हर श्वान की नसबंदी पर मिलेंगे दो हजार, राजस्थान को 300 करोड़ की उम्मीद
एबीसी केन्द्र और डॉग शेल्टर विकसित करने पर भी मिलेगा अनुदान
जयपुर। राजस्थान के नगर निकायों के लिए आवारा श्वानों की नसबंदी अब सिर्फ जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए केन्द्र सरकार से करोड़ों रुपए की प्रोत्साहन राशि भी हासिल की जा सकेगी। भारत सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (एसएएससीआई) योजना 2026-27 के तहत पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक श्वान नसबंदी पर 2000 रुपए का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा। इसी आधार पर राजस्थान को पशुधन क्षेत्र सुधार मद में 300 करोड़ तक की सहायता मिलने की संभावना है।
नसबंदी का आंकड़ा बढ़ाने पर जोर
योजना के तहत श्वान नसबंदी की संख्या जितनी अधिक होगी, राज्य को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी उतनी ही बढ़ेगी। यही वजह है कि विभाग ने सभी निकायों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम को तेज गति से लागू करने और प्रतिदिन की प्रगति भारत पशुधन पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। केन्द्र ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रोत्साहन राशि का निर्धारण केवल डिजिटल पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर होगा। ऐसे में नगर निकायों को नसबंदी कायोंर् का रिकॉर्ड ऑनलाइन देना होगा।
30 सितंबर तक करनी होगी मैपिंग
राज्य के सभी एबीसी केन्द्रों, डॉग शेल्टरों, डॉग वैनों और रिकवरी क्षेत्रों की 30 सितंबर 2026 तक भारत पशुधन पोर्टल पर मैपिंग करना अनिवार्य किया गया है। केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि मैन्युअल रिपोर्ट या अलग से भेजे गए आंकड़ों को मान्यता नहीं दी जाएगी।
नए केन्द्रों के लिए भी मिलेगा अनुदान
योजना के तहत नगर निकायों को नए एबीसी केन्द्र स्थापित करने के लिए 35 लाख रुपए तक तथा डॉग शेल्टर विकसित करने के लिए 30 लाख रुपए तक का पूंजीगत अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में आवारा श्वानों के प्रबंधन के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त
राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड ने सभी निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने, समयबद्ध डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने का आग्रह किया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि निकाय निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हैं तो राजस्थान केन्द्र से मिलने वाली 300 करोड़ तक की सहायता प्राप्त करने में सफल हो सकता है।
एलएसजी की क्या तैयारी: डीएलबी निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर ने सभी क्षेत्रीय उपनिदेशकों को पत्र लिखकर योजना के तहत एबीसी केन्द्रों की मैपिंग एवं लक्ष्यों की पूर्ति के लिए दशा-निर्देश दिए हैं। राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के निदेशक डॉ. सुरेश चन्द्र मीणा ने एलएसजी को पत्र लिखकर योजना के सुचारू संचालन एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आग्रह किया है।
क्या है एबीसी कार्यक्रम
एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम श्वानों की नसबंदी और रेबीज नियंत्रण से जुड़ा अभियान है।
इसका उद्देश्य आवारा श्वानों की संख्या को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करना है।
सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड एनडीएलएम भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
समय पर डेटा अपलोड नहीं होने पर राज्य प्रोत्साहन राशि से वंचित हो सकता है।
योजना में स्थानीय निकायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है।

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