बीटीपी के सामने नरम पड़ी सरकार, कहा मुकदमों पर होगा पुनर्विचार

मुकदमे वापस लेने का लिखित में चाहिए आदेश : बीटीपी

 बीटीपी के सामने नरम पड़ी सरकार, कहा मुकदमों पर होगा पुनर्विचार

उदयपुर। राज्यसभा चुनाव में तीनों ही सीटों पर जीत पक्की करने के लिए कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने बीटीपी विधायकों की नाराजगी को भांपते हुए अब यूटर्न लेते नजर आ रही है।

 उदयपुर। राज्यसभा चुनाव में तीनों ही सीटों पर जीत पक्की करने के लिए कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने बीटीपी विधायकों की नाराजगी को भांपते हुए अब यूटर्न लेते नजर आ रही है। कांकरी डूंगरी आंदोलन के दौरान आदिवासियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों वापस लेने संबंधी बीटीपी की मांग पर गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव ने मंगलवार को होटल ताज के बाहर मीडिया कैंप में पत्रकारों से कहा कि बड़ी घटनाओं में आमतौर पर निर्दोष युवाओं के खिलाफ भी मामले दर्ज कर लिए जाते हैं। ऐसे में कांकरी डूंगरी आंदोलन में दर्ज मुकदमों पर पुनर्विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, बीपीटी आश्वासन नहीं, इस संबंध में लिखित आदेश करने पर अड़ी हुई है। बीटीपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोगरा ने स्पष्ट किया कि लिखित आदेश नहीं तो समर्थन नहीं।


गृह राज्य मंत्री यादव ने बताया कि बीटीपी के दोनों विधायक राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर बीती रात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से होटल ताज अरावली में आकर मिले हैं। विधायकों और उनके नेताओं ने आदिवासी अंचल के विकास को लेकर उनकी बात रखी है। शिक्षक भर्ती आंदोलन के दौरान हुए कांकर डूंगरी प्रकरण में दर्ज मुकदमों को लेकर भी चर्चा हुई है जिसमें कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज हुए और उनमें गिरफ्तारियां भी हुईं। यादव ने बताया कि वार्ता के दौरान दोनों विधायकों का कहना था कि आंदोलन के दौरान कई निर्दोष युवाओं के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए जिसके चलते उनकी नौकरी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में इस मामले में  निर्दोष युवाओं को मुकदमे से बाहर किए जाने को लेकर जांच की जाएगी। यादव ने पत्रकारों को बताया कि इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों विधायकों और उनके नेताओं को आश्वस्त किया है कि आदिवासी युवाओं पर दर्ज मामलों में पुन: निष्पक्ष जांच करते हुए प्रकरणों का निस्तारण कर युवाओं को राहत दी जाएगी। निष्पक्ष जांच के बाद निर्दोष युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे।

घोगरा बोले.. लिखित आदेश बगैर समर्थन नहीं
भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोगरा ने एक बयान जारी कर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की चिंता को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में कांग्रेस को उसी सूरत में उनकी पार्टी समर्थन देगी, जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत काकरी डंूगरी मामले में दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर लिखित में आदेश दें। आश्वासन पर नहीं, पार्टी लिखित आदेश के बाद ही कांग्रेस को समर्थन देगी। यदि आदेश नहीं मिलता है तो पार्टी के दोनों विधायक चुनावी प्रक्रिया से दूर रहेंगे। डॉ. घोगरा ने दैनिक नवज्योति से बातचीत में कहा कि समर्थन को लेकर उनकी पार्टी के दोनों विधायक व पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की थी। इस दौरान गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव ने उनसे कहा था कि कांकर डूंगरी प्रकरण में दर्ज मुकदमों पर पुनर्विचार होगा। डॉ. घोगरा ने कहा कि हमें मामले में पुनर्विचार नहीं बल्कि मुकदमे वापस लेने के आदेश चाहिए, वह भी लिखित में। पार्टी ने निर्णय किया है कि 17 सूत्रीय मांग पत्र का समाधान करने के साथ ही काकरी डंूगरी मामले में दर्ज प्रकरणों को वापस लेने के लिखित आदेश के बाद ही दोनों विधायक कांग्रेस के पक्ष में मत देंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता है तो उनके विधायक किसी भी दल को समर्थन नहीं देंगे। 


तीन वोट के जुगाड़ में कांग्रेस
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के तीनों उम्मीदवारों रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी के लिए यूं तो मुख्यमंत्री गहलोत पूरी ताकत झोंके हुए हैं। वे सुरजेवाला ओर वासनिक की जीत को लेकर तो निश्चिंत है लेकिन भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा के मैदान में होने से तीसरे प्रत्याशी तिवारी के लिए उन्हें जोर आजमाइश करनी पड़ रही है। सोमवार देर रात तक विधायकों का गणित 120 तक पहुंच गया, ऐसे में गहलोत शेष तीन वोट जुटाने में लगे हुए हैं। तीनों उम्मीदवारों के लिए कुल 123 वोट चाहिए। उनके प्रयासों के बीच देर रात को बीटीपी के विधायक राजकुमार रोत और रामप्रसाद डिंडोर संगठन के नेताओं के साथ होटल ताज अरावली पहुंचे और मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाकात की। करीब डेढ़ घंटे चली वार्ता में दोनों विधायकों और उनके नेताओं ने कांकरी डूंगरी आंदोलन के दौरान आदिवासियों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेने की मांग प्रमुखता से उठाई। पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रमुख सात मांगों में से छह पर लगभग सहमति है, सातवीं मांग काकरी डूंगरी आंदोलन संबंधी मुकदमों पर भी सकारात्मक मंथन हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों विधायक जल्द ही होटल ताज अरावली में पहुंचेंगे।

विदुड़ी, सोलंकी व लोढ़ा भी पहुंचे होटल में
इधर, लम्बे समय से नाराज एवं सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे विधायक राजेंद्र विदुड़ी भी वार्ता के बाद डेरे में आ चुके हैं। कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी, निर्दलीय संयम लोढ़ा भी साथ हैं। आसिया विधायक दिव्या मदेरणा और जैसलमेर विधायक रूपाराम मेघवाल भी बीती रात को होटल पहुंच गए।

परमार बाहर, शेखावत अस्वस्थ
खेरवाड़ा विधायक डॉ दयाराम परमार अभी बाहर ही है, वहीं बीमार होने से श्रीमाधोपुर विधायक दीपेंद्रसिंह शेखावत भी नहीं आ सके। वैसे इन विधायकों को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत पूरी तरह से निश्चिंत है। बताया गया कि बहरोड़ विधायक बलजीत यादव उनकी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। वे रोजगार में राजस्थान के युवाओं को 75 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग कर रहे हैं।

होटल के बाहर मीडिया के लिए लगाया टेंट
बाड़ेबंदी में बंद विधायकों से अब तक मीडिया को दूर रखने के बाद मुख्यमंत्री गहलोत के निर्देश पर होटल से कुछ दूरी पर टेंट लगाकर बैठने की व्यवस्था की गई है। यहां टेंट में मीडिया कर्मियों को गर्मी से बचाने के लिए लगाए कूलर चलाने के लिए पास ही लगे विद्युत पोल से सीधे ही बिजली के तार जोड़ दिए गए।

 

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