स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियां : बीवीजी कंपनी पर ग्रेटर पार्षदों और अधिकारियों में नहीं बन रही एक राय

स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियां : बीवीजी कंपनी पर ग्रेटर पार्षदों और अधिकारियों में नहीं बन रही एक राय

नगर निगम जयपुर ग्रेटर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली बीवीजी फर्म को लेकर जनप्रतिनिधि लगातार विरोध दर्ज कराते आए हैं और कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाना चाहते है।

 जयपुर। केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से देशभर के स्वच्छ शहरों की रैंकिंग का निर्धारण करने के लिए चलाए जा रहे स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 के लिए नगर निगम जयपुर ग्रेटर में अधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों में एक राय नहीं बन पा रही है। इससे चलते रैंकिंग सुधार को लेकर परिणाम भी प्रभावित होने की संभावना है।


नगर निगम जयपुर ग्रेटर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली बीवीजी फर्म को लेकर जनप्रतिनिधि लगातार विरोध दर्ज कराते आए हैं और कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाना चाहते है। इसके लिए पिछली बार हुई बोर्ड बैठक में भी कंपनी का अनुबंध समाप्त कर निगम के स्तर पर ही सफाई कार्य कराने का निर्णय भी हुआ था। हालांकि इसको लेकर कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और उसे स्टे मिला था, अब न्यायालय ने भी कंपनी के स्टे का खारिज करने के बाद निगम ग्रेटर में फिर से कंपनी को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए जनप्रतिनिधि लामबंद हो रहे है। जबकि ग्रेटर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव का कहना है कि शहर को स्वच्छ रखना हम सबकी महती जिम्मेदारी है और इसके लिए हमें पहले इसकी सभी तैयारियां पहले करनी होगी इसके बाद ही इस पर निर्णय लिया जा सकता है।

एक साथ ही बीवीजी फर्म को हटाने से शहर की सफाई व्यवस्था बिगड़ सकती है। गौरतलब है कि बीवीजी कंपनी के भुगतान को लेकर जून 2021 में महापौर सौम्या गुर्जर एवं आयुक्त के बीच हुए विवाद के चलते महापौर को निलंबित किया गया था और अब न्यायालय के आदेश के बाद महापौर सौम्या ने पदभार तो ग्रहण कर लिया, लेकिन अभी तक आयुक्त एवं महापौर ने एक साथ बैठक नहीं की है।

हूपर किराये पर लेने की तैयारी
नगर निगम ग्रेटर के उप महापौर पुनीत कर्णावट ने कहा कि शहर में बीवीजी कंपनी की कार्य प्रणाली के चलते शहर की स्वच्छता प्रभावित हो रही है। अब कंपनी का बाहर का रास्ता दिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम के पास शहर को साफ रखने के लिए 135 हूपर उपलब्ध है और करीब दो सौ हूपर किराए पर लिए जाएंगे जिससे प्रत्येक वार्ड में दो-दो हूपर के बाद भी उनके पास संसाधन उपलब्ध रहेंगे।


आयक्त की बैठक में नहीं पहुंचे सफाई समितियों के चेयरमैन
शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रेटर आयुक्त ने सफाई समितियों के चेयरमैनों के साथ ही अधिकारियों के साथ बैठक की थी हालांकि इसमें महापौर एवं उप महापौर को शामिल नहीं किया गया था, इसको लेकर सफाई समितियों के चेयरमैन भी उस बैठक में शामिल नहीं हुए। अब बिना सफाई समितियों की राय के आयुक्त ने कंपनी को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश के साथ ही काम करने का ऑफर दे दिया है।

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