आरतिया ने बैठक में दिए इन्नोवेटिव सुझाव

विशेष सुविधाओं युक्त औद्योगिक क्लस्टर बनाये जाने चाहिये

आरतिया ने बैठक में दिए इन्नोवेटिव सुझाव

टीम आरतिया की ओर से वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा इस मीटिंग में थे, उन्होंने सुझाया कि देश का कुल आयात 56 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, यह बहुत बड़ी रकम है। राजस्थान को आयातित उत्पादों के उत्पादन का हब बनाया जा सकता है।

जयपुर। उद्योग भवन स्थित सभागार में राजस्थान सरकार के उद्योग आयुक्त हिमांशु गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित विकसित राजस्थान-2047 एडवाईजरी बैठक में ऑल राज ट्रेड एंड इंडस्ट्री एसोसियेशन की ओर से अनेक इन्नोवेटिव सुझाव दिये गये। बैठक में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक कारोबारी संगठन आरतिया को सुझाव देने के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। टीम आरतिया की ओर से उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा इस मीटिंग में थे, उन्होंने सुझाया कि देश का कुल आयात 56 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, यह बहुत बड़ी रकम है। आयात कम करने के लिए जरूरी है कि हम उन उत्पादों का उत्पादन राजस्थान में ही प्रारंभ करे, जिनका आयात होता है। राजस्थान को आयातित उत्पादों के उत्पादन का हब बनाया जा सकता है और इसके लिए जिला स्तर पर विशेष सुविधाओं युक्त औद्योगिक क्लस्टर बनाये जाने चाहिये।

दूसरा सुझाव यह था कि राजस्थान देश में कृषि जिंसों का प्रमुख उत्पादक है, देश में भौगोलिक दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है, अतः राज्य के सभी 352 पंचायत समिति क्षेत्रों में कृषि एवं डेयरी प्रसंस्करण क्लस्टर स्थापित किये जायें, जहां कृषि एवं डेयरी प्रसंस्करण इकाईयां लगाने वालों को संपूर्ण सुविधाएं मिलें और प्रोत्साहन भी। राजस्थान को वैज्ञानिक शोध केंद्र बनाने की दिशा में पहल हो और प्रथम चरण में जयपुर तथा बाद में जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर आदि स्थानों पर वैज्ञानिक शोध केंद्र विकसित किये जायें। ताकि विश्व-भर के छात्र एवं शोधार्थी राजस्थान में आकर शोध एवं विकास करें। विकास की अर्थ-व्यवस्था के वर्तमान युग में उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक शोध विकास की प्रथम सीढ़ी होती है और विकास के दरवाजे खोलती है।

इसी के समानांतर आरतिया ने बताया कि राजस्थान को ग्लोबल एजुकेशन का हब बनाना। राज्य के सभी संभाग मुख्यालयों पर ग्लोबल स्तर के प्रमुख विश्वविद्यालयों यथा हार्वर्ड, ट्निटी, आक्सफोर्ड, मोनाश मेलबोर्न आदि को अपने इंडिया सेंटर संचालित करने के लिए आमंत्रित किया जाये और इनकी स्थापना के लिए पूरा प्रशासनिक सहयोग सुलभ कराया जाये। साथ ही राजस्थान को हेल्थकेयर का ग्लोबल डेस्टीनेशन बनाने की दिशा में क्रियेटिव एप्रोच से काम हो। आरतिया ने कहा कि राजस्थान में जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है, अधिकतर ब्लाॅक डेंजर जोन में आ गये हैं। वर्षा जल का संचलन इस स्थिति का प्रारंभिक निदान है। इसके लिए दूदू के नजदीक स्थित लापोड़िया गांव में संचालित जल संचयन योजना चोका पद्धति का उपयोग कर राज्य के अधिकतर इलाकों को जल के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाया जा सकता है। 

आरतिया के अनुसार पूरे राजस्थान में बड़ी तादाद में स्कूलों-अस्पतालों के लिए भवन, कमरे एवं अन्य सुविधाएं विकसित करने में भामाशाहों का बड़ा योगदान रहा है। अभी भी इतना पोटेंशियल है कि राजस्थान के सभी नगर-पालिका व ग्राम पंचायत क्षेत्रों में स्थित स्कूलों-अस्पतालों के लिए आवश्यक भवन-कमरे एवं अन्य सुविधाएं भामाशाहों के सहयोग से जुटाई जा सकती है। इसके लिए एक टास्कफोर्स बनाकर काम किया जा सकता है।

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