ईरान का बड़ा बयान: बिना गारंटी और हर्जाने के युद्ध का अंत संभव नहीं, नुकसान के लिए उठाई मुआवजे के भुगतान की भी मांग
ईरान ने मांगी हमलों की गारंटी और मुआवजे की मांग
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने युद्ध विराम के लिए हमलों की पुनरावृत्ति न होने की गारंटी और मुआवजे की शर्त रखी है। उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमलों के लिए इज़रायल को जिम्मेदार ठहराते हुए संयुक्त जांच समिति का प्रस्ताव दिया। अराघची ने चेतावनी दी कि ऊर्जा केंद्रों पर हमला होने पर क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों को सीधा निशाना बनाया जाएगा।
तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। अराघची ने एक प्रमुख अरबी समाचार पत्र से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि युद्ध का अंत तभी संभव है जब इस बात की पुख्ता गारंटी दी जाए कि हमले दोबारा नहीं दोहराए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे के भुगतान की मांग भी उठाई है।
अराघची ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाने का प्रस्ताव भी दिया है जो क्षेत्र में हुए हमलों की बारीकी से जांच कर सके। ईरानी विदेश मंत्री ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि तेहरान की सैन्य कार्रवाइयां केवल इस क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों और हितों तक ही सीमित रही हैं। उन्होंने इस बात का पुरजोर खंडन किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों के किसी भी नागरिक या आवासीय क्षेत्र को निशाना बनाया है।
अराघची ने आशंका जताई कि अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इजरायल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी अरब देशों के मधुर संबंधों में दरार पैदा करना है। अराघची ने यह भी सनसनीखेज दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के शाहिद की तरह ही लुकास नामक एक नया ड्रोन बनाया है, जिसका उपयोग अरब देशों में ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के ऊर्जा केंद्रों या तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा। ऐसी स्थिति में ईरान इस क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों की ठिकानों पर सीधा हमला करेगा।

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