जानें इंडिया गेट में क्या है खास

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बातें पर्दे के पीछे की.....

सेल्फ गोल?
क्या कांग्रेस ने पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा के मुद्दे पर ‘कभी इधर, कभी उधर’ वाली बात करके सेल्फ गोल कर लिया? क्योंकि कांग्रेस यहां सत्ता में। एक रैली को संबोधित करने पंजाब गए पीएम मोदी का काफीला किसानों द्वारा रोका गया। तो देशभर में हंगामा मच गया। कांग्रेस के कछ नेताओं ने पहले तो मानो इसे हल्के से लिया। बाद में मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए खुद सोनिया गांधी ने सीएम सीएस चन्नी से बात करके ताकीद किया। दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। तो युवक कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास ने ‘हाउ इज द जोश’ का ट्वीट करके पीएम से कैफियत पूछ ली। वहीं, रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया। यह किसानों का आक्रोश। इसी बीच, मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया। खुद पीएम मोदी राष्ट्रपति कोविंद से मिल आए। बचा खुचा काम पंजाब कांग्रेस के कछ नेताओं ने कर दिया। मनीष तिवारी, सुनील जाखड़ और प्रताप सिंह बाजवा ने इसे गंभीर मामला बताया। क्या कांग्रेस ने सच में ‘सेल्फ गोल’ कर लिया?


चुनावी जंग...
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की जंग का ऐलान हो चुका। देशभर में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण बढ़ रहा। सो, चुनाव आयोग द्वारा पाबंदियों के साथ मतदान का संकल्प। बड़ी रैलियां करने पर फिलहाल रोक। लेकिन चुनाव समय पर करवाना चुनाव आयोग की संवैधानिक बाध्यता। मानकर चलिए, इन चुनावों के परिणाम का असर राष्ट्रीय फलक पर होने वाला। इसकी जद मे सबसे ज्यादा भाजपा, कांग्रेस। अपनी मरूधरा में भी दोनों दलों को बेसब्री से इंतजार। आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा। इसकी जानकारी दस मार्च को मिलेगी। लेकिन किसके सितारे चमकेगे और किसके डूबेंगे। यह भी तय हो जाएगा। यूपी में योगीजी की भगवा लहर चलेगी? पंजाब में राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा बनेगा? उत्तराखड एवं गोवा में भाजपा सत्ता बचा पाएगी? और क्या मणिपुर में हिमंता अबके ठीक से कमाल करेगे? या फिर कांग्रेस अपने एजेंडे में कामयाब होगी। मतलब किसान, बेरोजगारी एवं महंगाई को आम जनता प्राथमिकता देगी? सो, यह तय। साल 2024 में होने वाले आम चुनाव की नींव भी यहीं से पड़ेगी!


सुरक्षा बनेगा मुद्दा!
पीएम मोदी का पंजाब के हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय स्मारक जाते समय रास्ते में काफीला रूका। तो यह तय हो गया। राज्य के विधानसभा चुनाव में सुरक्षा एक अहम मुद्दा बनेगा। राज्य में चनाव के वक्त खालिस्तानी तत्व सिर उठा रहे। बीच-बीच में कई स्थानों से धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की खबरें अचानक बढ़ सी गईं। फिर एक जिला अदालत में बम विस्फोट हो गया। अरबों रूपए के अवैध नशे का कारोबार राज्य में बहुत बड़ी समस्या। वैसे सुरक्षा का मद्दा भाजपा के लिए मुफिद। क्योंकि वह इस पर हमेशा आक्रामक रहती। तो उसके साथ आए पूर्व सीएम कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी इस बारे में गहरी चिंता जता चुके। जबकि इसके उलट कांग्रेस हमेशा डिफेंसिव रहती आई। फिलहाल पार्टी को किसानों का मुद्दा सूट कर रहा। लेकिन पीएम की सुरक्षा मे सेंध लगने के बाद। मानो यह नेपथ्य में चला गया। जो चुनावी लिहाज से कांग्रेस के लिए मुफिद नहीं। भाजपा हमलावर रहेगी। देशभर में पीएम मोदी की दीघार्यु की कामना इसी का हिस्सा!


उपेक्षा.. अरूचि...!
राहुल गांधी नए साल की छुट्टियां मनाने विदेश गए। हालांकि वह पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में मौजूद रहे। लेकिन पंजाब के मोगा में उनकी तीन जनवरी को रैली तय थी। जिसे ऐन मौके पर रद्द किया गया। इससे पार्टी कार्यकर्ता निराश हुए। असल में, राहुल गांधी ऐसा कई बार कर चुके। जब कई अहम मौकों पर वह नदारद रहे। जिससे कांग्रेस की काफी फजीहत हुई। हर बार एक ही जवाब। उनका भी व्यक्तिगत जीवन। लेकिन मोगा की पूर्व में निर्धारित जनसभा का क्या? जिसकी तैयारी में अच्छी खासी मेहनत लगी होगी। लेकिन सवाल राहुल गांधी की राजनीति के प्रति बेरूखी या अरूचि का। सवाल उनकी प्राथमिकता का भी। मतलब, राजनीति और कांग्रेस के प्रति। जबकि पार्टी नेतृत्व का साफ संकेत। भविष्य में राहुल गांधी ही कांग्रेस के अगुवा होंगे। पार्टी उन्हीं के इर्द गिर्द चलेगी। लेकिन पीएम मोदी जैसे खांटी राजनीतिज्ञ से मुकाबले के लिए क्या यह रवैया ठीक? जो ‘24 इंटु सेवन’ की राजनीति ही करते। फिर अपेक्षित परिणाम कैसे संभव?


विजय संकल्प!
भाजपा ने प्रदेशभर के करीब 11 सौ सांगठनिक मंडलों में एक साथ बैठकें कर डाली। साथ में, निधि संग्रह अभियान भी। फिर माह के अंत में जयपुर में बड़ी रैली की तैयारी। जिसमें दिल्ली से अध्यक्ष जेपी नड्डा या अमित शाह के आने की संभावना। कोरोनाकाल में प्रदेश की टीम ने बेहतरीन काम किया। इसकी पीएम मोदी ने भी तारीफ की। पंचायत चुनाव के परिणाम भी इतने बुरे नहीं। हां, विधानसभा उपचुनाव ने निराश जरुर किया। लेकिन प्रत्याशी चयन में हुई गलती मान ली गई। स्थानीय समीकरणों का ध्यान नहीं रखा गया। इस बीच, पार्टी के भीतर सीएम पद के एक साथ कई दावेदार बताए जा रहे। लेकिन सभी एक सुर में बोल रहे। पार्टी संसदीय बोर्ड तय करेगा नाम। यानी दिल्ली से किसका भाग्य खुलेगा। अभी इसका इंतजार। अभी तो सभी को साथ मिलकर चलना होगा। अमित शाह फरमान। प्रदेश अध्यक्ष कह चुके। मुखिया होने के नाते। वह संगठन को इतनी मजबूती देना चाहेंगे कि भाजपा बार-बार सत्ता में आए। ऐसा विजयी संकल्प।


महज संयोग?
मरूधरा की राजनीति में अंदरखाने बहुत कछ चल रहा। मानो यह साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव की खदबदाहट हो। बात चाहे सत्ताधारी कांग्रेस की हो। या विपक्षी भाजपा की। देखिए न। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रभारी महासचिव अजय माकन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से कोरोना संक्रमित हो गए। इसके चलते दोनों ही पृथक आवास में। अब इसका असर यह हो रहा कि राजनीतिक नियुक्तियों की आस लगाए नेताओ को और इंतजार करना पड़ रहा। बड़ी मुश्किल से तो बात पटरी पर आ रही थी। अब मार्च माह में लॉटरी खुलने की बताया जा रहा। इसी प्रकार, भाजपा में पूर्व मुखिया अशोक परनामी जी अमित शाह से मिल आए। बकायदा फोटो जारी हुआ। लेकिन इसके ज्यादा कोई जानकारी नहीं। तभी से कयासों का दौर। वहीं, अध्यक्ष जी कह चुके। उन पर शीर्ष नेतृत्व को भरोसा। इसीलिए यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में प्रदेश संगठन तो वही चलाएंगे। इसका भी मतलब एकदम साफ। क्या दोनों ही ओर बहुत कुछ पक रहा? और क्या यह महज संयोग?
-दिल्ली डेस्क

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