सामाजिक ताना बाना पेश करती है राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सतीश पांडे की फिल्म बंगाल 1947

सामाजिक ताना बाना पेश करती है राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सतीश पांडे की फिल्म बंगाल 1947

सिनेमा के शौकीन हमेशा ही बड़ी बेसब्री से नई फिल्मों का इंतजार करते हैं और इस इंतजार में अच्छा कंटेंट देखने की उम्मीद भी होती है।

सिनेमा के शौकीन हमेशा ही बड़ी बेसब्री से नई फिल्मों का इंतजार करते हैं और इस इंतजार में अच्छा कंटेंट देखने की उम्मीद भी होती है। इसलिए दर्शकों की नब्ज को पकड़ते हुए जाने माने फिल्म निर्माता सतीश पांडे 'बंगाल 1947' के नाम से अपनी नई फिल्म लेकर आए हैं, जो शुक्रवार को रिलीज हुई है और रविवार को इसका एक स्पेशल शो आईनॉक्स, नेहरू प्लेस में आयोजित किया गया। गौरतलब है कि सतीश पांडे को दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इस फिल्म के निर्माण में सतीश पांडे के बेटे ऋषभ पांडे ने भी बतौर निर्माता अपने काम को बखूबी अंजाम दिया है। कोमफेड प्रोडक्शन हाउस और थिंक टैंक ग्लोबल के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन आकाशदित्य लामा द्वारा किया गया है। यह फिल्म प्रसिद्ध नाटक 'शबरी का मोहन' पर आधारित है। इस फिल्म को प्रोड्यूस करने के अपने फैसले के बारे में सतीश पांडे कहते हैं कि, " इस फिल्म की कहानी हमारी प्रोडक्शन कंपनी के विजन से पूरी तरह मेल खाती है, क्योंकि आज जिस तरह की फिल्में बन रही हैं, उनके बीच 'बंगाल 1947' समाज के सकारात्मक पहलू को बेहद खूबसूरती से बयां करती है। बतौर फिल्म निर्माता हमारा यह दायित्व है कि ऐसे विषयों को सिनेमा पर प्रदर्शित किया जाए, जो समाज  में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं।" यह फिल्म भारतीय संस्कृति और इतिहास की बानगी पेश करती है। अपने फिल्मी सफर के बारे में पांडे बताते हैं कि, " चार दशक के अपने फिल्मी सफर के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा है। मेरी इस यात्रा में मुझे मिले दो राष्ट्रीय पुरस्कारों ने मेरे हौंसले को नई उड़ान देने का काम किया है और मुझे विश्वास है कि आगे भी हम अपनी टीम के साथ मिलकर इसी तरह अच्छी अच्छी फिल्में दर्शकों के लिए लाते रहेंगे"। फिल्म का डिस्ट्रीब्यूशन प्लाटून डिस्ट्रीब्यूशन द्वारा किया गया है।

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