विकसित राजस्थान 2047 के लिए एमएसएमई बनेगा 'ग्रोथ इंजन': जोगाराम पटेल
विकसित राजस्थान 2047: एमएसएमई बना अर्थव्यवस्था का 'ग्रोथ इंजन'
जयपुर में आयोजित 7वें एमएसएमई समिट में कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। देश की GDP में 30% योगदान देने वाला यह क्षेत्र अब डिजिटल लोन और 35 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से सशक्त हो रहा है। समिट में नवाचार, वैश्विक ब्रांडिंग और 20 करोड़ रोजगार सृजन पर विशेष मंथन किया गया।
जयपुर। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) न केवल भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने वाले प्रमुख स्तंभ भी हैं। यह विचार राजस्थान सरकार के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने गुरुवार को फिक्की (FICCI) राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित 7वें राजस्थान एमएसएमई समिट के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए। 'एमएसएमई एज द ग्रोथ इंजिन ऑफ विकसित राजस्थान 2047' थीम पर आयोजित इस समिट में राज्य के औद्योगिक परिदृश्य और एमएसएमई की वैश्विक पहुंच पर गहन मंथन किया गया।
देश की जीडीपी में 30% योगदान, तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम
उद्घाटन संबोधन में मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब तीसरी पायदान की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा: "देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देने वाला एमएसएमई क्षेत्र समावेशी आर्थिक प्रगति का आधार है। राजस्थान अपने विशाल संसाधनों और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ औद्योगिक विस्तार के लिए तैयार है।" उन्होंने बताया कि 'राइजिंग राजस्थान' समिट के तहत हुए 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू में से 8 लाख करोड़ की परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है, जो राज्य में निवेश अनुकूल माहौल का प्रमाण है।
बैंकिंग सेक्टर का सहयोग और डिजिटल समाधान
बैंक ऑफ बड़ौदा के जोनल हेड और एसएलबीसी संयोजक एम. अनिल ने एमएसएमई के लिए वित्त की सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने "बीओबी डिजी उद्यम" जैसी डिजिटल पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी तरह डिजिटल लोन प्रोसेसिंग से व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ी है। उन्होंने ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुसार त्वरित और प्रतिस्पर्धी वित्तीय समाधानों की उपलब्धता को अनिवार्य बताया।
20 करोड़ रोजगार और नीतियों का संबल
राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (RCCI) के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने बताया कि एमएसएमई एक्ट के आने से छोटे उद्योगों को कम लागत पर क्रेडिट मिलना आसान हुआ है।
रोजगार: यह क्षेत्र देश में लगभग 20 करोड़ लोगों को आजीविका दे रहा है।
नीतिगत ढांचा: राज्य सरकार ने इस क्षेत्र की मजबूती के लिए करीब 27 नीतियां लागू की हैं।
डॉ. जैन ने मार्केटिंग, आधुनिक तकनीक और कुशल कारीगरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया।
नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग पर जोर
फिक्की राजस्थान के को-चेयरमैन और इन्सोलेशन एनर्जी के चेयरमैन मनीष गुप्ता ने कहा कि एमएसएमई का भविष्य केवल सब्सिडी पर नहीं, बल्कि नवाचार और प्रतिस्पर्धा पर टिका है। उन्होंने उद्यमियों से वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ने और क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल अपनाने का आह्वान किया। वहीँ, फिक्की राजस्थान एमएसएमई सब-कमेटी के चेयरमैन एन.के. जैन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि छोटे उद्योगों को बड़े उद्योगों में परिवर्तित करने की दिशा में भारत उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन फिक्की राजस्थान के एडवाइजर अजय सिंघा ने किया।
खास सत्रों में हुआ मंथन:
समिट के दौरान दो मुख्य तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:
वैश्विक पदचिह्न: राजस्थान के एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और विदेशी बाजारों तक पहुंच पर चर्चा।
क्रेडिट से कैपिटल मार्केट तक: एमएसएमई के लिए पारंपरिक लोन के अलावा शेयर बाजार और अन्य वित्तीय माध्यमों से पूंजी जुटाने पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

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