बढ़ता ओमीक्रान

बढ़ता ओमीक्रान

कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर देश में दहशत का माहौल बना दिया है।

कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर देश में दहशत का माहौल बना दिया है। पिछले साल देश में ओमिक्रॉन की तरह ही कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े थे। इस बार ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस वायरस का नया रूप कोरोना के पिछले रूपों के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैलने वाला बताया जा रहा है। महामारी विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेल्टा जैसे रूप की तुलना में तीन से पांच गुना ज्यादा तेजी से फैलने वाला वायरस है। देश के कई राज्यों में इससे संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है और धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों में दस्तक देने लगेगा। आशंका तो यह भी बताई जा रही है कि जनवरी के मध्य तक ओमिक्रॉन के करीब डेढ़ लाख मामले रोजाना सामने आ सकते हैं। अभी तक इसके ज्यादातर मामले महाराष्ट्र और दिल्ली में मिले हैं। इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात और राजस्थान में भी मामले कम नहीं हैं। कई सरकारें यह मान रही हैं कि ओमिक्रॉन कोरोना के डेल्टा स्वरूप जितना खतरनाक नहीं है और मरीज सामान्य रूप से घर पर ही इलाज लेकर ठीक हो सकता है। लेकिन उनका यह मानना पूरी तरह सच नहीं है। इसके खतरे को देखते हुए ही केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को पूरी तरह के एहतियाद बरतने की सलाह दी है और यहां तक कहा है कि जरूरत पड़े तो रात का कर्फ्यू लगाकर संक्रमण के फैलाव को रोकने की कोशिश होनी चाहिए। कोरोना डेल्टा स्वरूप ब्रिटेन से भारत आया था और ओमिक्रॉन भी दूसरे देशों से भारत में आया है। अब तक जितने भी मामले सामने आए उनमें से ज्यादातर लोग विदेशों से आए हुए हैं। इसलिए यह जरूरी है कि विदेशों से आने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जाए। हवाई अड्डों पर गहन जांच में जरा भी कोताही देश को बड़े संकट में डाल सकती है। अभी संकट यह ही है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश के लगभग सभी हिस्सों में हर प्रकार की गतिविधियां सामान्य हो चली हैं। कारोबार चल रहे हैं और बाजारों व सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ काफी बढ़ी नजर आ रही है। चिंता की बात यह है कि लोग मास्क लगाकर बाहर नहीं निकल रहे हैं और यह लापरवाही खतरे को जल्दी बढ़ाने वाली है। सभी लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और पुराने अनुभवों से सबक लेना होगा।

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