राजस्व मण्डल विखण्डन के विरोध में वकीलों ने तानी मुठ्ठियां

दो दिन का न्यायिक कार्य किया स्थगित, जन आन्दोलन बनाने की दी चेतावनी

 राजस्व मण्डल विखण्डन के विरोध में वकीलों ने तानी मुठ्ठियां

एक साल के ठण्डे छीेंटे के बाद सरकार ने फिर शुरू की तैयारियां, आज होने थी बैठक, ऐनवक्त पर टली

अजमेर। राज्य सरकार द्वारा राजस्व मण्डल के विखण्डन की तैयारियां एक बार फिर शुरू कर देने से मण्डल के वकीलों में रोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार के इस फैसले के खिलाफ लामबंद होकर इसे जन आन्दोलन बनाकर आर-पार की लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है। वकीलों ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए दो दिन 29 और 30 जून को न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया है। 

राजस्व विभाग के ग्रुप-1 के विशिष्ट शासन सचिव विश्राम मीणा द्वारा राजस्व आयुक्तालय के गठन के संबंध में राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में 29 जून को बैठक कराने की मिली सूचना से मंगलवार को मण्डल में हड़कम्प मच गया। आक्रोशित वकीलों ने सूचना के साथ ही तुरन्त एक घंटे में न्यायिक कार्य स्थगित कर राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह नरूका और सचिव मनीष पाण्डिया की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर मण्डल के विखण्डन को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाने लड़ने का निर्णय लिया। नरूका ने बताया कि दो दिन विरोधस्वरूप मण्डल और अधिनस्थ न्यायालयों में न्यायिक कार्य नहीं किया जाएगा। हालांकि राजस्व विभाग ने मंगलवार दोपहर बाद 29 को होने वाली बैठक स्थगित कर दी है। 

इन अधिकारियों को बुलाया गया था बैठक में

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विशिष्ट शासन सचिव मीणा द्वारा राजस्व मंत्री रामलाल जाट की अध्यक्षता में रखी गई प्रस्तावित बैठक में राजस्व मण्डल के अध्यक्ष, राजस्व विभाग   के प्रमुख शासन सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव, जिला कलक्टर जयपुर और मण्डल के निबन्धक को बुलाया गया था। 

गत वर्ष लिया था प्रशासनिक कार्य अलग करने का निर्णय

राज्य सरकार ने सालों से चल रही इस मशक्कत पर गत वर्ष 7 जून को मोहर लगाते हुए  प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को अलग-अलग करने की मोहर लगाई थी। इसके तहत प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से आयुक्तालय के गठन का प्रस्ताव लिया गया। तब सरकार का तर्क था कि मौजूदा स्थिति में राजस्व प्रशासन एवं राजस्व न्यायालय प्रकरणों के पर्यवेक्षण का कार्य राजस्व मण्डल द्वारा ही किया जा रहा है। मण्डल में प्रशासनिक कार्यों का अत्यधिक दबाव होने के कारण राजस्व न्यायालयों के पर्यवेक्षण का कार्य अपेक्षित रूप से सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को अलग-अलग करने की आवश्यकता हो गई है। उल्लेखनीय है कि मण्डल मुख्यालय पर ही अकेले करीब 65 हजार प्रकरणों के फैसले लम्बित चल रहे हैं। इसके अलावा राज्यभर के संभागीय आयुक्त, राजस्व अपील प्राधिकारी, जिला कलक्टर, सहायक कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी और तहसील न्यायालय भी मण्डल के अधीन हैं। यहां भी राजस्व से संबंधित विभिन्न लम्बित मामलों की बड़ी संख्या है।

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तहसीलदार, गिरदावर और पटवारी के तबादले संबंधी कार्य होंगे हस्तान्तरित

राजस्व प्रशासन के नियन्त्रण व पर्यवेक्षण के लिए पृथक से प्रस्तावित राजस्व आयुक्तालय के गठन के बाद राज्य का समस्त राजस्व प्रशासन आयुक्तालय के अधीन रहेगा। जिसका मुख्य रूप से राजस्थान तहसीलदार सेवा, भू-अभिलेख निरीक्षक, पटवारी एवं तहसील राजस्व सेवा के अधिकारियों की सेवा संबंधी कार्यों की देखरेख व भू अभिलेख तैयारी व अन्य राजस्व प्रशासनिक कार्यों का पर्यवेक्षण रहेगा। इसके बाद तहसीलदारों से लेकर नायब तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी, डीआईएलआरएमपी और टीआरए, डीआरए के तबादले, नियुक्तियां, विभागीय जांच संबंधी अधिकार भी राजस्व मण्डल से हटा लिए जाएंगे। 

मौजूदा कार्यप्रणाली का ढांचा

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मण्डल में न्यायिक प्रकरणों की सुनवाई एवं उनकी मॉनिटरिंग के लिए न्याय शाखा के अलावा प्रशासनिक कामकाज के तहत वर्तमान तहसील संवर्ग के लिए आरटीएस, गिरदावर व पटवारी व डीआईएलआरएमपी के लिए एलआर, सांख्यिकी विंग, विभागीय जांच, राजस्व लेखा शाखा संचालित हैं। यहां मुख्य सचिव के समकक्ष वरिष्ठतम आईएएस स्तर के अधिकारी के रूप में चेयरमैन, वरिष्ठ आईएएस स्तर का रजिस्ट्रार, वरिष्ठ आरएएस स्तर का अतिरिक्त रजिस्ट्रार एवं तीन आरएएस स्तर के उप रजिस्ट्रार के पद संचालित हैं। जो इन शाखाओं की मॉनिटरिंग करते हैं। 

राव कमीशन गठन से की थी स्थापना

वकीलों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आयुक्तालय गठन पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व मण्डल के विखण्डन की तैयारिेयों के बीच अजमेर रियासत के 1956 में राजस्थान में हुए विलय के साथ विशेष समझौते का भी उल्लंघन होगा। राव कमेटी की सिफारिश पर ही अजमेर को राजस्व मण्डल सहित राजस्थान लोक सेवा आयोग, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं आयुर्वेदिक निदेशालय मिले थे। 

सत्ता का संतुलन भी होगा प्रभावित

अब तक राजस्व मण्डल में मुख्य सचिव स्तर के चेयरमैन के कारण यहां प्रशासनिक कार्यों के तहत राजस्व मंत्री भी उनको विश्वास में लेकर ही प्रशासनिक कार्यों पर निर्णय करते रहे हैं, ताकि सत्ता और प्रशासन का संतुलन बना रहे। लेकिन इस प्रस्ताव के बाद सत्ता का संतुलन भी विखण्डित होने की प्रबल संभावना हो जाएगी। यहां कार्यरत करीब 400 कार्मिकों में से न्याय शाखा और न्यायालयों में कार्य करने वाले कार्मिकों को छोड़कर करीब 300 कार्मिक भी प्रभावित हो जाएंगे। 

 

 

 

 

 

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