आधुनिक गर्भनिरोधक प्रसार दर में हुई 1.2 प्रतिशत की वृद्धि : सर्वे

पीएमए की ओर से सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए

आधुनिक गर्भनिरोधक प्रसार दर में हुई 1.2 प्रतिशत की वृद्धि : सर्वे

परिवार नियोजन (एफपी) और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित प्रोजेक्ट- पीएमए की ओर से 2021 सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए।

जयपुर। परिवार नियोजन (एफपी) और अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित प्रोजेक्ट- पीएमए की ओर से 2021 सर्वेक्षण के परिणाम सामने रखे गए। प्रोजेक्ट पीएमए इंडिया को राजस्थान में आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा क्रियान्वित किया गया। रीप्रोडेक्टीव चाइल्ड हैल्थ केयर एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक डॉ. केएल मीणा द्वारा इस कार्यशाला की अध्यक्षता की गई। इसमें देशभर के विकास भागीदारों के प्रतिनिधि, कार्यान्वयनकर्ता एवं शोधकर्ता शामिल हुए। मीणा ने कहा कि पीएमए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रीय स्तर पर परिवार नियोजन के ज्ञान व्यवहार एवं कवरेज के बारे में जानकारी एकत्रित करता है। इसके परिणाम आसानी और कम समय में सभी स्टेकहोल्डर्स तक पहुंचाये जा सकते है। पीएमए इंडिया द्वारा किया गया यह पैनल सर्वेक्षण पहली बार किया गया है। राजस्थान सरकार के परिवार कल्याण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. गिरीश द्विवेदी ने कहा कि जारी किया गया डेटा सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह हमें नीति निर्माण एवं कार्यक्रमों में मदद करेगा और डेटा पर आधारित निर्णय लेने में भी मदद करेगा। पीएमए द्वारा नौ प्लीजिंग वाले एफपी 2020 देशों में वार्षिक आधार पर राष्ट्रीय या उप-राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन एवं अन्य स्वास्थ्य संकेतकों का अनुमान लगाने के लिए चयनित स्थानों पर घरों व महिलाओं से डेटा एकत्र किया जाता है।

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट डॉ. पीआर सोडानी ने कहा कि पीएमए प्रोजेक्ट शुरू में जेएचयू और झपिएगो द्वारा शुरू किया गा था और भारत में आईआईएचएमआर द्वारा इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया जा रहा है। यह विभिन्न देशों में किया गया अध्ययन है, जो कार्रवाई करने योग्य डेटा उपलब्ध कराता है। मैं हमारे इस प्रोजेक्ट को निरंतर समर्थन के लिए राजस्थान सरकार का आभार व्यक्त करता हूं। उनके समर्थन के कारण ही हम इसे राजस्थान में सफलतापूर्वक लागू कर सके है। पीएमए सर्वेक्षण के प्रथम व द्वितीय चरण पूरा करने वाली महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक के उपयोग में वृद्धि हुई है। गर्भ निरोधकों का उपयोग नहीं करने में मामूली गिरावट आई है। सर्वेक्षण के दोनों चरण पूरा करने वाली विवाहित महिलाओं के बीच प्रथम चरण के बाद से गर्भनिरोधक के उपयोग में 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधक प्रसार दर में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसके अलावा पीएमए अध्ययन से पता चला है कि जिन महिलाओं ने प्रथम चरण के दौरान भविष्य में परिवार नियोजन साधनों का उपयोग करने की इच्छा जताई थी, उनमें से आधे से अधिक (54 प्रतिशत) महिलाओं ने द्वितीय चरण तक कोई न कोई विधि अपनाने की सूचना दी। करीब 14 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनकी वर्तमान या पिछली गर्भावस्था अनचाही थी। इनमें से अधिकांश महिलाएं देरी से मां बनना चाहती थी। परिवार नियोजन का उपयोग नहीं करने वाली आधी से अधिक महिलाओं ने बताया कि इसके साधनों का उपयोग न करना उनका अपना निर्णय था। पीएमए इंडिया प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) के नेतृत्व में डेटा संग्रह किया गया। पीएमए में भारत देश इथियोपिया, केन्या, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर, युगांडा और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो सहित नौ देशों में से एक प्रोग्राम कंट्री के रूप में शामिल है।

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आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा इस प्रोजेक्ट को राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के समर्थन से जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ में झपाइगो तथा बिल एंड मेलिंडा गेट्स इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन एंड रिप्रोडक्टिव हैल्थ के सहयोग से लागू किया गया है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा इस प्रोजेक्ट को फंड दिया गया। पीएमए इंडिया शहरी-ग्रामीण स्तर के साथ विभिन्न-चरणों के स्तरीकृत क्लस्टर डिजाइन का उपयोग करके चुने गए 134 गणना क्षेत्रों में परिवार नियोजन सेवाओं की नॉलेज, प्रेक्टिस व कवरेज पर जानकारी एकत्र करता है। इसके परिणाम राज्य स्तर तथा शहरी व ग्रामीण स्तर का प्रतिनिधित्व करते है।


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