भारत का सड़क यातायात है असुरक्षित

त्रासद हादसों के मुख्य कारण है

भारत का सड़क यातायात है असुरक्षित

भारत का सड़क यातायात विकास की उपलब्धियों एवं प्रयत्नों के लिए असुरक्षित है। सुविधा की हादसे की सड़के नयी त्रासदी बन रही है।

भारत का सड़क यातायात विकास की उपलब्धियों एवं प्रयत्नों के लिए असुरक्षित है। सुविधा की हादसे की सड़के नयी त्रासदी बन रही है। इस मामले पर केंद्रित एक अध्ययन में बताया गया कि भारत में सड़क सुरक्षा के उपायों को सही कर हर साल 30 हजार से अधिक लोगों को बचाया जा सकता है। अध्ययन के मुताबिक सड़कों एवं त्रासद हादसों के मुख्य कारण है। वाहनों की तेज रफ्तार, शराब पीकर गाड़ी चलाना, हेलमेट नहीं पहनना और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना शामिल है। हर सड़क हादसे को केन्द्र एवं राज्य सरकारे दुर्भाग्यपूर्ण बताती है। उस पर दुख व्यक्त करती है, मुआवजे की घोषणा भी करती है, लेकिन एक्सीडेंट रोकने के गंभीर उपाय अब तक क्यों नहीं किए जा सके है। देश में सड़क परिवहन भारी अराजकता का शिकार है। सबसे भ्रष्ट विभागों में परिवहन विभाग शामिल है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी की ओर से दी गई यह जानकारी हतप्रभ करने वाली है कि देश में प्रतिदिन करीब 415 लोग सड़क हादसों का शिकार हो जाते है। कोई भी अनुमान लगा सकता है कि एक वर्ष में यह संख्या कहां तक पहुंच जाती होगी।

अध्ययन में यह तथ्य भी सामने आया कि सड़कों पर वाहनों की गति की जांच और रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने से भारत में बीस हजार से ज्यादा लोग हादसे का शिकार होने से बच सकते है। केवल हेलमेट पहनने को लोग अपने लिए अनिवार्य मानने लगे और यातायात की ओर से इस नियम का पालन सुनिश्चित किया जाए, तो इससे 5,683 लोग बचाए जा सकते है। इसी के साथ वाहनों में सफर करने वाले लोगों के बीच सीट बेल्ट के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर तीन हजार से अधिक लोगों को मरने से बचाया जा सकता है। इसके अलावा शराब पीकर वाहन चलाने की वजह से सड़क हादसों की कैसी तस्वीर बनती है, यह किसी से छिपा नहीं है। विचारणीय तथ्य है कि हर साल दुनिया में सड़क हादसों में 13 लाख से ज्यादा लोग हादसों का शिकार हो जाते है।

- ललित गर्ग
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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