सवा करोड़ से ज्यादा पैरासिटामोल खा गया कोटा

कोविड के दौरान किया सर्वाधिक उपयोग, एंजिथ्रोमाइसिन की हुई 50 लाख खपत, मेडिकल कालेज में कम, सीएमएचओ स्तर पर अधिक वितरण

सवा करोड़  से  ज्यादा पैरासिटामोल खा गया कोटा

स्थिति यह रही कि अकेली पेरासिटामॉल की खपत कोटा में सवा करोड़ से अधिक रही। दूसरी सबसे अधिक दवा एजीथ्रोमाइसिन दी गई। इसकी संख्या भी 50 लाख के करीब है।

कोटा । कोटा में कोविड संक्रमण के दौरान दवाइयों की जमकर बिक्री हुई। हालांकि, कोविड की कोई निर्धारित दवा नहीं थी। फिर भी कुछ दवाइयों का सर्वाधिक उपयोग किया गया। इसमें पेरासिटामॉल सर्वाधिक रही। स्थिति यह रही कि अकेली पेरासिटामॉल की खपत कोटा में  सवा करोड़ से अधिक रही। इसमें सर्वाधिक खपत जिला औषधि केंद्र के अंतर्गत सीएचसी और पीएचसी के माध्यम से हुई है। इस दौरान  एक करोड़ 18 लाख 24 हजार 420 पेरासिटामॉल मरीजों को दी गई। जबकि, मेडिकल कॉलेज के संबद्ध अस्पतालों में एमसीडीडब्लू द्वारा 16 लाख 25 हजार की खपत हुई है। इस तरह दोनों को मिलाकर एक करोड़ 34 लाख 49 हजार  पेरोसिटामोल मरीजों को दी गई है। दूसरी सबसे अधिक दवा एजीथ्रोमाइसिन दी गई। इसकी संख्या भी 50 लाख के करीब है। इसके  अलावा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और विटामिन सी दवाइयां भी दी गई है। इनकी संख्या भी काफी अधिक है। हालांकि, इनकी संख्या काफी कम है।  क्योंकि, कोविड के समय अधिकांश मरीजों को बुखार की शिकायत थी। इससे निजात पाने के लिए लोगों ने पेरासिटामॉल का उपयोग किया था। यहीं वजह रही कि इसको मरीजों ने जमकर खाया।

बाजार से ब्रिकी अलग
चिकित्सा विभाग ने मरीजों को मेडिकल कॉलेज और सीएमएओ के माध्यम से दवाइयां उपलब्ध करवाई थी। इसके साथ ही निजी मेडिकल स्टोर से भी काफी संख्या में लोगों ने ये दवाइयां ली है। सरकारी और निजी क्षेत्र की दवाइयों को मिला लिया जाए तो इनकी संख्या दो गुना हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में इन कॉम्बो दवाइयों के साथ अन्य की भी खपत हुई थी। इसमें कप सिरफ, थर्मामीटर, बीपी यंत्र, मास्क और अन्य सामग्री है। हालांकि, इनकी संख्या सरकारी क्षेत्र से काफी कम है।

एजी और हाइड्रोक्सोक्लोरोक्वीन पर रोक
कोविड की द्वितीय लहर तक पेरासिटामॉल, एजीथ्रोमाइसिन, हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और विटामिन सी का काफी उपयोग होता रहा, लेकिन समय के साथ इनके ट्रीटमेंट की गाइडलाइन बदल दी गई। कोविड की तीसरी लहर में एजीथ्रोमाइसिन और हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद भी मरीजों ने इनको खाया था। चिकित्सकों का कहना है कि कोविड की कोई दवा नहीं थी। शुरूआत में चिकित्सा विभाग ने यही दवाइयां मरीजों को उपलब्ध करवाई है। उनका कहना है कि कोविड की दूसरी लहर  में इनका सर्वाधिक उपयोग हुआ था।

जिला औषधि केंद्र के माध्यम से खपत
दवाइयां                         मात्रा
पैरासिटामॉल                     1 करोड़ 18 लाख 24 हजार 420
एजीथ्रोमाइसिन                    43 लाख 47 लाख 180
हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन             12 लाख 22 हजार 120

मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर एमसीडीडब्लू द्वारा खपत
दवाइयां                         मात्रा
पैरासिटामॉल                     16 लाख 25
एंजीथ्रोमाइसिन                    6 लाख 67 हजार
हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन             1 लाख 10

इनका कहना है।

कोविड की तीसरी लहर की अपेक्षा दूसरी में दवाइयों की काफी अधिक खपत  हुई थी। इसमें सर्वाधिक पेरासिटामॉल की रही है। इसके उपरांत एजीथ्रोमाइसिन रही है।
- डॉ. सुशील सोनी, प्रभारी, मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर

पेरासिटामॉल की खपत अधिक होने का कारण बुखार रही है। क्योंकि, मरीजों को बुखार कॉमन लक्षण था। जिसके चलते इसका उपयोग किया गया।
- डॉ. विजय सरदाना, प्राचार्य, न्यू मेडिकल कॉलेज, कोटा

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