महाष्टमी पर मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर हुआ शहर, मंदिरों में लगी भक्तों की कतार

अष्टमी पर घर-घर में कुलदेवी का किया पूजन

 महाष्टमी पर मां दुर्गा की भक्ति में सराबोर हुआ शहर, मंदिरों में लगी भक्तों की कतार

शहर में शनिवार को नवरात्र के आठवें दिन महाष्टमी पर घर-घर में कुलदेवी की पूजा-अर्चना हुई। महागौरी पूजन हुआ। इन्हें कुल देवी भी कहा जाता है।

कोटा। शहर में शनिवार  को नवरात्र के आठवें दिन महाष्टमी पर घर-घर में कुलदेवी की पूजा-अर्चना हुई। महागौरी पूजन हुआ। इन्हें कुल देवी भी कहा जाता है। अलग-अलग पूजन और विधान से लोगों ने अपनी-अपनी कुलदेवी का पूजन किया । महाष्टमी पूजन के लिए दूर दराज अंचल से लोग अपने घरों को आए। पूरे परिवार के लोगों ने साथ में अपनी कुलदेवी की पूजा की। मान्यता है कि महाष्टमी का पूजन कुलदेवी का पूजन होता है। ह्यकुलह्ण से मतलब ह्यवंशह्ण है। नवरात्र में महाष्टमी के दिए महागौरी के पूजन से वंश अर्थात कुलदेवी की पूजा हो जाती है। वहीं नौ दिन की सभी देवियों का पूजन भी पूरा मान लिया जाता है। महागौरी के पूजन से सभी देवियां प्रसन्न हो जाती हैं।

नवरात्र की महाष्टमी के मौके पर मन्दिरों में  दुर्गा पूजा की खास रौनक देखने शहर में मिली।  एक ओर जहां सारा शहर मां की भक्ति में सराबोर दिख रहा है।  वहीं दूसरी ओर मंदिरों में माता के भक्तों की भारी भीड़ रही। वहीं घरों में दूरदराज से आकर लोगों ने कुलदेवी की पूजन की और कन्या भोज हुआ। अष्टमी पर शहर के बिजासन माता ,आशापुरा माता, नव दुर्गा मंदिर, ज्योति मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर ,दाढ़ देवी मंदिर , करणी माता मंदिर पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही

कुलदेवी की हुई पूजा
पंडित अरुण श्रृंगी ने बताया कि नवरात्र के सभी नौ दिनों के पूजन का विशेष महत्व है, लेकिन महाष्टमी उनमें सर्वश्रेष्ठ पूजन माना गया है। इस दिन महागौरी का पूजन होता है। इन्हें कुल देवी भी कहा जाता है। कुल देवी के नाम भले ही अलग हो सकते हैं, लेकिन पूजा का महत्व और विधान लगभग एक जैसा ही है।

जवारों का विसर्जन आज
जवारों को विसर्जन गाजे-बाजों के साथ रविवार को नवमी के मौके पर किया जाएगा। जगह-जगह से जुलूस के रूप में जवारे किशोर सागर तालाब आएंगे। जवारे नौ दिन के होते है। इसलिए रविवार को जवारे विसर्जित किए जाएंगे। जवारे धन-धान्य की वृद्धि व मां भगवती के प्रतीक होते है।

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