यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाने के पीछे क्या है कारण

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन को लेकर शुक्रवार देर रात अमेरिका एवं अल्बानिया द्वारा पेश प्रस्ताव पर मतदान 11 सदस्यों ने पक्ष में मत दिया

यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से भारत ने दूरी बनाने के पीछे क्या है कारण

तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

नई दिल्ली।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस एवं यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के लिए रूस की निंदा करने के लिए  देर रात एक प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने खुद को दूर रखा और संबद्ध पक्षों का हिंसा को तुरंत रोक कर कूटनीतिक उपायों पर लौटने और देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन को लेकर शुक्रवार देर रात अमेरिका एवं अल्बानिया द्वारा पेश प्रस्ताव पर मतदान 11 सदस्यों ने पक्ष में मत दिया और तीन सदस्यों - भारत, चीन एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव पर रूस ने वीटो के अधिकार का प्रयोग किया और इस प्रकार से प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। पक्ष में मतदान करने वालों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, अल्बानिया, ब्राजील, गैबोन, घाना, आयरलैंड, केन्या, मैक्सिको एवं नॉर्वे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान के बाद भारत के निर्णय को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी किया जिसमें संबद्ध पक्षों का हिंसा तुरंत रोकने, विवाद के समाधान के लिए कूटनीतिक उपायों पर लौटने तथा देशों की संप्रभुता एवं प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बातचीत में भी इन्हीं बिन्दुओं पर जोर दिया था।

भारत ने कहा कि सभी सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इसी से आगे का रचनात्मक मार्ग खुलता है। भारत ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि कूटनीति का मार्ग त्याग दिया गया और ङ्क्षहसा का रास्ता अपनाया गया। भारत ने कहा कि वह यूक्रेन के हाल के घटनाक्रम से बहुत व्यथित है। उसका मानना है कि इंसानों की जान की कीमत पर कोई समाधान पर नहीं पहुंचा जा सकता है। मतभेदों एवं विवादों को सुलझाने का एकमात्र रास्ता संवाद ही है।

भारत ने इस मसले पर एक सुसंगत, दृढ़ एवं संतुलित रुख अख्तियार किया है। भारत इससे जुड़े सभी पक्षों के संपर्क में है और सभी से लगातार अनुरोध कर रहा है कि वे बातचीत की मेज पर आएं। सूत्रों ने बताया कि भारत ने मतदान में भाग नहीं लेकर संबद्ध पक्षों से संपर्क करने और संवाद एवं कूटनीति के लिए बीच का रास्ता निकालने का विकल्प बरकरार रखा है।

इससे पहले प्रस्ताव के एक मसौदे में संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र के अध्याय 7 के अंतर्गत समाधान की बात कही गयी थी जिसमें सुरक्षा परिषद को बलप्रयोग का अधिकार मिलता लेकिन अंतिम मसौदे में इस बात का हटा दिया गया।    इस बीच एयर इंडिया भारतीयों को निकालने के लिए शनिवार सुबह तीन उड़ानें भरी गयीं हैं। आज तड़के मुंबई से एक और सुबह दिल्ली से दो बोइंग 787 विमान रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट और हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट के लिए रवाना हो चुके हैं जो आज शाम से देर रात तक लौटेंगे।

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