महंगाई पर फोकस

बैंक का ज्यादा ध्यान महंगाई पर केन्द्रित हो गया है

महंगाई पर फोकस

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाली समिति ने इस बार जो फैसले लिए हैं, उससे इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बैंक का अर्थव्यवस्था की जगह ज्यादा ध्यान महंगाई पर केन्द्रित हो गया है।

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाली समिति ने इस बार जो फैसले लिए हैं, उससे इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि बैंक का अर्थव्यवस्था की जगह ज्यादा ध्यान महंगाई पर केन्द्रित हो गया है। बैंक ने नई रणनीति के तहत धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम में नकदी सामान्य स्तर पर लाने का प्रयास करेगी, ताकि महंगाई पर अंकुश लगाया जा सके। बैंक की नीति में बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि अभी देश के बैंकिंग सिस्टम में करीब 8.5 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त नगदी है। कोविड महामारी के दौरान पाबंदियों के चलते सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सिस्टम में नकदी बढ़ाई गई थी, लेकिन बीते कुछ महीनों से महंगाई बैंक की सहूलियत वाली स्थिति 4 फीसद से ऊपर निकल गई है। बैंकिंग सिस्टम में जब नकदी ज्यादा हो तो महंगाई में मदद मिलती है। मगर आरबीआई ने महंगाई काफी बढ़ने के बावजूद रेपो रेट व रिवर्स रेपो रेट के साथ एलटीवी यानी लोन टू वैल्यू में बदलाव नहीं किया है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही उद्योग जगत को भी लाभ मिलेगा। कम ब्याज पर अधिकतम लोन मिलने से व्यापार में अनिश्चितता बनी रहेगी।

उद्योगों की लागत बढ़ी है, लेकिन ब्याज दर नहीं बढ़ना अच्छा संकेत है, लेकिन रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने यह भी संकेत दिया है कि नीतिगत दरों में बदलाव न करने की स्थिति ज्यादा नहीं चल सकती। लगता है कि समिति आने वाले दिनों के जोखिमों को समझ रही है। इसलिए उसने मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 5.7 फीसद कर दिया है, जबकि इस साल फरवरी में यह साढ़े चार फीसद रखा गया था। इसके अलावा हालात को देखते जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान भी कम कर 7.2 फीसद कर दिया है, जो पहले 7.8 फीसद था महंगाई और ग्रोथ के अनुमानों में बदलाव इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था की चुनौतियां और बढ़ सकती है। जहां तक महंगाई का सवाल है तो शीर्ष बैंक यह पहले से ही कह रहा है कि इस साल यानी 2022-23 में भी महंगाई से मुक्ति नहीं मिलने वाली है। शीर्ष बैंक का अनुमान सही भी है, क्योंकि जिस तरह से डीजल- पेट्रोल से लेकर रसोई गैस और सीएनजी व पीएनजी के दाम जिस गति से बढ़ रहे हैं, उससे महंगाई बेलगाम हो गई है। आम आदमी व मध्यम वर्ग महंगाई से काफी त्रस्त है। रिजर्व बैंक हालात से अच्छी तरह वाकिफ है और कुछ नए कदम भी उठा रहा है। मौद्रिक नीति समिति के फैसले साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाला समय मुश्किलों व चुनौदियों से ही भरा है।

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