कागजों में सिमट कर रह गया स्वच्छ भारत अभियान

मुख्य मार्ग की सड़कों पर बह रहा नाले का गंदा पानी: कुराड़ गांव के कच्चे नालों में नहीं हो रही गंदे पानी की निकासी

कागजों में सिमट कर रह गया स्वच्छ भारत अभियान

बिना बारिश के ही सड़कें बनीं कीचड़ का दरिया।

सांगोद। सांगोद ब्लॉक के गांव कुराड़ में गंदगी से अटे पडेÞ कच्चे नालों का गंदा पानी मुख्य सड़क पर बहने लगा है। जिससे बिना बरसात के ही सड़कें दरिया बनी हुई हैं। ग्रामीणों व राहगीरों को इसी गंदे पानी में से होकर निकलने को मजबूर होना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार कुराड़ में कच्चे नालोें को पक्का नहीं किया गया है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। नाले कच्चे होने व साफ-सफाई के अभाव में घरों से निकलने वाला गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने लगा है। साथ ही पानी के निकास की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण इसमें कीचड़ जमा हो गया है। जिससे यह गंदा पानी और कीचड़ गांव की सड़कों पर बह रहा है। ग्रामीणों को हर समय सड़क पर भरे गंदे पानी के कारण संक्रमण व कई प्रकार की बीमारियों के फैलने की आशंका सता रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में इन दिनों स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं दूसरी ओर गांव की सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों को भी इस कई बार इस समस्या से अवगत करा चुके हैं।  लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। शिकायत पर अधिकारी केवल निरीक्षण करके चले गए। यह गंदा पानी मौसमी बीमारियों को न्यौता दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई के मामले में भी पंचायत का स्तर काफी नीचे है। जब बिना बरसात के ही है यह आलम है तो कुछ दिनों बाद आगामी बरसात में क्या होगा।

ऊर्जा मंत्री को भी लिख चुके हैं पत्र 
कुराड़ सरपंच नरेश कुमारी ने 2 जून को ऊर्जा मंत्री के नाम पत्र भी लिखा है। जिसमें गांव में पीडब्ल्यूडी रोड के पास बने नाले से पानी की निकासी करवाने की मांग की गई थी। ताकि गंदा पानी एक जगह इकट्ठा ना हो। लेकिन अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सीमित 
ग्राम वासियों का कहना है कि केवल नाला निर्माण में इतना समय लगना यह दर्शाता है कि स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक ही सीमित है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। स्वच्छता अभियान के लिए सरकार करोड़ों का बजट तैयार करती है। पर गांव में डेली रूटीन की सफाई तक नहीं हो रही है।

गंदगी से गुजरने को मजबूर हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क से प्रतिदिन सैंकड़ों राहगीरों, श्रद्धालुओं का रोजमर्रा के काम के लिए आवागमन होता है। जिससे कई बार गंदे पानी से कपड़े खराब हो जाते हैं। साथ ही कई लोग फिसलकर चोटिल भी हो जाते हैं। अभी एक पखवाड़े बाद जब स्कूल खुलेंगे, तब बच्चों को भी इसी गंदगी भरी डगर से गुजर कर शिक्षा प्राप्त करने जाना पड़ेगा।

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स्वीकृति दिलाने को तैयार, फिर काम में अड़चन क्यों 
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार जन प्रतिनिधि व अधिकारी आए और देखकर चले गए। स्थानीय सरपंच इसके लिए स्वीकृति दिलाने के लिए भी तैयार है। बावजूद इसके देरी होने से ग्रामीणों में काफी नाराजगी है।

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इनका कहनां हम रोज इसी गंदगी भरे मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। कई बार यहां से गुजरते समय वाहनों के कारण गंदे पानी से लोगों के कपड़े खराब हो जाते हैं। गंदगी भरी रपट के कारण बाइक सवारों का संतुलन बिगड़ जाता है।
- अरविंद मेहता, ग्रामीण 

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पंचायत की ओर से गांव के गंदे पानी की निकासी के लिए होने वाले निर्माण कार्य को लेकर 10 लाख रुपए की स्वीकृति निकाली गई। लेकिन स्थानीय खेत मालिकों द्वारा नाला निर्माण कार्य नहीं करने देने से इसको लेकर समझाइश भी की जा रही है। साथ ही उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर नाला निर्माण करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
- प्रियंका नागर, ग्राम विकास अधिकारी, कुराड़

अधिकारियों को कई बार अवगत करा चुके हैं। लेकिन कोई कहता है कि बजट पास हो गया है। कोई कहता है कि अभी फाइलों में कुछ रुकावटें हैं। कुराड़ ग्राम पंचायत सांगोद उपखंड की बड़ी पंचायतों में से एक है। इतनी बड़ी ग्राम पंचायत में सड़कों पर गंदा पानी बहते रहना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। 
- राजेश मालव, विधायक प्रतिनिधि 

जगह का निरीक्षण किया है। कुछ ग्रामीणों ने घरों के आगे प्लास्टिक के कट्टे डाल रखे हैं। जिससे पानी इकट्ठा होकर सड़क के बीच में आ जाता है। उनसे भी बोला है। साथ ही स्थानीय सरपंच को भी अवगत करवाया है। क्योंकि हमारा कार्य सड़क निर्माण, नाला निर्माण करवाना है। उच्चाधिकारियों को भी मैंने पत्र लिखकर अवगत करवा दिया है। जैसे ही निर्देश मिलेंगे, नाले का काम करवा देंगे।
- दीपक दाधीच, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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