रूसी हमले के बाद पहली बार यूक्रेनी मंत्री आ रहीं दिल्ली, पाकिस्तान संग दोस्ती पर भारत की नजर

भारत की घटनाक्रम पर पैनी नजर

रूसी हमले के बाद पहली बार यूक्रेनी मंत्री आ रहीं दिल्ली, पाकिस्तान संग दोस्ती पर भारत की नजर

भारत यूक्रेन को पिछले साल से ही मानवीय सहायता मुहैया करा रहा है। अब तक राहत सामग्री की 10 खेप भेजी जा चुकी है। इस सहायता में कई जरूरी दवाएं और मेडिकल उपकरण हैं।

कीव। रूसी हमले के बाद पहली बार यूक्रेन से कोई मंत्री भारत की यात्रा पर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यूक्रेन की उप विदेश मंत्री इमिने दझापरोवा अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आ रही हैं। यूक्रेनी मंत्री इमिने ऐसे समय पर भारत आ रही हैं जब मास्को के साथ भारत का व्यापार लगातार नए शिखर पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि इस दौरान इमिने रूस के साथ चल रहे युद्ध पर अपना पक्ष रखेंगी। एक साल से ज्यादा समय से चल रहे इस युद्ध में भारत ने न्यूट्रल रुख अपना रखा है। यूक्रेन को पाकिस्तान बड़े पैमाने पर हथियारों का निर्यात करके पैसा कमा रहा है जिस पर भारत ने अपनी पैनी नजर बना रखी है। भारत ने जोर देकर बार-बार कहा है कि शांति और बातचीत ही आगे बढ़ने का रास्ता है। यूक्रेन की मंत्री भारत के दो प्रमुख थिंक टैंक के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। भारत यूक्रेन को पिछले साल से ही मानवीय सहायता मुहैया करा रहा है। अब तक राहत सामग्री की 10 खेप भेजी जा चुकी है। इस सहायता में कई जरूरी दवाएं और मेडिकल उपकरण हैं।

भारत की घटनाक्रम पर पैनी नजर
यूक्रेन ने पिछले साल अपने राजदूत को वापस बुला लिया था और अभी तक किसी नए राजदूत की नियुक्ति नहीं की गई है। पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बातचीत की थी। इस बीच भारत का दुश्मन पाकिस्तान यूक्रेन को पश्चिमी देशों के माध्यम से हथियार और गोला बारूद मुहैया कराकर जमकर पैसा बना रहा है। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। इस सप्ताह भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में मतदान से दूर रहा था। इसमें युद्धापराधों की जांच को एक साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव था।

जेलेंस्की का संदेश लेकर आ रहीं यूक्रेन की मंत्री 
यह प्रस्ताव किसी तरह से पास हो गया जिसमें 28 देशों ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। वहीं भारत समेत 17 देश इस प्रस्ताव से अनुपस्थित रहे। केवल दो देश ही इस प्रस्ताव से दूर रहे। पिछले दो सप्ताह में भारत ने कई शीर्ष रूसी अधिकारियों और मंत्रियों का स्वागत किया है। भारत और रूस ने एक लंबी अवधि का ऊर्जा समझौता किया है। वह भी तब जब दोनों देशों के बीच व्यापार 40 अरब डॉलर को पार कर गया है। यही नहीं पिछले दो सप्ताह में इस व्यापार को और ज्यादा बढ़ाने के लिए कई बैठकें हुई हैं। रूस के राष्ट्रपति ने अपनी नई विदेश नीति में भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर दिया है।

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