नए टकराव की ओर बढ़ रही है दुनिया

केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है

नए टकराव की ओर बढ़ रही है दुनिया

इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। सेमीकंडक्टर से ज्यादा ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है।

नई दिल्ली। अमेरिकी स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद दुनिया एक नए टकराव की ओर बढ़ रही है। यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है, जिसके केंद्र में ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड पर वर्चस्व बनाना है। ऐसा अनुमान है कि ग्लोबल सेमीकंडक्टर कैपेसिटी में अकेले ताइवान की 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। दूसरी ओर अमेरिका और चीन सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर दुनिया में चौथा सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला प्रोडक्ट है। इसमें दुनिया के 120 देश भागीदार हैं। ट्रेड सिर्फ क्रूड ऑयल, मोटर व्हीकल व तेल का ही ट्रेड होता है। महामारी से पहले साल 2019 में टोटल ग्लोबल सेमीकंडक्टर ट्रेड की वैल्यू 1.7 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गई थी। चीन सेमीकंडक्टर के डिजाइन व मैन्यूफैक्चरिंग में काफी पीछे है, लेकिन चिप वाली डिवाइसेज के प्रोडक्शन में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी है। अमेरिका सेमीकंडक्टर बेस्ड डिवाइसेज का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इन्हें बनाने वाली 33 फीसदी कंपनियों का हेडक्वार्टर अमेरिका में ही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग की पांच सबसे बड़ी फॉन्ड्रीज में से 2 ताइवान में स्थित है।

ताइवान का अमेरिका और चीन के साथ ट्रेड
पिछले कुछ सालों के दौरान अमेरिका और चीन दोनों के साथ ताइवान का व्यापार बढ़ा है। 2021 में ताइवान ने अमेरिका को 65.7 बिलियन डॉलर और चीन को 125.9 बिलियन डॉलर के सामानों का निर्यात किया था। अमेरिका के मामले में ग्रोथ की रफ्तार अधिक थी। अमेरिका को ताइवान का निर्यात 29.9 फीसदी बढ़ा था, जबकि चीन के मामले में ग्रोथ की दर 22.9 फीसदी रही थी। सेमीकंडक्टर से केमिकल्स तक के लिए ताइवान पर निर्भर भारत और चीन के बीच बड़े स्तर पर बाइलैटरल ट्रेड होता है। चीन भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट एंड इम्पोर्ट पार्टनर्स में से एक है। भारत सेमीकंडक्टर से लेकर मशीनरी तक के लिए ताइवान पर निर्भर है। ताइवान से व्यापार बाधित होने पर भारत के स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक और ऑटो सेक्टर के ऊपर तबाह होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। ताइवान से भारत इलेक्ट्रिकल मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, प्लास्टिक, मशीन टूल्स और ऑर्गेनिक केमिकल्स खरीदता है। वहीं भारत मिनरल फ्यूल, तिलहन, और लोहा उत्पाद ताइवान को बेचता है।

5476 करोड़ का प्र्रतिमाह आयात करता है भारत
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल मई महीने में भारत ने ताइवान से 54.76 अरब रुपए के सामान खरीदे। इससे पहले अप्रैल 2022 में ताइवान से भारत का आयात 44.67 अरब रुपए रहा था। साल 1991 से 2022 के दौरान ताइवान से भारत का औसत आयात 11.04 अरब रुपए रहा है। इस साल मई महीने में भारत का ताइवान से आयात अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर रहा है। अभी जून और जुलाई के आंकड़े सामने नहीं आए हैं। अप्रैल 1991 में ताइवान से भारत का आयात महज 0.27 अरब रुपए रहा था। यह अब तक के उपलब्ध आंकड़ों में सबसे कम है।

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भारत में काम कर रहीं यह कंपनियां
भारत में पिछले कुछ समय में ताइवानी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है। विस्ट्रॉन कार्प, फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप, पेगाट्रॉन कॉर्प, क्वांटा कम्यूपटर इंक जैसी कई ताइवानी कंपनियों ने पिछले कुछ साल के दौरान भारत में प्लांट लगाए हैं। पहले ये कंपनियां मुख्य तौर पर चीन में प्लांट लगाकर प्रोडक्ट बना रही थीं और उन्हें ग्लोबल मार्केट में सप्लाई कर रही थीं। चीन के साथ ताइवान के संबंधों में आई खटास और चीन में बढ़ती निगरानी के बाद इन कंपनियों ने भारत का रुख किया। आज के समय में तो फॉक्सकॉन यहीं से मेड इन इंडिया आईफोन बना रही है। हालांकि अभी भी भारत में ताइवान की कंपनियों का निवेश काफी कम है। ग्लोबल मार्केट में अभी ताइवान की करीब 11 हजार कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें से महज 116 ताइवानी कंपनियों ने ही भारत में पैसे लगाए हैं।

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