Budget: कृषि बजट में यह रहा विशेष, किसान पर सरकार का फोकस

Budget: कृषि बजट में यह रहा विशेष, किसान पर सरकार का फोकस

बिजली से वंचित रहे 2 लाख 8 हजार से अधिक घरों को आगामी 2 वर्षों में घरेलू कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।

जयपुर। बरसात और बाढ़ के दौरान जल बहकर व्यर्थ चला जाता है। बाढ़ सुरक्षा प्रबन्धन के साथ-साथ ऐसे जल का सदुपयोग हो सके, इसके लिए दीर्घगामी योजना बनाकर सरकार रन ऑफ वाटर ग्रीड स्थापित करेंगे। इस ग्रिड के अन्तर्गत 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विभिन्न कार्य करवाए जाएंगे। अगले 10 सालों मे बिजली की मांग 6 प्रतिशत बढ़ने की संभावना, ऊर्जा उत्पादन की कार्ययोजना तैयारआगामी 10 वर्षों में प्रदेश में विद्युत मांग में संभावित 6 प्रतिशत वृद्धि दर के लिए भी आवश्यक ऊर्जा उत्पादन की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसक तहत वर्ष 2031-32 तक परम्परागत स्रोतों से 20 हजार 500 मेगावाट क्षमता और अक्षय ऊर्जा के स्रोतों से 33 हजार 600 मेगावाट क्षमता (सोलर 22 हजार 200 मेगावाट, पवन 8 हजार 100 मेगावाट एवं हाइड्रो 3 हजार 300 मेगावाट) का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए काम शुरू कर दिया गया है। 
आरवीयूएनएल एवं केन्द्रीय उपक्रमों एनटीपीसी, कोल इंडिया लिमिटेड, एनएलसी लिमिटेड के के मध्य ज्वाइंट वेंचर अंडरटेकिंग बनाकर 3 हजार 325 मेगावाट कोयला एवं लिग्नाईट आधारित परियोजनाएं स्थापित करने के लिए 10 मार्च, 2024 को एमओयू किए गए। 
वर्तमान में अनुबंधित 9 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा के अतिरिक्त 13 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए टैरिफ बेस्ड टैंडर प्रक्रिया से 8 हजार मेगावाट ऊर्जा उत्पादन के साथ ही ‘कुसुम योजना’ के तहत 5 हजार मेगावाट का कार्य प्रगतिरत है। कुसुम योजना के अन्तर्गत 3 हजार 500 मेगावाट क्षमता की स्थापना के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी भी किए जा चुके हैं। 
वर्ष 2031-32 तक की ऊर्जा की मांग की पूर्ति के लिए 2 लाख 25 हजार करोड़ रुपए की लागत के कार्य करवाए जाने प्रस्तावित हैं। 
अब निजी क्षेत्र के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन को भी गति देते हुए 50 हजार मेगावाट से अधिक उत्पादन क्षमता स्थापित करने की दिशा में पूगल, छतरगढ़-बीकानेर एवं बोडाना-जैसलमेर में सोलर पार्क विकसित किए जाने का कार्य हाथ में लिया जाएगा। 
राज्य में ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित किए जाने के लिए नीति लाई जाएगी। इसके अन्तर्गत पंप स्टोरेज का भी समावेश किया जाएगा। इस क्रम में बारां, भरतपुर एवं अन्य जिलों में फिजिबिलिटी के आधार पर पंप स्टोरेज के माध्यम से भी ऊर्जा उत्पादन क्षमता सृजित की जाएगी। 
आदर्श सौर ग्राम बनाएं जाएंगे, सरकारी कार्यालय सौर ऊर्जा से जुड़ेंगे
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में ‘आदर्श सौर ग्राम’ बनाएं जाएंगे। प्रत्येक ग्राम में दो मेगावाट क्षमता तक के डीसेंट्रलाइज्ड सोलर पॉवर प्लांट्स की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। इसी के साथ, प्रदेश के सभी राजकीय कार्यालयों को भी समयबद्ध रूप से सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा। 
बिजली से वंचित रहे 2 लाख 8 हजार से अधिक घरों को आगामी 2 वर्षों में घरेलू कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।
765 केवी के छह, 400 केवी के सात, 220 केवी के 15 व 132 केवी के 40 जीएसएस व सम्बन्धित लाइनों का चरणबद्ध रूप से विस्तार व निर्माण किया जाएगा। 
प्रथम चरण में करवाए जाने वाले कार्य हैं
400 केवी जीएसएस निर्माण कार्य- केंचिया -श्रीगंगानगर 
220 केवी जीएसएस निर्माण कार्य- जावली (कठूमर)-अलवर, बजाखरा (सागवाड़िया)-बांसवाड़ा, बयाना-भरतपुर, नौखड़ा (कोलायत)-बीकानेर, बेंगू-चित्तौड़गढ़, भांवता (बांदीकुई), उदयपुरा (सिकराय)-दौसा, सागवाड़ा-डूंगरपुर, जैतारण-ब्यावर, छोटी सादड़ी-प्रतापगढ़, देवगढ़-राजसमंद एवं सलूम्बर 220 केवी जीएसएस में क्रमोन्नयन-सुमेरपुर-पाली 
    132 केवी जीएसएस निर्माण कार्य- भीलवाड़ा, देवाता (जवाजा)-ब्यावर, रेलावन व सेमली फाटक (किशनगंज)-बारां, सेला (सिवाना), पचपदरा, बोरावास (पचपदरा) -बालोतरा, बाछड़ाऊ (चौहटन)-बाड़मेर, गुसाईसर बड़ा एवं ठुकरियासर (डूंगरगढ़), केहरली (कोलायत), महाजन (लूणकरणसर), दंतोर (खाजूवाला)-बीकानेर, साहवा, सातडा-चूरू, भांवता-डीडवाना कुचामन, धौला (जमवारामगढ़)-जयपुर, फलसूण्ड (पोकरण), डांगरी -जैसलमेर, फींच, पाल (लूणी), मांडियाई खुर्द (ओसियां)-जोधपुर, सुनेल, रायपुर-झालावाड़, कुडंगांव (सपोटरा)-करौली, ईडवा (डेगाना), इन्दावड (मेड़ता), नोखा चांदावता-नागौर, साण्डेराव (सुमेरपुर) -पाली, सुहागपुरा, बम्बोरी (छोटी सादड़ी)-प्रतापगढ़, केलवाडा (कुम्भलगढ़)-राजसमंद, शिवाड़ (खण्डार)-सवाई माधोपुर।
पशुपालन एवं डेयरी को बढ़ावा
राज्य के 80 लाख परिवार पशुपालन एवं सम्बद्ध गतिविधियों पर निर्भर है। पशुपालन संवर्द्धन, संरक्षण एवं विकास के लिए 250 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ मुख्यमंत्री पशुपालन विकास कोष का गठन होगा। इसमें दुधारू पशुओं के उन्नत नस्ल विकास एवं आवारा नर गौवंश की समस्या के निराकरण के लिए अनुदान राशि 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की जाएगी। इससे लगभग 2 लाख पशुपालक लाभान्वित होंगे।
पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए 125 पशु चिकित्सकों तथा 525 पशुधन सहायकों के नये पदों का सृजन किया जाएगा। प्रदेश में विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थान खोले जाने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्य करवाए जाएंगे। इनमें नवीन पशु चिकित्सालय- विद्याधर नगर-जयपुर, बेढ़म (नगर)-डीग एवं शिवदानपुरा -डीडवाना कुचामन, पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन- देवनगर (पुष्कर)-अजमेर व मांदलिया (लाडपुरा)-कोटा सहित 100 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन, इस पर लगभग 15 करोड़ रुपए का व्यय, पशु चिकित्सालयों का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन-पशु चिकित्सालय नेतराड (चैहटन)-बाड़मेर व जाखल (नवलगढ़)-झुंझुनूं का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन और पशु चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत कार्य- विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में चरणबद्ध रूप से आधारभूत सुविधाओं के विकास, भवन निर्माण/मरम्मत कार्य व उपकरण आदि के लिए 200 करोड़ रुपए व्यय होंगे। दुधारू पशुओं के साथ-साथ अन्य पशुओं को भी सम्मिलित करते हुए मुख्यमंत्राी मंगला पशु बीमा योजन शुरू होगी। इसमें 5-5 लाख दुधारू गाय/भैंस, 5-5 लाख भेड़/बकरी तथा 1 लाख उष्ट्र वंश (ऊंट) का बीमा किया जायेगा। इस पर कुल 400 करोड़ रुपये का व्यय होगा। वहीं, 7 जिलों में राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित किए जा रहे हैं। इसका विस्तार करते हुए अब शेष जिलों में चरणबद्ध रूप से पशु मेले आयोजित होंगे।  पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए 125 पशु चिकित्सकों तथा 525 पशुधन सहायकों के नये पदों का सृजन किया जाएगा। प्रदेश में विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थान खोले जाने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्य करवाए जाएंगे। इनमें नवीन पशु चिकित्सालय- विद्याधर नगर-जयपुर, बेढ़म (नगर)-डीग एवं शिवदानपुरा -डीडवाना कुचामन, पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन- देवनगर (पुष्कर)-अजमेर व मांदलिया (लाडपुरा)-कोटा सहित 100 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन, इस पर लगभग 15 करोड़ रुपए का व्यय, पशु चिकित्सालयों का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन-पशु चिकित्सालय नेतराड (चैहटन)-बाड़मेर व जाखल (नवलगढ़)-झुंझुनूं का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन और पशु चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत कार्य- विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में चरणबद्ध रूप से आधारभूत सुविधाओं के विकास, भवन निर्माण/मरम्मत कार्य व उपकरण आदि के लिए 200 करोड़ रुपए व्यय होंगे। दुधारू पशुओं के साथ-साथ अन्य पशुओं को भी सम्मिलित करते हुए मुख्यमंत्राी मंगला पशु बीमा योजन शुरू होगी। इसमें 5-5 लाख दुधारू गाय/भैंस, 5-5 लाख भेड़/बकरी तथा 1 लाख उष्ट्र वंश (ऊंट) का बीमा किया जायेगा। इस पर कुल 400 करोड़ रुपये का व्यय होगा। वहीं, 7 जिलों में राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित किए 
 पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए 125 पशु चिकित्सकों तथा 525 पशुधन सहायकों के नये पदों का सृजन किया जाएगा। प्रदेश में विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थान खोले जाने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं के विकास कार्य करवाए जाएंगे। इनमें नवीन पशु चिकित्सालय- विद्याधर नगर-जयपुर, बेढ़म (नगर)-डीग एवं शिवदानपुरा -डीडवाना कुचामन, पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन- देवनगर (पुष्कर)-अजमेर व मांदलिया (लाडपुरा)-कोटा सहित 100 पशु चिकित्सा उपकेन्द्रों का पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन, इस पर लगभग 15 करोड़ रुपए का व्यय, पशु चिकित्सालयों का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन-पशु चिकित्सालय नेतराड (चैहटन)-बाड़मेर व जाखल (नवलगढ़)-झुंझुनूं का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन और पशु चिकित्सा संस्थानों में आधारभूत कार्य- विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में चरणबद्ध रूप से आधारभूत सुविधाओं के विकास, भवन निर्माण/मरम्मत कार्य व उपकरण आदि के लिए 200 करोड़ रुपए व्यय होंगे। दुधारू पशुओं के साथ-साथ अन्य पशुओं को भी सम्मिलित करते हुए मुख्यमंत्राी मंगला पशु बीमा योजन शुरू होगी। इसमें 5-5 लाख दुधारू गाय/भैंस, 5-5 लाख भेड़/बकरी तथा 1 लाख उष्ट्र वंश (ऊंट) का बीमा किया जायेगा। इस पर कुल 400 करोड़ रुपये का व्यय होगा। वहीं, 7 जिलों में राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित किए जा रहे हैं। इसका विस्तार करते हुए अब शेष जिलों में चरणबद्ध रूप से पशु मेले आयोजित होंगे। जा रहे हैं। इसका विस्तार करते हुए अब शेष जिलों में चरणबद्ध रूप से पशु मेले आयोजित होंगे। 

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