चांदी की पालकी में विराजमान होकर शाही ठाठ-बाट से गणगौर माता की निकली सवारी

सवारी देखने हजारों की संख्या में पहुंचे देशी और विदेशी सैलानी

 चांदी की पालकी में विराजमान होकर शाही ठाठ-बाट से गणगौर माता की निकली सवारी

पीछे हाथी, घोड़े, बैलगाड़ी के साथ राज दरबार के प्रहरी, घुड़सवार, 20 सुहागिनें मंगल कलश लिए मंगल गीत गाती साथ चल रही थी। इस दौरान लोगों ने मोबाइल से सेल्फी भी ली

जयपुर। खुशनुमा मौसम के बीच जयपुर के जनानी ड्योढी से गुरुवार को चांदी की पालकी में विराजमान होकर शाही ठाठ-बाट से गणगौर माता की सवारी निकली। इस अवसर पर त्रिपोलिया गेट पर जयपुर पूर्व राजपरिवार के पद्मनाभ सिंह ने गणगौर का पूजन किया। इससे पूर्व सिटी पैलेस स्थित जनानी ड्योढी में पूर्व राजपरिवार की महिलाओं ने गणगौर माता की पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर घेवर का भोग अर्पित किया। सवारी के आगे-आगे पंचरंगा निशान लेकर सेवक हाथी पर चल रहा था। पीछे हाथी, घोड़े, बैलगाड़ी के साथ राज दरबार के प्रहरी, घुड़सवार, 20 सुहागिनें मंगल कलश लिए मंगल गीत गाती साथ चल रही थी। इस दौरान लोगों ने मोबाइल से सेल्फी भी ली। शाही सवारी का त्रिपोलिया गेट पर पुष्पवर्षा से स्वागत के साथ छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार होते हुए ताल कटोरा पहुंचकर सम्पन्न हुई। वहीं घरों में भी महिलाओं के साथ नवविवाहिताओं और कुंवारी लड़कियों ने भी गणगौर माता का पूजन किया।

सवारी देखने हजारों की संख्या में पहुंचे देशी और विदेशी सैलानी
 शाही लवाजमे और परम्परा के साथ गणगौर माता की सवारी निकली। इसे देखने के लिए हजारों की तादाद में विदेशी और देशी सैलानी जयपुर के त्रिपोलिया गेट से लेकर गणगौरी बाजार तक उमडे। पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि माता की सवारी के स्वागत में ‘भंवर म्हाने पूजण दे गणगौर’ तथा ‘खोल ऐ गणगौर माता खोल किवाड़ी’ जैसे लोकगीत सावाई मान गार्ड बैंड की ओर से बजाए गए।  त्रिपोलिया गेट के सामने ही माता की पालकी का स्वागत पलक पांवडेÞ बिछाकर महिलाओं ने घूमर नृत्य से किया। देशी के साथ ही विदेशी सैलानियों ने भी गणगौर उत्सव को आत्मसात किया और राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति को देखा, सुना और समझा। विदेशी सैलानियों के लिए त्रिपोलिया गेट के सामने स्थित हिन्द होटल के टैरेस पर बैठने के इंतजाम किए गए थे। यहां उन्हें जयपुर के परम्परागत घेवर भी उपलब्ध करवाए। इस दौरान विदेशी सैलानियों ने अपने हाथों पर मेंहदी भी रचाई। गणगौर माता की सवारी जैसे ही छोटी चौपड़ पहुंची तो वहां पर महिला कलाकारों ने घूमर नृत्य की प्रस्तुति दी। जयपुर व्यापार महासंघ के पदाधिकारियों ने माता की पालकी पर पुष्प वर्षा की।  गणगौर माता की सवारी पर प्रदेशभर से आए लोक कलाकार ने कच्ची घोड़ी, अलगोजा वादन, कालबेलिया नृत्य, बहरूपिया कला प्रदर्शन, बाड़मेर के कलाकारों ने गैर-आंगी व सफेद गैर, किशनगढ़ के कलाकारों ने घूमर व चरी नृत्य, शेखावाटी के लोक कलाकारों ने चंग व ढप, बीकानेर के कलाकारों ने पद दंगल की प्रस्तुति दी। जैसलमेर व बीकानेर के रौबीलों ने जनता में जोश भर दिया।

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