मौमसी बीमारियों के कारण जेकेलोन में बढ़ाए जाएंगे बैड्स : कोरिडोर में भी लगेंगे एक्स्ट्रा बैड्स

मौमसी बीमारियों के कारण जेकेलोन में बढ़ाए जाएंगे बैड्स : कोरिडोर में भी लगेंगे एक्स्ट्रा बैड्स

अस्पताल प्रशासन का निर्णय, डे-केयर के मरीजों भेजा जाएगा सेठी कॉलोनी

जयपुर। मौसमी बीमारियों की वजह से इन दिनों बच्चों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते शहर के बच्चों के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेकेलोन में बैड्स तो फुल हैं हीं साथ ही आईसीयू में भी जगह नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को बैठक कर कई निर्णय लिए। इनमें अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैड्स की संख्या बढ़ाने पर सहमति बनी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में 80 बैड्स और बढ़ाए जाएंगे। इन बैड्स को अस्पताल में खाली पड़ी जगह जैसे कोरिडोर और अन्य जगहों पर लगाया जाएगा। जिससे आने वाले बच्चों को बैड्स की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही थैलेसीमिया, हिमोफीलिया जैसी बीमारी के लिए अस्पताल के डे केयर में इलाज के लिए आने वाले कम गंभीर मरीजों को सेठी कॉलोनी स्थित सैटेलाइट अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही आरयूएचएस में भी 200 बैड्स रिजर्व होने के कारण बच्चों को आरयूएचएस भी भेजा जाएगा।

सभी आईसीयू और बैड्स फुल
अस्पताल में इन दिनों बीमार बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अस्पताल के सभी 250 आईसीयू बैड्स फुल हो चुके हैं। साथ ही करीब 770 बैड्स भी लगभग फुल हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने बैठक कर आने वाले दिनों में मरीजों की और बढ़ती संख्या को देखते हुए बैड्स और व्यवस्थाओं को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

इधर...एसएमएस अस्पताल के सैंपल कलेक्शन सेंटर पर भीड़
इन दिनों मौसम में बदलाव के कारण अस्पतालों में मौमसी बीमारियों जैसे डेंगू-मलेरिया, वायरल बुखार आदि के मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। एसएमएस अस्पताल के ब्लड कलेक्शन सेंटर पर भी इन दिनों आम दिनों के मुकाबले दोगुने मरीज सैंपल देने पहुंच रहे हैं। अस्पताल में ओपीडी में इस समय 8 से 10 हजार मरीज आ रहे हैं तो इनमें से करीब दो से तीन हजार मरीज मौसमी बीमारियों के आ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को डेंगू-मलेरिया सहित वायरल बुखार की जांचें लिख रहे हैं और जांच केन्द्रों पर भीड़ बढ़ रही है। इस दौरान मरीजों को सैंपल जमा कराने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।   

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