलाव करना चाहते हैं, इसलिए चुनाव टाल दीजिए, तो क्या चुनाव टाले जाएंगे। मान लो कि कल को कोई राज्य विधानसभा का चुनाव है और यह कहा जाएगा कि हम दो राज्यों को एक करना चाहते हैं, इसलिए चुनाव टाल दीजिए, तो क्या चुनाव टाल दिए जाएंगे। क्या जनतंत्र के अंदर ऐसे चुनाव टाले जा सकते हैं। यह बहुत बड़ा प्रश्न है।''

केजरीवाल ने जानबूझकर रोका एमसीडी के विकास कार्यों का फंड: स्मृति
वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी ) के विकास कार्यो का फंड जानबूझकर रोका। ईरानी ने शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केजरीवाल एमसीडी में सुधार नहीं चाहते इसलिए पिछले सात वर्ष के अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में एमसीडी का फंड रोक दिया, जिनसे पार्कों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों का विकास होना था। उन्होंने कहा कि श्री केजरीवाल ने एमसीडी को 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं किया। उन्होंने सफाईकर्मियों का पैसा भी रोका।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं केजरीवाल से अनुरोध करती हूं कि वह लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई'निगमों के काम को न रोकें जो जमीनी स्तर पर काम करते हैं। अगर वह लोकतंत्र का समर्थन करते हैं तो निगमों का बकाया भुगतान जल्द से जल्द करें। उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद है कि केजरीवाल की जिस आम आदमी पार्टी ( आप ) को उत्तर प्रदेश में नोटा से भी कम वोट मिले , उत्तराखंड में उनके उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हुई, गोवा में छह फीसदी से भी कम वोट मिले, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि  केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के दबाव में आयोग ने एमसीडी के चुनाव टालने की घोषणा की है।

 

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