लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान

निगम की गौशाला व कायन हाउस में बैठक लेने वाले गौवंश को कर रहे मशीनों से खड़ा

लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान

गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं।

कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में बैठक लेने वाली करीब 100 गौवंश को हर महीने बचाया जा रहा है। यह संभव हुआ है काऊ लिफ्टिंग मशीन से। गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं। जिनमें भी बीमार व घायल और कमजोर गौवंश अधिक है। उनमें गाय हो या बछड़े या फिर सांड अधिकतर प्लास्टिक की पॉलिथीन खाई हुई है। जिससे गौशाला में आने पर वे भूसा व चारा कम खा पाती है।  जिससे कई कमजोर व बीमार गाय बैठक ले लेती है। एक बार बैठक लेने के बाद उन्हें प्रयास करने पर भी  खड़ा करना मुश्किल होता है। जिससे उनकी मौत निश्चित होती है। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा था। लेकिन कुछ समय से बैठक लेने वाले गौवंश की मृत्यु दर में कमी आई है।

आधा दर्जन मशीनों का कर रहे उपयोग
सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने के बाद अधिकतर गायों कीमौत  हो जाती थी। अब कुछ समय पहले कॉऊ लिफ्टिंग मशीनोंका उपयोग कर उनकी मुत्यु दर को कम किया गया है। गौशाला व कायन हाउस में ऐसी करीब आधा दर्जन मशीनें बनवाई गई है। पहले इनकी संख्या दो ही थी और पुरानी होने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है। कुछ निगम के स्तर पर और कुछ दान दाताओं के सहयोग से ली गई है। सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने वाली गौवंश की अधिक मुत्यु हो रही थी। वहीं वर्तमान में यह घटकर 4 से 5 ही प्रतिदिन हो पा रही है। 

काढ़ा पिलाया जा रहा, हैलोजन लगाई
गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्दी में बीमार व कमजोर गायों के साथ ही छोटे बछड़ों को भूसे व चापड़ में पौष्टिक तत्वों का काढ़ा मिलाकर दिया जा रहा है। गौशाला व कायन हाउस में रोजाना यह काढ़ा बनाया जा रहा है।  इसके साथ ही बाड़ों में गर्माहट के लिए हैलोजन लाइटें लगाई गई है। हर 35 से 40 फुट की दूरी  पर लगाई गई है।

कॉऊ लिफ्टिंग मशीन से कर रहे खड़ा
नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर बीमार व कमजोर गाय है। यहां आने के बाद किसीकारण से यदि वह बैठक ले लेती है तो श्रमिकों की मदद से उन्हें दोबारा से खड़ा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय पहले प्रयास कर काऊ लिफ्टिंग मशीनें तैयार करवाई गई। जिनकी सहायता से बैठक लेने वाले गौवंश को खड़ा करने में सफलता मिली है। सिंह ने बताया कि लोहे की बनी इस मशीन को नीचे रखकर उस पर बैठक लेने वालीगाय या सांड को लिया जाता है। उसके बाद पट्टों  से बांधकर गिरारी की सहायता से उन्हें  उनके पैरों पर खड़ा किया  जाता है। उसके बाद उनके कमजोर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश की जाती है। जिससे उनके पैरों में ताकत आने पर उन्हें कुछ दूरी पर चलाया जाता है। ऐसा करके रोजाना 3 से 4 यानि हर महीने करीब 100 गौवंश की जान बचाने में सफल हो रहे है। बुधवार को भी 3 से 4  बैठक ले चुकी गायों को खड़ा किया गया।

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