चैत्र नवरात्र नौ से : युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के साथ सत्ता परिवर्तन के संकेत

घोड़े पर सवार होकर आएगी मातारानी और हाथी पर जाएंगी

चैत्र नवरात्र नौ से : युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के साथ सत्ता परिवर्तन के संकेत

माता का हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करना शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और 9 दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी हर एक परेशानियों का दूर करती हैं। 

जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 9 से 17 अप्रैल तक वासंतिक नवरात्र में पूरे नौ दिन घर-घर में शक्ति की देवी मां दुर्गा और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना होगी। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2081 भी आरंभ होगा। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर आ रही हैं। आमेर के शिला माता, जयगढ़ की तलहटी में स्थित मनसा माता मंदिर, काली माता मंदिर घाटगेट श्मशान, दुर्गा माता मंदिर दुर्गापुरा, वैष्णो देवी मंदिर राजपार्क,रूद्रघंटेश्वरी सहित अन्य देवी मंदिरों में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ होगा। 

घोड़े पर आना अशुभ संकेत
पाल बालाजी संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ.अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक जब नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार को होती है तो माता की सवारी घोड़ा होता है। घोड़े पर सवार होकर आना शुभ संकेत नहीं माना जाता अर्थात ये युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की तरफ संकेत करता है। सत्ता में परिवर्तन भी हो सकता है। इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.04 से 12.52 बजे तक है। 17 अप्रैल को नवरात्रि सम्पन्न होंगे। माता रानी हाथी पर प्रस्थान करेंगी। माता का हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करना शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी पर आती हैं और 9 दिनों तक अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर उनकी हर एक परेशानियों का दूर करती हैं। 

अश्विनी नक्षत्र का संयोग बनेगा
ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर 30 वर्ष बाद अमृत सिद्धि, शश योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अश्विनी नक्षत्र का संयोग बनेगा। नवरात्र के प्रथम दिन और दशमी को उत्थापन के दिन अश्विन नक्षत्र रहेगा।

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