तेलंगाना: विधायकों की खरीद फरोख्त

तेलंगाना के सत्तारूढ़ दल ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया

तेलंगाना: विधायकों की खरीद फरोख्त

राजनीतिक हलकों में इस मामले को चुनाव जीतने का स्टंट मात्र समझा गया। राज्य की 119 सदस्यों वाली विधानसभा में भारत राष्ट्र समिति के सदस्यों का संख्या 100 से ऊपर है। बीजेपी के केवल 4 ही सदस्य हैं।

अभी तक केवल आम आदमी पार्टी ही बीजेपी पर दिल्ली और पंजाब में उनके विधायकों को पैसे से खरीदने का आरोप लगा रही थी। अब इसमें दक्षिण के एक  राज्य तेलंगाना के सत्तारूढ़ दल भारत राष्टÑ समिति, जो अब तक तेलंगाना राष्टÑ समिति के नाम से जाना जाता था। नेताओं ने भी बीजेपी पर उनके विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया है। इसके नेताओं को कहना है कि बीजेपी उनके विधायकों का खरीदने के लिए भारी राशि खर्च कर रही है। बीजेपी ने इन आरोपों को परले सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि सत्तारूढ़ दल राज्य में हुए एक विधानसभा उप चुनाव से पूर्व यह झूठ फैला रही थी ताकि चुनाव प्रभावित  हो जाए।

हालाँकि आप ने केवल उनके विधायक खरीदने का आरोप लगाया, पर उसके नेताओं न तो कोई सबूत दिए हैं और ना ही ऐसा कोई मामला पुलिस में दर्ज करवाया। लेकिन तेलंगाना के सत्तारूढ़ दल ने पुलिस में मामला दर्ज करवाया और मामले की जांच भी चल रही है। इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये तीनों बीजेपी से सीधे तो नहीं जुड़े हुए हैं, बस बीजेपी के नजदीक बताए जाते हैं। सत्तारूढ़ दल ने एक वीडिओ क्लिप भी जारी किया है, जिसमें ये तीन लोग भारत राष्टÑ समिति के चार विधायकों को पाला बदलने के किए 4.4 करोड़ रूपये देने की पेशकश कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने इस वीडिओ आॅफ को कांट-छांट कर बना बताया है।

जब पुलिस ने स्थानीय कोर्ट में इनका रिमांड मांगा तो कोर्ट ने यह याचिका यह कह कर खारिज कर दी कि पुलिस ने ऐसे कोई पुख्ता प्रारंभिक प्रमाण पेश नहीं किए। जिसके आधार पर उनको रिमांड पर भेजा जाए। बाद में उच्च न्यायलय ने प्रथम दृष्टि से पुलिस के केस को सही पाया तथा तीनों को 14 दिन के जुडिशियल  रिमांड पर भेज दिया।

राजनीतिक हलकों में इस मामले को चुनाव जीतने का स्टंट मात्र समझा गया। राज्य की 119 सदस्यों वाली विधानसभा में भारत राष्ट्र समिति के सदस्यों का संख्या 100 से ऊपर है। बीजेपी के केवल 4 ही सदस्य हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे सत्तारूढ़ दल के केवल चार विधायको को खरीद कर क्या करेंगे? क्योंकि इससे न तो भारत राष्टÑ समिति की सरकार गिरेगी और और न ही बीजेपी की सरकार बन सकेगी। सरकार का पतन तभी संभव है जब इसके कम से कम 50 विधायक पार्टी छोड़कर अन्य दल में शामिल हो जाए। जो संभव होता नहीं  लगता। 

इसमें कोई संदेह नहीं कि बीजेपी इस राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में पूरी ताकत झोंक कर भारत राष्टÑ समिति को कड़ी चुनौती  देने की तैयारी कर रही है। कुछ समय पूर्व हैदराबाद नगर निगम के चुनावों में बीजेपी इस सत्तारूढ़ दल को कड़ी टक्कर दी थी तथा इसकी सीटें 4 से बढ़कर  40 से अधिक हो गई थी। तभी से बीजेपी अगला विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ने के तैयारी में लगी है। वास्तव में मुनुगौडे विधानसभा उपचुनाव शुरू से ही विवाद में आ गया था। यहां भारत राष्टÑ समिति और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला था। समिति हर हाल में चुनाव जीतना चाहती थी। समिति चाहती थी कि किसी अन्य उम्मीदवार को कोई ऐसा चुनाव चिन्ह नहीं दिया जाए, जो उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह कार से मिलता-जुलता हो। 

इस चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार को बुलडोजर चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया था। पार्टी ने यह गुहार लगाई कि बुलडोजर चुनाव चिन्ह मतदाताओं को उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह कार से भ्रमित कर सकता है। इसलिए इस उम्मीदवार को और कोई चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाए। नियमों और प्रावधानों के अनुसार किन्हीं कारणों से किसी उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह बदलने का अधिकार केवल केंद्रीय चुनाव के ही पास है। पता नहीं किन परिस्थितियों के चलते राज्य निर्वाचन अधिकारी ने उक्त उम्मीदवार का चुनाव चिन्ह बदल दिया। जब यह बात चुनाव आयोग की नजर में लाई गई तो आयोग ने तुरंत प्रभाव से राज्य चुनाव अधिकारी को बर्खास्त कर दिया। राज्य चुनाव अधिकारी होता तो राज्य केडर का ईएएस अधिकारी होता है, लेकिन उनकी जवाबदेही आयोग के प्रति ही होती है। ऐसा माना जाता है कि उक्त अधिकारी ने राज्य के सत्तारूढ़ दल के दवाब में आकर चुनाव चिन्ह बदला था। उधर समिति के नेताओं का कहना है कि अधिकारी का निर्णय सही था तथा आयोग उसे बीजेपी के दवाब में आकर ही बर्खास्त किया है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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